कोयंबटूर में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: प्राकृतिक खेती को विज्ञान-आधारित राष्ट्रीय आंदोलन बनाने का संकल्प, 21वीं पीएम-किसान किस्त जारी
कोयंबटूर (तमिलनाडु)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग समिट 2025 का उद्घाटन किया और किसानों के लिए कई बड़े ऐलान किए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने 9 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18,000 करोड़ रुपये की 21वीं पीएम-किसान किस्त जारी की। कार्यक्रम में देशभर के किसान, कृषि वैज्ञानिक, प्राकृतिक खेती विशेषज्ञ, उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि और स्टार्टअप फाउंडर्स बड़ी संख्या में मौजूद थे।
पीएम मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत मरुधमलाई के भगवान मुरुगन को नमन कर की। उन्होंने कोयंबटूर को दक्षिण भारत की उद्यमिता, संस्कृति और नवाचार की धरती बताते हुए कहा कि यह शहर भारत के वस्त्र उद्योग और आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोयंबटूर का नाम अब और ऊंचा हुआ है क्योंकि इसके पूर्व सांसद सी.पी. राधाकृष्णन देश के उपराष्ट्रपति के रूप में सेवा दे रहे हैं।
“भारत प्राकृतिक खेती का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर” — प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भारत की पारंपरिक पद्धति है, बल्कि यह 21वीं सदी की जरूरत भी है। उन्होंने बताया कि देश में मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण, रसायन-मुक्त खेती और जलवायु परिवर्तन के बीच प्राकृतिक खेती एक प्रभावी समाधान बनकर उभर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा—
“भारत प्राकृतिक खेती का ग्लोबल हब बनने की तेज़ राह पर है। आने वाले वर्षों में खेती के हर क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेंगे।”
उन्होंने कहा कि आज भारत के युवा कृषि को पारंपरिक पेशे नहीं, बल्कि बड़ा अवसर मानकर आगे बढ़ रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कृषि क्षेत्र में 11 वर्षों के सुधारों का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों से देश का कृषि निर्यात लगभग दोगुना हुआ है। उन्होंने कहा कि —
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इस वर्ष किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई।
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7 वर्ष पहले केसीसी को पशुपालन और मत्स्यपालन से जोड़ने के बाद इन क्षेत्रों के लाखों लोगों को लाभ मिला।
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जैविक खाद पर जीएसटी में बड़ी कटौती कर किसानों की लागत घटाई गई।
उन्होंने कहा कि पीएम-किसान योजना के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे जा चुके हैं, जिन्होंने छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
मिट्टी की थकान और लागत बढ़ने पर चेतावनी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम कर रहा है, नमी पर प्रभाव डाल रहा है और खेती की लागत हर साल बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका समाधान दो बातों में है—
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फसल विविधता 2. प्राकृतिक खेती
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी को पुनर्जीवित करती है, बल्कि जलवायु परिवर्तन और मौसम के उतार-चढ़ाव से निपटने में भी मदद करती है।
“एक एकड़, एक सीजन”—प्रधानमंत्री की किसानों से विशेष अपील
प्रधानमंत्री ने किसानों से आग्रह किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाने की दिशा में छोटा लेकिन प्रभावी कदम उठाएं। उन्होंने कहा—
“मैं सभी किसानों से अपील करता हूं—एक एकड़, एक सीजन। सिर्फ एक सीजन के लिए एक एकड़ में प्राकृतिक खेती करें, नतीजे खुद बताएंगे कि यह रास्ता सही है।”
उन्होंने बताया कि एक साल पहले शुरू किए गए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से लाखों किसान जुड़ चुके हैं और इसका सबसे अधिक प्रभाव दक्षिण भारत में देखने को मिल रहा है।
तमिलनाडु में करीब 35,000 हेक्टेयर क्षेत्र में अब जैविक और प्राकृतिक खेती हो रही है।
श्री अन्न (मिलेट्स) और प्राकृतिक खेती—धरती मां की सुरक्षा का मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मिलेट्स और प्राकृतिक खेती का संयोजन भारत की कृषि विरासत और पोषण सुरक्षा दोनों को सशक्त करता है।
उन्होंने बताया कि—
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तमिलनाडु में भगवान मुरुगन को परोसे जाने वाले ‘तेनम थिनाई मावुम’ में श्री अन्न का विशेष महत्व है।
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कंबू, समाई, रागी, सजा और जोन्ना दक्षिण भारत के पारंपरिक भोजन का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार मिलेट्स को वैश्विक बाजार में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है और रसायन-मुक्त खेती इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दक्षिण भारत—फसल विविधता और जल प्रबंधन की “जीवित यूनिवर्सिटी”
प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण भारत की कृषि परंपरा को वैश्विक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा—
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केरल और कर्नाटक के पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेती आज भी मौजूद है।
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एक ही जमीन पर नारियल, सुपारी, फल, मसाले और काली मिर्च जैसी बहुस्तरीय खेती दक्षिण भारत की पहचान है।
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कलिंगारायण नहर (13वीं सदी) और प्राचीन मंदिरों के जलाशय विकेन्द्रित जल संरक्षण प्रणाली का उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा—
“दक्षिण भारत ने हजारों वर्ष पहले वैज्ञानिक जल इंजीनियरिंग की नींव रखी थी। प्राकृतिक खेती के नेतृत्व की जिम्मेदारी भी यहीं से उभरेगी।”
किसानों के खेत बनेंगे ‘जीवित लैब’: अनुसंधान संस्थानों से आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों और कृषि शोध संस्थानों से कहा कि प्राकृतिक खेती को कृषि शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि—
“किसानों के खेत शोध की जीवित प्रयोगशालाएं बनें। हमारा लक्ष्य प्राकृतिक खेती को वैज्ञानिक आंदोलन के रूप में स्थापित करना है।”
उन्होंने बताया कि देशभर में बने 10,000 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इनका उपयोग करके छोटे किसानों को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, वैल्यू एडिशन और ई-नाम जैसे डिजिटल बाजारों से जोड़ा जा सकता है।
समिट के प्रभाव को लेकर पीएम मोदी का विश्वास
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समिट देश में प्राकृतिक खेती को नई दिशा देगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, सुरक्षित और टिकाऊ खेती मॉडल तैयार करेगा।
समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि, केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन सहित कई वरिष्ठ नेता और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग समिट 2025: पृष्ठभूमि
यह समिट 19–21 नवंबर 2025 के बीच आयोजित की जा रही है।
मुख्य उद्देश्य:
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सतत, रसायन-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना
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किसानों, FPO, स्टार्टअप और बाजार के बीच समन्वय
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जैविक खाद, प्राकृतिक पोषक तत्व, कम लागत वाली तकनीक और कृषि प्रसंस्करण पर विशेष प्रदर्शनी
इसमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से 50,000 से अधिक किसान और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।