September 11, 2026 10:09 PM

Krishi Times

Archive story

लीची बागानों के लिए अलर्ट, अभी करें सही देखभाल!

बिहार में लीची बागानों के लिए एडवाइजरी जारी, फल सेट के समय कीट-रोग प्रबंधन पर जोर

पटना। कृषि विभाग, बिहार सरकार ने राज्य के लीची उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। विभाग के अनुसार, लीची की शाही किस्मों में इस समय फल लगने (फ्रूट सेट) की प्रक्रिया जारी है, जबकि चाइना किस्म में यह प्रक्रिया थोड़ी देर से पूरी होगी। ऐसे में किसानों को बागानों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई है।

एडवाइजरी में बताया गया है कि वर्तमान समय में लीची बागानों में मुख्य रूप से स्टिंक बग, फ्लावर वेबर और फल बेधक कीट का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा मंजर और फल झुलसा जैसे रोगों के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

नमी और उर्वरक प्रबंधन जरूरी

कृषि विभाग ने किसानों को बागानों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। साथ ही प्रति पेड़ 500-600 ग्राम यूरिया और 600 ग्राम एमओपी (पोटाश) का उपयोग करने को कहा गया है। उर्वरक का प्रयोग पेड़ के चारों ओर उचित दूरी पर मिट्टी में मिलाकर करना चाहिए।

कीट नियंत्रण के लिए निर्देश

जिन बागानों में स्टिंक बग का प्रकोप नहीं है, वहां फ्लावर वेबर और फल बेधक कीट से बचाव के लिए थियाक्लोप्रिड या नोवाल्यूरॉन आधारित कीटनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं, जहां स्टिंक बग का प्रकोप है, वहां थियाक्लोप्रिड और लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन के मिश्रण का छिड़काव प्रभावी बताया गया है।

फल विकास के बाद ही छिड़काव करें

विशेषज्ञों ने कहा है कि जब फल मटर के आकार का हो जाए, तभी कीटनाशकों का छिड़काव करें। इससे फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और उत्पादन बेहतर होता है।

रोग नियंत्रण के उपाय

मंजर और फल झुलसा रोग से बचाव के लिए कीटनाशकों के साथ थायोफेनेट मिथाइल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा बेहतर परिणाम के लिए स्प्रे में स्टिकर या सर्फ का उपयोग भी जरूरी बताया गया है।

बोरॉन का छिड़काव बढ़ाएगा गुणवत्ता

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि 15 दिन के अंतराल पर बोरॉन (20-21%) का छिड़काव करने से फल फटना कम होगा और आकार व गुणवत्ता में सुधार होगा।

किसान कहां लें सलाह

किसानों को अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर से संपर्क करने की सलाह दी गई है। यहां विशेषज्ञों द्वारा लीची की उन्नत खेती और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

सारांश

कृषि विभाग की इस एडवाइजरी से स्पष्ट है कि यदि किसान समय पर कीट और रोग प्रबंधन के उपाय अपनाते हैं, तो लीची उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

चित्र सौजन्य: इकबाल फारूकी, कृषि टाइम्स