वैज्ञानिक बकरी एवं भेड़ पालन पर सात दिवसीय प्रशिक्षण का समापन, 50 पशुपालकों को प्रमाण पत्र वितरित
पोकरण। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), पोकरण में स्व-वित्तपोषित योजना के तहत आयोजित वैज्ञानिक बकरी एवं भेड़ पालन विषयक सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह एवं प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में फलोदी, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर सहित आसपास के विभिन्न जिलों से आए 50 किसानों एवं पशुपालकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
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बकरी-भेड़ पालन को बनाएं लाभकारी व्यवसाय : उपखंड अधिकारी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपखंड अधिकारी पोकरण हीर सिंह चारण ने कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर इसे लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पशुपालन योजनाओं की जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र से प्राप्त करें और उनका अधिकतम लाभ उठाएं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बकरी एवं भेड़ पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसे स्वरोजगार के मजबूत माध्यम के रूप में अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने पशुपालकों को संगठित ढंग से कार्य करने, वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने तथा बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने की सलाह दी।
केंद्र की गतिविधियों का कराया अवलोकन
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने प्रतिभागियों को केंद्र की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा प्रशिक्षण, प्रदर्शन, प्रक्षेत्र परीक्षण, बीज उत्पादन, कृषक गोष्ठी, अनुसंधान से खेत तक तकनीक हस्तांतरण, पोषण वाटिका, क्रॉप कैफेटेरिया, वर्मीकम्पोस्ट, ‘थार शोभा खेजड़ी’ एवं प्राकृतिक खेती जैसी इकाइयों का संचालन किया जा रहा है। प्रतिभागियों को इन इकाइयों का भ्रमण कराकर व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान की गई।
बैंक ऋण प्रक्रिया पर दी जानकारी
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पोकरण के सहायक प्रबंधक पुष्कर ने पशुपालन व्यवसाय के लिए ऋण प्रक्रिया को सरल बनाने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पशुपालक राष्ट्रीयकृत बैंकों से विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आसान शर्तों पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने समय पर भुगतान और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर भी जोर दिया।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन एवं ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
पशुपालन वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. राम निवास ने देश में बकरी एवं भेड़ों की वर्तमान जनसंख्या, प्रमुख चुनौतियां एवं भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, अनुदान की शर्तें एवं पात्रता मानदंडों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर पशुपालक अधिक उत्पादन और आय अर्जित कर सकते हैं।
चारा प्रबंधन एवं नस्ल सुधार पर जोर
डॉ. कृष्ण गोपाल व्यास ने चारा वृक्ष एवं फसलों—शहतूत, अरडू, सहजन और नेपियर घास—की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनियंत्रित प्रजनन, नस्लों का अंतर्मिश्रण, अनुचित रख-रखाव, वर्ष के अधिकांश समय पोषण का निम्न स्तर और रोग प्रबंधन की कमी पशुपालन में प्रमुख बाधाएं हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन आवश्यक है।
उन्होंने यह भी बताया कि भेड़ एवं बकरी के दुग्ध उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। भेड़ के दूध से बनने वाला चीज अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष महत्व रखता है और इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।
उन्नत तकनीकों से बढ़ेगा मुनाफा
पशु प्रसार अधिकारी पृथ्वीराज सोलंकी ने वैज्ञानिक भेड़ एवं बकरी पालन की तकनीकों—संतुलित आहार, उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले नर का चयन, घटते चराई संसाधनों का संरक्षण एवं पुनरुद्धार—के लाभ बताए।
प्रसार वैज्ञानिक सुनील कुमार शर्मा ने केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों को अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने ‘आविशान’ नस्ल की विशेषताओं एवं संपूर्ण आहार वटिका के उपयोग से अधिक उत्पादन एवं लाभ प्राप्त करने की जानकारी दी।
प्रतिभागियों को वितरित किए प्रमाण पत्र
समापन अवसर पर प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रतिभागियों—राजूराम, रतनदान, देवी सिंह, विक्रम सिंह, समसुद्दीन, भूर सिंह, जगदीश, कबीरा राम, भोम सिंह, हसीना सहित अन्य पशुपालकों—को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से बकरी एवं भेड़ पालन को प्रोत्साहित कर ग्रामीण क्षेत्रों में आय वृद्धि, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना रहा। आयोजन के अंत में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।