MAP तकनीक बनी बिहार की लीची की ग्लोबल पासपोर्ट!

बिना कोल्ड चेन दुबई पहुंची बिहार की लीची, ICAR की नई तकनीक ने खोले ग्लोबल बाजार के द्वार

मुजफ्फरपुर, 16 जून। बिहार की प्रसिद्ध लीची अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही है। ICAR के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र ने निजी क्षेत्र और किसान उत्पादक संगठनों के सहयोग से चाइना किस्म की लीची का सफलतापूर्वक दुबई (यूएई) निर्यात कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

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इस उपलब्धि को संभव बनाने में Vishvaksenah Agro and Dairy Pvt. Ltd., Vishvaksenah Herbs and Aromatic Pvt. Ltd. तथा Tirhut Honey FED Producer Company Ltd. की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष बात यह रही कि लीची का यह निर्यात बिना किसी कोल्ड चेन व्यवस्था के किया गया, जिससे परिवहन लागत में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।

MAP तकनीक से सुरक्षित पहुंची लीची

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित संशोधित वातावरण पैकेजिंग (Modified Atmosphere Packaging-MAP) आधारित परिवेश तापमान पर लंबी दूरी परिवहन प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए लीची फलों को दुबई भेजा गया। निर्यातित फलों ने अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, प्राकृतिक रंग, ताजगी और स्वाद को बनाए रखा तथा उपभोक्ताओं द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त की।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद करती है और परिवहन के दौरान फलों के खराब होने की संभावना को कम करती है। इससे न केवल निर्यात की लागत घटेगी बल्कि छोटे एवं मध्यम स्तर के उत्पादकों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होगी।

बिहार की लीची को ग्लोबल पहचान का नया मंच

बिहार देश के प्रमुख लीची उत्पादक राज्यों में शामिल है और मुजफ्फरपुर की लीची अपनी गुणवत्ता एवं स्वाद के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। अब MAP आधारित तकनीक के सफल उपयोग से मध्य-पूर्व सहित अन्य देशों में भी बिहार की लीची की मांग बढ़ने की संभावना है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक का बड़े स्तर पर विस्तार किया गया तो किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा, निर्यात में वृद्धि होगी तथा राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

किसानों और निर्यातकों के लिए नए अवसर

यह सफलता किसानों, व्यापारियों, स्टार्टअप्स और निर्यातकों के लिए नए व्यावसायिक अवसर लेकर आई है। साथ ही यह अनुसंधान संस्थानों, निजी कंपनियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के बीच प्रभावी साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है।

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकाश दास ने इस उपलब्धि पर सभी वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों, कृषकों, उद्यमियों और निर्यातकों को बधाई देते हुए कहा कि यह तकनीक बिहार की लीची को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।