September 13, 2026 9:53 AM

Krishi Times

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सूखा क्षेत्रों के लिए दिल्ली से निकला ग्लोबल कृषि रोडमैप!

दक्षिण-दक्षिण सहयोग से बदलेगी सूखा प्रभावित कृषि की तस्वीर, दिल्ली घोषणा पत्र जारी!

नई दिल्ली, 12 सितंबर। जलवायु परिवर्तन, जल संकट और खाद्य सुरक्षा जैसी बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच कृषि नवाचारों को तेज़ी से किसानों तक पहुंचाने के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) को मजबूत करने पर जोर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र दक्षिण-दक्षिण सहयोग दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल ड्राईलैंड्स कांग्रेस 2026 में दुनिया के कई देशों के कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, शोध संस्थानों, विकास संगठनों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि जिन देशों की कृषि और जलवायु परिस्थितियां समान हैं, वे एक-दूसरे के सफल कृषि मॉडलों, तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती को मजबूत कर सकते हैं।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए नवाचारों का ग्लोबल मंच

कांग्रेस में आईसीआरआईसैट (ICRISAT) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर साउथ-साउथ कोऑपरेशन इन एग्रीकल्चर (ISSCA) की उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। यह मंच विकासशील देशों के बीच सफल कृषि तकनीकों और समाधानों के आदान-प्रदान तथा विस्तार का कार्य कर रहा है।

ISSCA वर्तमान में 19 साझेदार संस्थानों के साथ काम कर रहा है। संस्था ने 100 से अधिक प्रमाणित और विस्तार योग्य कृषि समाधानों की पहचान की है तथा 40 से अधिक देशों के 300 से ज्यादा कृषि पेशेवरों को प्रशिक्षण और सहयोग प्रदान किया है। इसके कार्यक्षेत्र में जलवायु-सहिष्णु फसलें, मृदा एवं जल प्रबंधन, डिजिटल कृषि, कृषि व्यवसाय, पोषण, आजीविका संवर्धन और पर्यावरणीय स्थिरता शामिल हैं।

सूखा क्षेत्र बन सकते हैं कृषि नवाचार के केंद्र

विशेषज्ञों ने कहा कि दुनिया के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में करोड़ों लोग रहते हैं, जो जलवायु परिवर्तन, जल संकट, भूमि क्षरण और खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याओं से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इसके बावजूद यही क्षेत्र अब जलवायु-अनुकूल कृषि नवाचारों के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

ग्लोबल ड्राईलैंड्स कांग्रेस का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) ने संयुक्त रूप से किया। दोनों संस्थानों का फसल सुधार, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, टिकाऊ कृषि प्रणालियों और सूखा क्षेत्रों में कृषि विकास के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है।

विज्ञान को किसानों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा सहयोग

आईसीआरआईसैट के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि ISSCA की प्रगति यह दर्शाती है कि दक्षिण-दक्षिण सहयोग अब केवल ज्ञान के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावहारिक समाधान अपनाने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश को अलग-अलग समाधान विकसित करने के बजाय पहले से सफल तकनीकों और नवाचारों को साझा कर तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा सकता है। ग्लोबल ड्राईलैंड्स कांग्रेस ने विज्ञान, नीति, निवेश और साझेदारी को एक मंच पर लाकर इस प्रक्रिया को और मजबूत किया है।

वहीं, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव तथा आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि भविष्य की कृषि सीमाओं से परे सहयोग पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि देशों और संस्थानों के बीच ज्ञान, अनुभव और तकनीकों का साझा उपयोग किसानों के लिए बेहतर समाधान विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

‘दिल्ली घोषणा पत्र’ के साथ सम्मेलन का समापन

सम्मेलन का समापन ‘दिल्ली घोषणा पत्र ऑन ड्राईलैंड्स’ के प्रस्तुतीकरण के साथ हुआ। घोषणा पत्र में दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और मजबूत करने, सफल कृषि नवाचारों को तेजी से अपनाने, संस्थागत साझेदारियों को बढ़ावा देने और सूखा प्रभावित क्षेत्रों को टिकाऊ विकास तथा अवसरों के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विकासशील देश कृषि अनुसंधान, जलवायु-अनुकूल तकनीकों और किसान-केंद्रित नवाचारों को साझा करने की दिशा में मिलकर काम करें, तो खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।