September 21, 2026 12:41 PM

Krishi Times

Archive story

लाही और आरा मक्खी से सरसों को खतरा, जारी हुई कृषि सलाह

सरसों की फसल में प्रमुख कीटों का प्रकोप, पहचान व वैज्ञानिक प्रबंधन पर कृषि विभाग की सलाह

पटना। रबी मौसम में सरसों की फसल किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन इस समय फसल में कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगता है। विशेष रूप से लाही (एफिड) और आरा मक्खी (सॉफ्लाई) सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीट हैं।बिहार सरकार, कृषि विभाग द्वारा जारी परामर्श में इन कीटों की पहचान, नुकसान के लक्षण और उनके प्रभावी प्रबंधन के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई है, ताकि किसान समय रहते नियंत्रण कर फसल को सुरक्षित रख सकें।

लाही (Aphid) : सबसे घातक कीट

लाही कीट पीले, हरे या काले रंग के मुलायम शरीर वाले होते हैं। ये कीट पंखयुक्त तथा पंखहीन दोनों प्रकार के पाए जाते हैं। लाही के वयस्क और शिशु कीट पत्तियों, टहनियों, तनों, पुष्पक्रमों और फलियों से रस चूसते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। अधिक प्रकोप की स्थिति में पत्तियाँ मुड़ जाती हैं, पौधे कमजोर हो जाते हैं और उपज में भारी कमी आ सकती है।

लाही का प्रबंधन:

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लाही की रोकथाम के लिए खेत में प्रति हेक्टेयर 10 पीले फंदों का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही जैविक नियंत्रण के रूप में नीम आधारित कीटनाशी एजाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम का 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना प्रभावी रहता है।
यदि प्रकोप अधिक हो जाए तो रासायनिक नियंत्रण के लिए ऑक्सीडेमेटाइल मिथाइल 25 ईसी (1 मिली प्रति लीटर पानी) अथवा थायोमेथॉक्साम 25 डब्ल्यूजी (1 ग्राम प्रति लीटर पानी) या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल (1 मिली प्रति 3 लीटर पानी) का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

आरा मक्खी (Sawfly) से भी सतर्क रहने की जरूरत

सरसों की फसल में आरा मक्खी भी एक गंभीर कीट है। इसके वयस्क कीट नारंगी-पीले रंग के होते हैं और सिर काला होता है। आरा मक्खी की मादा का ओविपोजिटर आरी के समान होता है, इसी कारण इसे आरा मक्खी कहा जाता है। इसके पिल्लू (लार्वा) पत्तियों को काटकर खाते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता घट जाती है और फसल कमजोर हो जाती है।

आरा मक्खी का प्रबंधन:

इस कीट के नियंत्रण के लिए भी नीम आधारित कीटनाशी एजाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम का 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सिफारिश की गई है। रासायनिक नियंत्रण के लिए डायमेथोएट 30 ईसी (1 मिली प्रति लीटर पानी) या क्विनालफॉस 25 ईसी (1.5 मिली प्रति लीटर पानी) का छिड़काव प्रभावी माना गया है।

किसानों के लिए विशेष सलाह

कृषि विभाग, बिहार सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें और कीटों के प्रारंभिक लक्षण दिखते ही नियंत्रण उपाय अपनाएं। देर से की गई कार्रवाई से नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। अधिक जानकारी एवं तकनीकी सहायता के लिए किसान किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 18001801551 पर संपर्क कर सकते हैं या अपने जिले के सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

समय पर पहचान और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान सरसों की फसल को कीटों से बचाकर बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।