किसानों के लिए खुशखबरी: बकरी और भेड़ पालन में नई खोज

ISSGPU 2025: बकरी और भेड़ पालन में नई क्रांति! मथुरा, 6 मार्च – केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम में तीन दिवसीय बकरी एवं भेड़ उत्पादन और उपयोग भारतीय सोसाइटी (ISSGPU) की अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। यह महत्वपूर्ण आयोजन केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर, राजस्थान के सहयोग से किया गया। इस अंतर्राष्ट्रीय … Read more

बिहार का मखाना: परंपरा से सुपरफूड बनने तक का सफर!

मखाना: बिहार का सफेद सोना, जो बदल रहा है किसानों की तकदीर! भारत का बिहार राज्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा के लिए जाना जाता है। इसी संपदा में एक अनमोल उपहार है “मखाना,” जिसे ई-लिली के बीज के रूप में भी जाना जाता है। “बिहार का सफेद सोना” भी कहा जाता है। डॉ.मनोज … Read more

बायोटेक खेती: भारत के किसानों के लिए सुनहरा अवसर!

“आधुनिक खेती का नया युग: जैव प्रौद्योगिकी के कमाल से!” जैव प्रौद्योगिकी का क्रांतिकारी प्रभाव: जैव प्रौद्योगिकी ने कृषि, जलीय कृषि और पशु विज्ञान में बड़ा बदलाव लाया है। यह फसल सुधार, रोग प्रबंधन और टिकाऊ कृषि के नए तरीके ला रही है। हाल ही में जीनोम एडिटिंग, आणविक प्रजनन और जैव नियंत्रण समाधानों में … Read more

14वें एशियाई मत्स्य पालन और जलीय कृषि फोरम का आयोजन

सतत मत्स्य पालन और जलीय कृषि की दिशा में नए कदम 14वां एशियाई मत्स्य पालन और जलीय कृषि फोरम (14 एएफएएफ) आज से नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष का विषय “एशिया-प्रशांत में ब्लू ग्रोथ को हरित बनाना” है। यह प्रतिष्ठित त्रैवार्षिक आयोजन एशियाई मत्स्य पालन सोसायटी (एएफएस) द्वारा किया जाता … Read more

प्राकृतिक मोती की खेती के लिए सरकार की खास पहल

भारत सरकार प्राकृतिक मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए कोशिश नई दिल्ली, भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने प्राकृतिक मोती की खेती (नैचुरल पर्ल फारमिंग) को बढ़ावा देने के लिए कई अहम पहल की हैं। राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से यह प्रयास … Read more

विश्व दलहन दिवस: पोषण, कृषि और सतत विकास को बढ़ावा देने का अवसर

भारत में दलहन उत्पादन और सरकारी योजनाएं हर साल 10 फरवरी को विश्व दलहन दिवस (World Pulses Day) मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित किया गया था, ताकि दलहन (पल्सेज़) के महत्व को उजागर किया जा सके और उनके सतत उत्पादन और खपत को बढ़ावा दिया जा सके। दलहन: पोषण का … Read more

औषधीय पौधों के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

शतावरी – महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुष मंत्रालय का विशेष अभियान महिलाओं के स्वास्थ्य को सशक्त बनाने और विकसित भारत के पंच प्राण लक्ष्य को प्राप्त करने में शतावरी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी:  प्रतापराव जाधव, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय औषधीय पौधों के स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से  … Read more

जलवायु अनुकूल फसलों की 2661 किस्में हुई विकसित

जलवायु के हिसाब से फसलों की नई किस्में पिछले दस साल में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से जुड़ी संस्थाओं ने 2014-2024 के दौरान विभिन्न फसलों की 2900 किस्में विकसित की हैं, जिनमें से 2661 किस्में जलवायु के लिहाज़ से मज़बूत हैं। इस अवधि के दौरान, केरल राज्य के लिए 63 क्षेत्रीय फसल किस्मों का विकास किया गया है, जिनमें अनाज की 23, तिलहन की 2, दालों के 10, चारा फसलों की 15 और … Read more

राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र: अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी

अनुसंधान और नवाचार में नई उपलब्धियाँ राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएम), दरभंगा, मखाना अनुसंधान और नवाचार के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। यह केंद्र वैज्ञानिकों की कुशल टीम द्वारा समर्थित है और मखाना उत्पादन को उन्नत बनाने के लिए विभिन्न अनुसंधान कार्यक्रम चला रहा है। प्रमुख अनुसंधान और नवाचार … Read more

वर्टिकल फार्मिंग: कम जगह में अधिक उपज और जल बचत

वर्टिकल फार्मिंग के फायदे आज के समय में बढ़ती जनसंख्या और घटती खेती योग्य भूमि के कारण कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों की आवश्यकता बढ़ गई है। पारंपरिक खेती के मुकाबले वर्टिकल फार्मिंग (Vertical Farming) एक आधुनिक और कुशल कृषि पद्धति के रूप में उभर रही है। यह तकनीक शहरी क्षेत्रों में खेती को संभव … Read more