गांव की डेयरी से करोड़ों के कारोबार तक पहुंची मधुर डेयरी
दशेला में उद्घाटन समारोह के दौरान मधुर डेयरी की विकास यात्रा भी चर्चा का केंद्र रही। वर्ष 1971 में केवल 6 हजार लीटर दूध संग्रह और लगभग 7 हजार रुपये के छोटे कारोबार से शुरू हुई यह डेयरी आज 628 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार तक पहुंच चुकी है।
पिछले पांच दशकों में डेयरी ने न केवल अपने नेटवर्क का विस्तार किया, बल्कि हजारों गांवों को रोजगार और स्थायी आय का माध्यम भी उपलब्ध कराया। डेयरी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आज मधुर डेयरी लाखों लीटर दूध का संग्रह, प्रसंस्करण और वितरण कर रही है तथा आधुनिक तकनीक के जरिए गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सहकारी डेयरी मॉडल की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि इसका लाभ सीधे किसानों और पशुपालकों तक पहुंचता है। निजी कंपनियों की तुलना में सहकारी संस्थाएं किसानों को बेहतर भुगतान और स्थिर बाजार उपलब्ध कराती हैं।
महिलाओं की आर्थिक ताकत बना डेयरी सेक्टर
समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि डेयरी सहकारिता ने ग्रामीण भारत की महिलाओं की जिंदगी बदलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित मानी जाती थीं, लेकिन आज डेयरी गतिविधियों के माध्यम से वे परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि गुजरात में लगभग 36 लाख महिलाएं प्रतिदिन 3 करोड़ लीटर दूध के व्यापार से जुड़ी हुई हैं। सहकारी डेयरी नेटवर्क के माध्यम से हर दिन करीब 200 करोड़ रुपये सीधे महिलाओं और पशुपालकों के बैंक खातों में पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है कि डेयरी क्षेत्र ने महिलाओं को घर बैठे स्थायी आय का अवसर दिया है। छोटे किसान, सीमांत किसान और भूमिहीन परिवार भी दो या तीन पशुओं के जरिए डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं।
“श्वेत क्रांति 2.0” के जरिए बड़ा लक्ष्य
कार्यक्रम में देश के डेयरी क्षेत्र के भविष्य को लेकर भी सरकार की रणनीति सामने आई। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में “श्वेत क्रांति 2.0” की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य अगले दस वर्षों में देश के दूध उत्पादन को तीन गुना तक बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि गुजरात की अमूल, बनास डेयरी और महेसाणा डेयरी जैसी संस्थाओं ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर यह साबित किया है कि सहकारिता मॉडल के जरिए किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। अब सरकार देशभर में इसी मॉडल को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
डेयरी क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, लेकिन बढ़ती आबादी और पोषण की जरूरतों को देखते हुए उत्पादन क्षमता और वैल्यू एडेड उत्पादों पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है।
दूध से आगे बढ़कर न्यूट्रिशन बाजार पर नजर
अब भारतीय डेयरी उद्योग केवल दूध और घी तक सीमित नहीं रह गया है। समारोह के दौरान यह भी बताया गया कि सहकारी डेयरियां अब हाई-प्रोटीन और न्यूट्रिशन आधारित उत्पादों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
प्रोटीन शेक, प्रो-बायोटिक दही, हाई-प्रोटीन पेय, फ्लेवर्ड मिल्क और हेल्थ ड्रिंक्स जैसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वैल्यू एडेड उत्पाद किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र निर्यात के नए अवसर खोल सकते हैं।
“सरलाबेन” के जरिए गांवों तक पहुंचेगी AI तकनीक
कार्यक्रम के दौरान अमूल के एआई डिजिटल सहायक “सरलाबेन” की भी विशेष चर्चा हुई। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य, चारा प्रबंधन, दूध उत्पादन और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाएं भविष्य में डेयरी सेक्टर की कार्यशैली बदल सकती हैं। पशुओं की बीमारी की शुरुआती पहचान, दूध उत्पादन की निगरानी और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं ग्रामीण पशुपालकों को सीधे लाभ पहुंचाएंगी।
सर्कुलर इकोनॉमी से बढ़ेगी किसानों की कमाई
सरकार अब डेयरी क्षेत्र को “सर्कुलर इकोनॉमी” मॉडल से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत गोबर गैस, जैविक खाद, पशु अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन जैसी गतिविधियों को डेयरी व्यवसाय के साथ जोड़ा जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि यदि डेयरी क्षेत्र में इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू किया गया तो किसानों और पशुपालकों की आय में कम से कम 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव हो सकती है।
कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि डेयरी क्षेत्र में अपशिष्ट प्रबंधन और बायोगैस आधारित ऊर्जा उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत बन सकता है।
सहकारिता मॉडल से ग्रामीण भारत को नई दिशा
दशेला में शुरू हुआ यह नया संयंत्र इस बात का संकेत है कि सरकार अब सहकारी संस्थाओं को केवल परंपरागत मॉडल तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक बाजार से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
जानकारो का मानना है कि यदि डेयरी सहकारिता मॉडल को इसी तरह मजबूत किया गया, तो यह कृषि के बाद ग्रामीण भारत में रोजगार और आय का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है।
मधुर डेयरी यूनिट-2 का उद्घाटन ऐसे समय में हुआ है जब देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यह परियोजना आने वाले वर्षों में देश के डेयरी सेक्टर के लिए एक नया मॉडल साबित हो सकती है।