September 8, 2026 4:26 PM

Krishi Times

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ब्लू इकोनॉमी को नई ताकत दे रहा मत्स्य क्षेत्र!

भारत में मत्स्य क्रांति: 10 वर्षों में दोगुना हुआ पैदावार, RAS और बायोफ्लॉक तकनीक से ब्लू इकोनॉमी को नई गति!

नई दिल्ली। भारत का मत्स्य एवं जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। यह क्षेत्र आज लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका का आधार है और उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन तथा निर्यात से जुड़े विशाल मूल्य शृंखला में रोजगार के लाखों अवसर सृजित कर रहा है। भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक, झींगा (श्रिम्प) का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक तथा कैप्चर फिशरीज में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मत्स्य क्षेत्र की यह प्रगति न केवल खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, निर्यात आय और भारत की ब्लू इकोनॉमी को भी नई दिशा दे रही है।

₹39,272 करोड़ के निवेश से बदली तस्वीर

वर्ष 2015 से अब तक केंद्र सरकार ने मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों के तहत ₹39,272 करोड़ से अधिक के निवेश को मंजूरी दी है। इन निवेशों के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास, नई तकनीकों को अपनाने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।

10 वर्षों में दोगुना हुआ मछली पैदावार

सरकारी प्रयासों का प्रभाव उत्पादन आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई देता है। देश का वार्षिक मत्स्य उत्पादन 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन तक पहुंच गया है। यानी एक दशक में उत्पादन दोगुने से अधिक हो गया है।

इस वृद्धि में अंतर्देशीय मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन क्षेत्रों का उत्पादन 61.36 लाख टन से बढ़कर 151.60 लाख टन हो गया, जो लगभग 147 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

सी-फूड निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड

भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में ₹30,213 करोड़ का निर्यात बढ़कर 2025-26 में ₹73,890 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक व्यापार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और शुल्क संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारतीय समुद्री उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि देश की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है।

RAS और बायोफ्लॉक तकनीक बनी गेम चेंजर

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और बायोफ्लॉक तकनीक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया गया है। इन आधुनिक तकनीकों ने मछली पालन को अधिक वैज्ञानिक, संसाधन-कुशल और व्यावसायिक रूप से लाभकारी बनाया है।

RAS प्रणाली में पानी को शुद्ध कर दोबारा उपयोग किया जाता है, जबकि बायोफ्लॉक तकनीक लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सहायता से पानी की गुणवत्ता बनाए रखती है और मछलियों की वृद्धि को बढ़ावा देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, RAS तकनीक 90 से 95 प्रतिशत तक पानी की बचत करने में सक्षम है, जिससे सीमित जल संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी सफल मत्स्य पालन संभव हो रहा है।

PMMSY के तहत हजारों इकाइयों को मंजूरी

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत अब तक:

  • 9,467 RAS इकाइयों, 4,573 बायोफ्लॉक इकाइयों

को मंजूरी दी जा चुकी है।

इन परियोजनाओं के लिए ₹4,120 करोड़ का निवेश किया गया है। इससे पूरे वर्ष मछली उत्पादन संभव हुआ है और मत्स्य पालन पारंपरिक क्षेत्रों से निकलकर नए भौगोलिक क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।

निर्यात गुणवत्ता बढ़ाने में मददगार तकनीक

RAS और बायोफ्लॉक आधारित नियंत्रित उत्पादन प्रणालियां गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और जैव-सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) सुनिश्चित करने में मदद करती हैं। यही कारण है कि इन तकनीकों को उच्च मूल्य वाले निर्यात बाजारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इन प्रणालियों के माध्यम से उत्पादित मछलियां और झींगा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को बेहतर तरीके से पूरा कर रहे हैं, जिससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हो रही है।

पहाड़ी राज्यों से लेकर झींगा उत्पादन तक बढ़ा विस्तार

RAS और बायोफ्लॉक तकनीकों का उपयोग अब देश के विभिन्न विशेषीकृत मत्स्य क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।

  • जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ट्राउट जैसी उच्च मूल्य वाली मछलियों के उत्पादन में।
  • खारे और लवणीय जल क्षेत्रों में निर्यातोन्मुख झींगा उत्पादन के लिए।
  • सजावटी मछली (ऑर्नामेंटल फिश) पालन में।
  • शहरी क्षेत्रों के निकट नियंत्रित मत्स्य उत्पादन इकाइयों की स्थापना में।

इससे उद्यमियों और युवाओं के लिए नए व्यवसायिक अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

AI, ड्रोन और डिजिटल तकनीक से जुड़ेगा भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में RAS और बायोफ्लॉक तकनीकों का एकीकरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म, ड्रोन सेवाओं और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों के साथ किया जाएगा। इससे उत्पादन लागत कम होगी और संचालन दक्षता में सुधार होगा।

साथ ही झींगा, ट्राउट, सीबास, तिलापिया, मुरेल और पंगासियस जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी और मजबूत कर सकता है।

ब्लू इकोनॉमी के लिए मजबूत आधार

मत्स्य क्षेत्र में बढ़ते निवेश, आधुनिक तकनीकों के विस्तार और निर्यात क्षमता में वृद्धि से भारत की ब्लू इकोनॉमी को नई मजबूती मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित मत्स्य उत्पादन प्रणाली न केवल ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा और निर्यात वृद्धि के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य को भी गति प्रदान करेगी।