कपास खेती को नई रफ्तार: 5659 करोड़ के राष्ट्रीय मिशन को मंजूरी, उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य !!
नई दिल्ली। देश के कपास क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और बहुप्रतीक्षित कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5659.22 करोड़ रुपये के कपास उत्पादकता मिशन को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना और किसानों की आय को मजबूत करना है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे “कपास अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर” बताया।
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क्यों जरूरी था यह मिशन ?
भारत दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल है और कुल वैश्विक उत्पादन में 21% से अधिक हिस्सेदारी रखता है। इसके बावजूद लंबे समय से यह क्षेत्र कई चुनौतियों से जूझ रहा है—कम उत्पादकता, बारिश पर निर्भर खेती, पिंक बॉलवर्म का खतरा, जलवायु परिवर्तन, और गुणवत्ता वाले बीज व इनपुट की कमी।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्पादन और मांग के बीच बढ़ता अंतर इस बात का संकेत था कि कपास सेक्टर में बड़े और वैज्ञानिक हस्तक्षेप की जरूरत है। यही वजह है कि सरकार ने इस मिशन को व्यापक रणनीति के तहत तैयार किया है।
5F विजन: खेत से फैशन तक मजबूत कड़ी !! 
यह मिशन सरकार के 5F विजन—Farm, Fiber, Factory, Fashion, Foreign—को आधार बनाकर तैयार किया गया है। इसका मकसद सिर्फ खेती तक सीमित नहीं, बल्कि कपास से जुड़े पूरे वैल्यू चेन को मजबूत करना है, ताकि किसान से लेकर टेक्सटाइल उद्योग तक सभी को लाभ मिल सके।
मिशन की खास बातें !!
कुल बजट: 5659.22 करोड़ रुपये
कवरेज: 14 राज्यों के 140 जिले
क्षेत्र: लगभग 24 लाख हेक्टेयर
लाभार्थी: करीब 32 लाख किसान
सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक कपास की उत्पादकता को 440 किलोग्राम/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम/हेक्टेयर किया जाए और उत्पादन को 297 लाख गांठों से बढ़ाकर 498 लाख गांठों तक पहुंचाया जाए।
रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर बड़ा फोकस !!
मिशन का एक अहम हिस्सा अनुसंधान और नई तकनीकों पर केंद्रित है। इसके तहत:
24 नई हाई-यील्ड और जलवायु-प्रतिरोधी किस्में विकसित की जाएंगी
जीनोम एडिटिंग, ट्रांसजेनिक तकनीक और बेहतर फाइबर क्वालिटी पर काम होगा
एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल और देसी कपास किस्मों को बढ़ावा मिलेगा
इसके लिए कृषि अनुसंधान विभाग के तहत 555 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
खेत तक पहुंचेगी आधुनिक खेती !!
कृषि मंत्रालय के तहत 3800 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि से नई तकनीकों को खेत स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इसमें शामिल हैं:
हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम
आधुनिक फसल प्रबंधन
बेहतर बीज और उर्वरक उपयोग
प्रदर्शन आधारित प्रशिक्षण
सरकार का दावा है कि इससे किसानों को सीधे फायदा होगा और उत्पादन लागत घटेगी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मजबूत !!
मंत्रिमंडल ने Shanghai Cooperation Organisation (SCO) देशों के साथ कृषि सहयोग समझौते को भी मंजूरी दी है। इसके तहत:
सुरक्षित कृषि व्यापार को बढ़ावा मिलेगा
प्लांट क्वारंटीन और फाइटोसैनिटरी सिस्टम मजबूत होंगे
कीट जोखिम कम करने में मदद मिलेगी
तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे
विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ेगी।
किसानों और उद्योग दोनों को फायदा !!
यह मिशन एक तरफ किसानों की आय बढ़ाने और जोखिम कम करने में मदद करेगा, वहीं दूसरी तरफ टेक्सटाइल उद्योग को बेहतर और स्थिर कच्चा माल उपलब्ध कराएगा। इससे भारत की पारंपरिक कपड़ा इंडस्ट्री को भी नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
क्या बदल सकता है आगे ?
अगर मिशन तय लक्ष्यों के अनुसार लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ उत्पादन में, बल्कि गुणवत्ता और निर्यात में भी वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
सरकार का यह कदम कृषि सुधारों की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जहां फोकस सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन के विकास पर है।

