बिहार में फार्मर रजिस्ट्री अभियान का दूसरा चरण शुरू, 30 जून तक बनेगी हर किसान की डिजिटल पहचान
पटना –किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बिहार सरकार ने राज्यभर में फार्मर रजिस्ट्री अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा इस अभियान का शुभारम्भ किया गया। यह अभियान किसानों की पहचान, सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और कृषि सेवाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। सरकार ने किसानों से इस डिजिटल सशक्तिकरण अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है।
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12 मई से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून तक चलेगा, जिसके तहत किसानों की डिजिटल पहचान यानी “फार्मर आईडी” तैयार की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं, खाद-बीज, फसल बीमा और कृषि अनुदान का लाभ बिना कागजी झंझट के सीधे उपलब्ध कराना है।
सरकार का दावा है कि यह पहल किसानों के लिए वैसी ही क्रांतिकारी साबित हो सकती है, जैसी डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूपीआई बनी। अब किसानों को बार-बार कागजात जमा करने या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक डिजिटल आईडी के जरिए उनकी पूरी कृषि संबंधी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।
पटना से हुई अभियान की शुरुआत
पटना स्थित कृषि भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अभियान की औपचारिक शुरुआत की। पहले चरण में पटना के फुलवारीशरीफ क्षेत्र के किसानों का रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया है। इसके बाद राज्य के सभी जिलों, पंचायतों और गांवों में विशेष कैंप लगाकर किसानों की फार्मर आईडी बनाई जाएगी।
राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव जाकर किसानों का पंजीकरण करेगी ताकि कोई भी पात्र किसान इस डिजिटल व्यवस्था से वंचित न रह जाए।
क्या होगी फार्मर आईडी की खासियत?
फार्मर आईडी किसानों की एक यूनिक डिजिटल पहचान होगी, जिसमें किसान की जमीन, फसल, बैंक खाते और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी दर्ज रहेगी। यह पहचान पत्र आधार कार्ड की तरह काम करेगा।
इस आईडी के जरिए किसान निम्न सुविधाओं का लाभ आसानी से उठा सकेंगे—
- पीएम-किसान सम्मान निधि का सीधा भुगतान
- फसल बीमा योजनाओं का त्वरित लाभ
- खाद और बीज पर मिलने वाली सब्सिडी
- कृषि उपकरणों पर अनुदान
- सरकारी खरीद और समर्थन मूल्य योजनाओं में प्राथमिकता
सरकार के अनुसार अब तक बिहार में लगभग 48 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है।
खाद वितरण में भी आएगी पारदर्शिता
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि आने वाले समय में किसानों को खाद वितरण भी फार्मर आईडी के आधार पर किया जाएगा। इससे खाद की कालाबाजारी और फर्जी खरीद पर रोक लगेगी। सही किसान को उचित मात्रा में खाद और कृषि सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी सहायता सीधे वास्तविक किसानों तक पहुंचेगी। लंबे समय से किसानों को बिचौलियों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं की वजह से परेशानी झेलनी पड़ती थी, लेकिन डिजिटल रजिस्ट्री से यह प्रक्रिया आसान होगी।
डिजिटल खेती की ओर बढ़ता बिहार
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री केवल पहचान पत्र नहीं, बल्कि भविष्य की “स्मार्ट खेती” की नींव है। इससे सरकार को यह जानकारी भी आसानी से मिलेगी कि किस इलाके में कौन-सी फसल बोई जा रही है, किसानों को किस प्रकार की सहायता चाहिए और आपदा की स्थिति में राहत कितनी जल्दी पहुंचाई जा सकती है।
डिजिटल डेटा के आधार पर सरकार कृषि योजनाओं की बेहतर मॉनिटरिंग कर सकेगी। इससे मौसम आधारित सलाह, बीमा क्लेम और कृषि ऋण जैसी सेवाओं को भी तेज और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अभियान में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई कर्मचारी किसानों को परेशान करता है या रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य है कि 30 जून तक राज्य के अधिकतम किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया जाए ताकि बिहार की कृषि व्यवस्था तकनीक आधारित और पारदर्शी बन सके।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए डिजिटल पहचान अनिवार्य हो सकती है। ऐसे में समय रहते फार्मर आईडी बनवाना किसानों के लिए बेहद जरूरी है। इससे भविष्य में खाद, बीज, बीमा, अनुदान और सरकारी सहायता प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
बिहार सरकार का यह अभियान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों को डिजिटल इंडिया मिशन से जोड़ने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

