केंद्र-राज्य, वैज्ञानिक और किसान संगठनों का संगम; क्रेडिट, डिजिटल कृषि और फसल विविधीकरण पर होगा निर्णायक मंथन
लखनऊ/नई दिल्ली, 22 अप्रैल-कृषि क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से 24 अप्रैल को लखनऊ में उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan की अगुवाई में होने वाला यह सम्मेलन उत्तर भारत के कृषि नेतृत्व को एक मंच पर लाकर किसान हित में ठोस कार्ययोजना तैयार करेगा। सम्मेलन में खेती, बाजार, तकनीक और कृषि अवसंरचना से जुड़े मुद्दों पर समग्र सुधारों पर विशेष फोकस रहेगा।
बहु-हितधारक भागीदारी से बनेगा रोडमैप
सम्मेलन में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और चंडीगढ़ सहित उत्तर भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्टार्टअप्स, कृषि विश्वविद्यालय, केवीके विशेषज्ञ और वित्तीय संस्थान भाग लेंगे। इस व्यापक भागीदारी के जरिए कृषि विकास को साझा जिम्मेदारी और समाधान के मॉडल पर आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई जाएगी।
खेती से बाजार तक सुधारों पर गहन चर्चा
कार्यक्रम में कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, बागवानी, दलहन-तिलहन मिशन, डिजिटल एग्रीकल्चर, फार्मर रजिस्ट्री और उर्वरक प्रबंधन जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके साथ ही कालाबाजारी पर नियंत्रण और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे मुद्दों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। सम्मेलन का उद्देश्य केवल समीक्षा नहीं, बल्कि आगामी खरीफ सीजन के लिए परिणामोन्मुख निर्णय लेना है।
राज्यों के सफल मॉडल होंगे साझा
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की सफल कृषि पहलों को साझा किया जाएगा। उत्तर प्रदेश की अंतरफसली खेती और डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस, हरियाणा की “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” योजना, पंजाब की फसल विविधीकरण पहल और पहाड़ी राज्यों की बागवानी मॉडल को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इससे अन्य राज्यों को व्यवहारिक समाधान अपनाने में मदद मिलेगी।
नीति और जमीन के बीच बनेगा मजबूत सेतु
इस मंच पर नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद होगा, जिससे योजनाओं को जमीनी जरूरतों से जोड़ने में मदद मिलेगी। सम्मेलन में महिला किसान उत्पादक संगठनों और एग्री-टेक कंपनियों की भागीदारी कृषि क्षेत्र को अधिक समावेशी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उच्चस्तरीय उपस्थिति से बढ़ेगी अहमियत
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री Yogi Adityanath के संबोधन के साथ नीति और प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, जिससे सम्मेलन के निष्कर्षों को लागू करने में तेजी आएगी।
राष्ट्रीय रणनीति की ओर एक बड़ा कदम
यह सम्मेलन देशभर में आयोजित हो रही जोनल कॉन्फ्रेंस श्रृंखला का अहम हिस्सा है, जो आगे चलकर राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में परिणत होगी। लखनऊ में होने वाला यह आयोजन क्षेत्रीय अनुभवों को राष्ट्रीय कृषि नीति में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन किसान आय बढ़ाने, लागत घटाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और डिजिटल कृषि को मजबूत करने के लिए नई दिशा तय करेगा। इससे न केवल आगामी खरीफ सीजन की तैयारियां सुदृढ़ होंगी, बल्कि कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की राह भी साफ होगी।


























