स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान और समृद्ध भारत के संकल्प के साथ 30 जून तक देशभर में चलेगा अभियान
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के ग्राम रमासिया से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया। अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि देश की कृषि व्यवस्था की मजबूती का आधार स्वस्थ मिट्टी है। यदि मिट्टी सुरक्षित रहेगी तो खेती टिकाऊ बनेगी, किसान समृद्ध होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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मिट्टी की सेहत बचाने पर विशेष जोर
अभियान के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग वैज्ञानिक सलाह तथा मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर करें। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती है, लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं और खेती की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में संतुलित पोषण प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक विकल्पों तथा हरित खाद के उपयोग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
1 से 30 जून तक गांव-गांव पहुंचेगी वैज्ञानिकों की टीम
आज से 30 जून तक चलने वाले इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें और जनप्रतिनिधि गांव-गांव पहुंचकर किसानों को जागरूक करेंगे। किसानों को मिट्टी परीक्षण, जल संरक्षण, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीकों और फसल प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जाएगी।
विशेषज्ञ किसानों को यह भी बताएंगे कि उनके क्षेत्र की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार कौन-सी फसलें और किस्में अधिक लाभकारी हो सकती हैं। साथ ही बीज उपचार, फसल चक्र और संसाधन संरक्षण तकनीकों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
Soil Health Card बनेगा अभियान का प्रमुख आधार
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रत्येक किसान के पास सॉयल हेल्थ कार्ड होना चाहिए, जिससे वह अपनी भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की स्थिति को समझकर आवश्यकतानुसार उर्वरकों का प्रयोग कर सके। इससे उत्पादन लागत कम होगी, फसल उत्पादकता बढ़ेगी और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनी रहेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका उद्देश्य अधिक मात्रा में उपयोग नहीं, बल्कि वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना है।
नकली खाद और कीटनाशकों के खिलाफ भी चलेगा अभियान
अभियान के दौरान नकली उर्वरकों और कीटनाशकों के विरुद्ध भी विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। किसानों को असली और प्रमाणित कृषि आदानों की पहचान, सुरक्षित उपयोग तथा खरीद संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
सोयाबीन, धान और दलहन फसलों पर रहेगा विशेष फोकस
उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन को देखते हुए सोयाबीन, धान और दलहन फसलों के लिए विशेष प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीजों, लेजर लेवलर, जल-संरक्षण आधारित खेती और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से नियमित तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
अभियान को महिला सशक्तिकरण से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार, सूक्ष्म उद्यम और आयवर्धन गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। पात्र महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और उद्यमिता विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो सके।
युवाओं को मिलेगा मार्गदर्शन और रोजगार के अवसर
ग्रामीण युवाओं के लिए भी अभियान के दौरान मार्गदर्शन एवं कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आधारभूत संरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के अवसर सृजित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए बचानी होगी धरती की उर्वरता
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि धरती केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। यदि आज मिट्टी की सेहत की अनदेखी की गई तो भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए संतुलित उर्वरक उपयोग, हरित खाद, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।
जनभागीदारी से बनेगा राष्ट्रीय आंदोलन
उन्होंने विश्वास जताया कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे नियमित रूप से गांवों का दौरा कर किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएं और अभियान के उद्देश्यों को जमीनी स्तर तक पहुंचाएं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुपोषित बच्चों को पोषण किट का वितरण भी किया गया।
‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य संदेश स्पष्ट है— मिट्टी की सेहत बचेगी तो खेती टिकाऊ बनेगी, किसान समृद्ध होगा और भारत की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।


