अंडेशनगर फार्म बना हाईटेक बदलेगा डेयरी भविष्य!

ऑटोमैटिक मिल्किंग और IVF तकनीक से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

लखीमपुर खीरी- उत्तर प्रदेश, विशेष संवाददाता-पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी), मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के सचिव नरेश पाल गंगवार ने अतिरिक्त सचिव सुश्री वर्षा जोशी के साथ उत्तर प्रदेश स्थित अंडेशनगर केंद्रीय पशु प्रजनन फार्म का विस्तृत निरीक्षण किया। इस उच्चस्तरीय दौरे का मुख्य उद्देश्य फार्म में चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों, आधुनिकीकरण योजनाओं और भविष्य की रणनीतियों की समीक्षा करना रहा। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर विभिन्न इकाइयों का जायजा लिया और कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्हें और तेज गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

बुनियादी ढांचे और योजनाओं की गहन समीक्षा

दौरे के दौरान सचिव और उनकी टीम ने फार्म में चल रही प्रमुख परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की। इसमें पशु आवास, दुग्ध उत्पादन इकाइयों, चारा प्रबंधन और अनुसंधान गतिविधियों से जुड़ी सुविधाओं का निरीक्षण शामिल रहा।
अधिकारियों के सामने क्षेत्रीय चारा केंद्रों (Regional Fodder Stations) को मजबूत बनाने का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें फाउंडेशन सीड उत्पादन, उन्नत चारा विकास और भंडारण पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा साइलैज निर्माण, सूखी घास (हे) उत्पादन और किसानों व तकनीकी कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि चारा प्रबंधन में सुधार से पशुओं की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव हो सकेगी।

आधुनिक डेयरी तकनीकों को बढ़ावा

निरीक्षण के दौरान सचिव ने अत्याधुनिक ऑटोमैटिक मिल्किंग पार्लर और आधुनिक पशु आवास सुविधा का उद्घाटन किया। यह सुविधा पूरी तरह से टच-फ्री मिल्किंग सिस्टम पर आधारित है, जिससे दूध निकालने की प्रक्रिया अधिक स्वच्छ, तेज और कुशल बनती है।
इस तकनीक के जरिए न केवल दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि पशुओं पर पड़ने वाला तनाव भी कम होता है। पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए आधुनिक आवास में बेहतर वेंटिलेशन, साफ-सफाई और आरामदायक वातावरण सुनिश्चित किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की आधुनिक तकनीकों को अपनाने से भारत के डेयरी क्षेत्र में उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिलेगा।

एनडीडीबी के तहत व्यापक सुधार अभियान

अप्रैल 2023 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को इन केंद्रीय पशु प्रजनन फार्मों के व्यापक सुधार और पुनर्गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद से अंडेशनगर (उत्तर प्रदेश), आलमडी (तमिलनाडु) और धमरोड (गुजरात) स्थित फार्मों में योजनाबद्ध तरीके से सुधार कार्य किए जा रहे हैं।
इन सुधारों के तहत वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों को अपनाकर उच्च गुणवत्ता वाली गाय और भैंसों की नस्ल विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे बेहतर आनुवंशिक गुणों वाले पशु तैयार किए जा रहे हैं, जो अधिक दूध उत्पादन और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जाने जाते हैं।

IVF-ET तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाले पशु तैयार

फार्मों में आईवीएफ-ईटी (In Vitro Fertilization – Embryo Transfer) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं का उत्पादन संभव हो रहा है।
यह तकनीक देश में डेयरी क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर किसानों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपने पशुपालन व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना सकें।

डेयरी नवाचार के उत्कृष्ट केंद्र बनते फार्म

एनडीडीबी की पहल के तहत इन फार्मों को ‘डेयरी नवाचार के उत्कृष्ट केंद्र’ (Centres of Excellence) के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी विकास को एक साथ जोड़कर डेयरी सेक्टर में नई संभावनाएं पैदा की जा रही हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि इन फार्मों के माध्यम से देशभर में उन्नत नस्लों, बेहतर चारा प्रबंधन और आधुनिक डेयरी तकनीकों का प्रसार किया जाए।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें सीधे तौर पर किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होंगी। बेहतर नस्ल के पशु, उच्च गुणवत्ता वाला चारा और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे डेयरी किसानों को अधिक लाभ मिल सकेगा।
सरकार की यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

डेयरी क्षेत्र के भविष्य की मजबूत नींव

अंडेशनगर समेत देश के अन्य केंद्रीय पशु प्रजनन फार्मों में चल रहे ये सुधार कार्यक्रम भारत के डेयरी क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देने वाले साबित हो रहे हैं।
आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रशिक्षण आधारित मॉडल के जरिए भारत न केवल दूध उत्पादन में अपनी अग्रणी स्थिति को बनाए रखेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।

चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया