करबी आंगलोंग की GI-टैग अदरक की 21.2 मीट्रिक टन खेप पहली बार लंदन निर्यात !!

करबी आंगलोंग की GI-टैग अदरक की 21.2 मीट्रिक टन खेप पहली बार लंदन निर्यात !!

गुवाहाटी -असम के कृषि इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। करबी आंगलोंग की जीआई-टैग प्राप्त अदरक ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखते हुए लंदन के लिए उड़ान भरी है। यह उपलब्धि न केवल किसानों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है। गुवाहाटी स्थित कृषि भवन में 21.2 मीट्रिक टन प्रीमियम ताजा अदरक की खेप को असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अदरक सीधे करबी आंगलोंग के मेहनती किसानों से स्रोतित किया गया है। इस निर्यात के साथ ही करबी आंगलोंग जिंजर ने ग्लोबल बाजार में अपनी औपचारिक उपस्थिति दर्ज करा दी है। उल्लेखनीय है कि करबी आंगलोंग जिंजर को हाल ही में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ है, जो इसकी विशिष्ट गुणवत्ता, स्वाद और उत्पादन क्षेत्र की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित करता है।

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ग्लोबल पहचान की ओर असम की कृषि !!

लंदन को पहली खेप भेजा जाना केवल एक व्यावसायिक सौदा नहीं, बल्कि असम के कृषि उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का संकेत है। ब्रिटेन और यूरोपीय बाजारों में प्राकृतिक, ऑर्गेनिक और विशिष्ट भौगोलिक पहचान वाले उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में करबी आंगलोंग की अदरक, जो अपने तीखे स्वाद, उच्च तेल सामग्री और बेहतर गुणवत्ता के लिए जानी जाती है, अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के बीच अपनी अलग पहचान बना सकती है। राज्य सरकार का मानना है कि जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के निर्यात से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी। यह पहल मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता मानकों के अनुपालन और निर्यात उन्मुख कृषि नीति को बढ़ावा देती है।

नेतृत्व और नीतिगत समर्थन !!

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम सरकार कृषि निर्यात को नई दिशा देने में जुटी है। राज्य में ‘फार्म टू फॉरेन’ रणनीति के तहत उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और लॉजिस्टिक्स तक की श्रृंखला को सुदृढ़ किया जा रहा है। इस निर्यात पहल को साकार करने में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और नेक्स्टऑन फूड्स प्राइवेट लिमिटेड. की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन संस्थाओं ने किसानों और राज्य कृषि विभाग के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रोसेसिंग, पैकिंग और निर्यात प्रबंधन सुनिश्चित किया।

किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाएं !!

विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई-टैग उत्पादों के निर्यात से किसानों को 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक मूल्य प्राप्त हो सकता है। यदि यह निर्यात मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में हल्दी, काली मिर्च, जोहा चावल और अन्य पारंपरिक फसलों को भी वैश्विक बाजार में बढ़ावा मिल सकता है। करबी आंगलोंग के किसानों के लिए यह पहल आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है। निर्यात से जुड़ाव उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों, बेहतर फसल प्रबंधन और गुणवत्ता सुधार की ओर प्रेरित करेगा।

कार्यक्रम में मौजूद रहे अधिकारी !!

इस अवसर पर कृषि विभाग की आयुक्त एवं सचिव तथा कृषि उत्पादन आयुक्त अरुणा राजोरिया, कृषि निदेशक डॉ. पी. उदय प्रवीण, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, एपीडा की महाप्रबंधक विनीता सुधांशु और नेक्स्टऑन फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सारांश !!

यह निर्यात केवल एक शुरुआत है। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्पादन में वृद्धि, गुणवत्ता सुधार, प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना और वैश्विक बाजारों में स्थायी उपस्थिति दर्ज कराना है। करबी आंगलोंग की अदरक की यह खेप असम की कृषि को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में मजबूत कदम है — और यह संदेश भी कि अब असम का किसान स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने को तैयार है।

चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया