September 8, 2026 4:25 PM

Krishi Times

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आलू के गिरते दामों से किसानों को बचाएगी सरकार, 40 हजार तक सहायता!

भाव 700 रुपये प्रति कुंतल से नीचे जाने पर मिलेगा मूल्य अंतर का सहारा, कोल्ड स्टोरेज शुल्क पर भी 20 हजार तक की मदद!

मेरठ। आलू की कीमतों में गिरावट से परेशान किसानों के लिए प्रदेश सरकार ने राहत की पहल की है। बाजार में आलू के भाव निर्धारित स्तर से नीचे जाने पर किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना लागू की गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आलू उत्पादक जिलों के किसानों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा।

मेरठ के जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार के मुताबिक, अक्सर बाजार में आलू की कीमत कम होने के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसी स्थिति में किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने भाव स्थिरता योजना शुरू की है।

दो हेक्टेयर तक की फसल पर मिलेगा लाभ

चित्र; प्रतीकात्मक

योजना के तहत यदि आलू का बाजार भाव 700 रुपये प्रति कुंतल से कम होता है, तो पात्र किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। सहायता के लिए अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि और प्रति हेक्टेयर अधिकतम 200 कुंतल आलू की सीमा निर्धारित की गई है।

यदि बाजार भाव में गिरावट की स्थिति निर्धारित मानकों के अनुसार आती है तो किसान को 100 रुपये प्रति कुंतल की दर से सहायता मिल सकती है। इस हिसाब से अधिकतम सहायता राशि 40 हजार रुपये तक पहुंच सकती है।

वहीं, यदि आलू का बाजार भाव और नीचे चला जाता है, तो सरकार की ओर से निर्धारित 700 रुपये प्रति कुंतल मूल्य के 25 प्रतिशत यानी अधिकतम 175 रुपये प्रति कुंतल, अथवा निर्धारित नियमों के अनुसार जो राशि कम होगी, उसके आधार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी।

कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने पर भी अनुदान

सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए एक अन्य प्रावधान भी किया है। निजी शीतगृहों में आलू का भंडारण करने वाले किसानों को 100 रुपये प्रति कुंतल की दर से भंडारण शुल्क अनुदान दिया जाएगा। इसमें भी अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए सहायता मिलेगी और किसान को 20 हजार रुपये तक का लाभ मिल सकेगा।

इसके अलावा उद्यान विभाग से उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत किस्म का आलू बीज खरीदने वाले किसानों को भी आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज मिलने के साथ उत्पादन और आमदनी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

80 हजार किसान करते हैं आलू की खेती

मेरठ मंडल में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। मंडल के मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और बागपत समेत अन्य क्षेत्रों में करीब 140 शीतगृह संचालित हैं। इनमें लगभग 119 शीतगृहों में किसानों का आलू भंडारित है।

आंकड़ों के अनुसार मंडल में करीब 80 हजार किसान 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती करते हैं। यहां औसतन प्रति हेक्टेयर करीब 240 कुंतल आलू का उत्पादन होता है।

ऐसे करें पंजीकरण

योजना का लाभ लेने के इच्छुक आलू किसान उद्यान विभाग के पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए potato.uphorticulture.in पर आवेदन किया जा सकता है। योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान अपने जिले या मंडल के उद्यान विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।