ग्लोबल जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम: ‘वॉटर फॉरवर्ड’ पहल से 2030 तक 1 अरब लोगों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य
वॉशिंगटन डी.सी., 15 अप्रैल 2026। ग्लोबल स्तर पर बढ़ते जल संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए एक अहम पहल की शुरुआत हुई है। इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD) ने विश्व बैंक समूह की नई पहल ‘वॉटर फॉरवर्ड’ से हाथ मिलाया है। इस पहल का उद्देश्य वर्ष 2030 तक दुनिया भर में लगभग 1 अरब लोगों को जल सुरक्षा प्रदान करना है।
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जल सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
IFAD के अध्यक्ष अल्वारो लारियो ने इस अवसर पर कहा कि खाद्य प्रणाली के शुरुआती चरण में पानी केवल एक इनपुट नहीं, बल्कि रोजगार, विकास और जलवायु सहनशीलता का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि IFAD का फोकस पानी से जुड़े निवेश को आर्थिक अवसर में बदलना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, उत्पादन स्थिरता और आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़े।
‘वॉटर फॉरवर्ड’: एक समन्वित वैश्विक प्लेटफॉर्म

यह पहल सरकारों, बहुपक्षीय विकास बैंकों, निजी क्षेत्र और परोपकारी संस्थाओं को एक मंच पर लाकर नीति सुधार, वित्तीय निवेश और प्रभावी क्रियान्वयन को एकीकृत करती है। इसका लक्ष्य ऐसे जल तंत्र विकसित करना है जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास को सहारा दे सकें और निवेश के लिए आकर्षक हों।
हर साल 350 मिलियन डॉलर का निवेश
IFAD हर साल लगभग 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर जल संबंधी सतत परियोजनाओं में निवेश करता है। यह निवेश न केवल सरकारी बल्कि निजी पूंजी को भी आकर्षित करता है, खासकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में जहां वित्तीय संसाधनों की कमी होती है। जल सुरक्षा को रोजगार, उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि का मूल आधार माना जा रहा है।
भारत में सकारात्मक प्रभाव के संकेत
भारत में IFAD के जल निवेश के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पेयजल और छोटे स्तर की सिंचाई परियोजनाओं के जरिए 96,000 से अधिक आदिवासी परिवारों की उत्पादकता बढ़ी है। इससे खाद्य सुरक्षा में सुधार हुआ है और लोगों को नए आय के स्रोत भी मिले हैं। साथ ही, ये समुदाय अब जलवायु परिवर्तन के झटकों का बेहतर सामना कर पा रहे हैं।
अफ्रीका में भी सफलता की मिसाल
इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में छोटे किसानों द्वारा संचालित सिंचाई परियोजनाओं ने फसल उत्पादन, आय, पोषण और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन की पहलें कितनी प्रभावी हो सकती हैं।
‘एग्रीकनेक्ट’ के साथ साझेदारी का विस्तार
यह नई साझेदारी IFAD और विश्व बैंक की ‘एग्रीकनेक्ट’ पहल को भी मजबूती देती है। इस कार्यक्रम के तहत 2030 तक 7 करोड़ छोटे किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य किसानों को बाजार, वित्त और मूल्य श्रृंखला से जोड़कर ग्रामीण उद्यम और रोजगार को बढ़ावा देना है।
निवेश पर कई गुना रिटर्न
IFAD का दावा है कि वह हर डॉलर के निवेश को जमीन पर लगभग छह डॉलर के प्रभावी निवेश में बदलता है। आंकड़ों के अनुसार, इन परियोजनाओं से ग्रामीण आय, उत्पादकता और बाजार पहुंच में 30% से अधिक की वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों की राय: जल प्रबंधन ही भविष्य की कुंजी
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में जल संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में ‘वॉटर फॉरवर्ड’ जैसी पहलें न केवल जल संरक्षण बल्कि आर्थिक स्थिरता और सामाजिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होंगी।
सारांश
‘वॉटर फॉरवर्ड’ पहल वैश्विक स्तर पर जल संकट के समाधान की दिशा में एक निर्णायक कदम है। IFAD की भागीदारी से यह स्पष्ट हो गया है कि अब जल को केवल संसाधन नहीं, बल्कि विकास और समृद्धि के साधन के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह पहल अपने लक्ष्यों को हासिल करती है, तो यह दुनिया के करोड़ों ग्रामीण परिवारों के जीवन में ठोस बदलाव ला सकती है।