भुवनेश्वर सम्मेलन में खेती सुधार का बड़ा रोडमैप!

पूर्वी भारत बनेगा कृषि विकास का ग्रोथ इंजन, भुवनेश्वर कृषि सम्मेलन में बनी बड़ी रणनीति !!

भुवनेश्वर। पूर्वी भारत की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में मंगलवार को कृषि सुधार, टिकाऊ खेती, प्राकृतिक कृषि, दलहन-तिलहन उत्पादन, वैज्ञानिक अनुसंधान और कृषि विपणन जैसे मुद्दों पर व्यापक मंथन हुआ। मेफेयर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री और ओडिशा के मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से किया। सम्मेलन में ओडिशा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्रियों, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, कृषि विशेषज्ञों, एफपीओ प्रतिनिधियों और किसानों ने भाग लिया। सम्मेलन में पूर्वी भारत की कृषि क्षमता को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि उपजाऊ भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और विविध जलवायु वाले पूर्वी राज्यों में कृषि क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति का नया इंजन बन सकता है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

“पूर्वी भारत में कृषि क्रांति की अपार संभावना”

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वी भारत की खेती और किसानों की आजीविका को मजबूत करने के लिए गंभीर चिंतन का मंच है। उन्होंने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ की पावन धरती पर जुटी “टीम एग्रीकल्चर” किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत की भूमि अत्यंत उर्वर है और यहां पानी की उपलब्धता भी अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है। यदि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और सही नीतियों को गांवों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए तो यही क्षेत्र देश के कृषि विकास का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन सकता है। केंद्रीय मंत्री ने किसानों को केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि “जीवनदाता” बताते हुए कहा कि किसानों की सेवा करना देश सेवा के समान है। उन्होंने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में कृषि की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।

खाद्य सुरक्षा से लेकर किसान समृद्धि तक तीन बड़े लक्ष्य !!

केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र के सामने तीन प्रमुख लक्ष्य रखे। पहला, देश की 140 करोड़ आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना। दूसरा, लोगों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना। और तीसरा, किसानों की आय बढ़ाकर उनकी आजीविका को मजबूत बनाना। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए खेती को पारंपरिक ढांचे से बाहर निकालना होगा। केवल धान और गेहूं आधारित खेती से आगे बढ़कर दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां और अन्य नकदी फसलों को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत इन सभी क्षेत्रों में अपार संभावनाओं से भरा हुआ है।

छोटी जोत वाले किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल !!

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूर्वी राज्यों में छोटे और सीमांत किसानों की संख्या अधिक है। ऐसे में केवल पारंपरिक खेती से किसानों की आय में बड़ा बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को छोटे किसानों के लिए सबसे प्रभावी विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि खेती के साथ पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़कर किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और आईसीएआर संस्थानों से आग्रह किया कि वे ऐसे सफल मॉडल गांव-गांव तक पहुंचाएं जिन्हें किसान आसानी से अपनाकर लाभ कमा सकें।

“खेत बचाओ, माटी बचाओ, किसान बचाओ” अभियान शुरू होगा !!

केंद्रीय कृषि मंत्री ने टिकाऊ खेती के लिए मिट्टी की सेहत को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिना मृदा परीक्षण के खादों का अत्यधिक उपयोग किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए 1 जून से देशभर में “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य खेती को कम लागत और अधिक लाभ वाला मॉडल बनाना है।

प्राकृतिक खेती पर सरकार का विशेष फोकस !!

सम्मेलन में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी जमीन के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती जरूर अपनाएं ताकि रासायनिक लागत कम हो और मिट्टी की सेहत सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों की लागत घटाने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बढ़ाने का रास्ता भी है।

नकली खाद, बीज और कीटनाशकों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी !!

केंद्रीय मंत्री ने नकली खाद, घटिया बीज और नकली कीटनाशकों को किसानों के खिलाफ “गंभीर अपराध” बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पाद किसानों की लागत बढ़ाने के साथ उत्पादन को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार ऐसे तत्वों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाएगी। राज्यों को भी निर्देश दिए जाएंगे कि वे कड़ी कानूनी कार्रवाई करें ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सब्सिडी वाले उर्वरकों का डायवर्जन रोकना जरूरी है ताकि सरकारी सहायता वास्तव में किसानों तक पहुंच सके।

दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर !!

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश को खाद्य तेल और दालों के आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। इसके लिए पूर्वी भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य और खरीद की गारंटी मिले तो दलहन और तिलहन उत्पादन में तेजी से वृद्धि हो सकती है। उन्होंने पीएम-आशा योजना, नैफेड, एनसीसीएफ और राज्य एजेंसियों की भूमिका को मजबूत करने की बात कही ताकि किसानों को समय पर भुगतान और बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके।

फार्मर आईडी से बदलेगी कृषि सेवाओं की व्यवस्था !!

केंद्रीय मंत्री ने फार्मर आईडी को कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव का बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की जमीन, परिवार और खेती से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इससे किसानों को ऋण, बीमा, खाद वितरण और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और तेज तरीके से मिल सकेगा। उन्होंने राज्यों से फार्मर आईडी अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक खेत तक पहुंचाने पर जोर !!

सम्मेलन में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के खेत तक प्रभावी प्रसार पर भी जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर और वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित तकनीक तभी सफल होगी जब उसका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विशेष कृषि अभियान चलाएं ताकि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव स्तर तक पहुंच सके।

बागवानी और निर्यात आधारित खेती पर फोकस !!

केंद्रीय मंत्री ने बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि आम, फल, सब्जियां और अन्य विशिष्ट फसलें किसानों को घरेलू बाजार के साथ निर्यात बाजार में भी बेहतर मूल्य दिला सकती हैं। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, आधुनिक नर्सरी व्यवस्था और बाजार आधारित कृषि उत्पादन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई।

ओडिशा ने रखा कृषि विविधीकरण का रोडमैप !!

मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि ओडिशा सरकार खेती को अधिक समावेशी, जलवायु-अनुकूल और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार दाल उत्पादन, खाद्य तेल आत्मनिर्भरता और क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि धान उत्पादन और खरीद बढ़ने के साथ भंडारण और विपणन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इसलिए उत्पादन के साथ मूल्य संवर्धन, कोल्ड स्टोरेज और बाजार व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।

मिलेट्स और ऑर्गेनिक खेती पर विशेष जोर !!

मुख्यमंत्री ने मिलेट्स को “सुपर फूड” बताते हुए कहा कि यह कम पानी और कम लागत में उगने वाली फसल है, जो विशेष रूप से आदिवासी और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी है। उन्होंने ऑर्गेनिक खेती, पारंपरिक बीज संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एफपीओ, कृषि उद्यमिता, कॉफी उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज और स्थानीय कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन को ओडिशा सरकार प्राथमिकता दे रही है

सम्मेलन में शामिल हुए कई राज्यों के प्रतिनिधि !!

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री , बिहार के कृषि मंत्री , छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री , पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधि , आईसीएआर महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, एफपीओ, स्टार्टअप्स, नाबार्ड और बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे।