September 5, 2026 9:38 AM

Krishi Times

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यूरोप का बाजार अब भारतीय किसानों के करीब!

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: किसानों, कृषि निर्यात और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए खुलेंगे नए अवसर!

मुंबई। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारतीय कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य क्षेत्र और ग्रामीण उद्यमों के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई में भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि यह समझौता किसानों, मछुआरों, एमएसएमई, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और सेवा प्रदाताओं को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि लगभग 25 वर्षों की लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह समझौता अंतिम चरण में पहुंचा है। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों को जोड़ने वाला आर्थिक मंच बनेगा, जिसमें वैश्विक जीडीपी का एक-चौथाई और विश्व व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा शामिल होगा।

कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगा बड़ा बाजार

पीयूष गोयल ने विशेष रूप से कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि भारत और बेल्जियम आलू प्रसंस्करण, शीत भंडारण (कोल्ड स्टोरेज), कोल्ड चेन नेटवर्क तथा आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों में साझेदारी बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि मूल्य श्रृंखलाओं (Sustainable Agricultural Value Chains) और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी के माध्यम से दोनों देश न केवल अपने उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

भारतीय कृषि निर्यात को मिल सकती है नई गति

मंत्री ने कहा कि एफटीए लागू होने के बाद यूरोपीय बाजारों में भारतीय कृषि एवं खाद्य उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी। शुल्कों में कमी या समाप्ति से कृषि प्रसंस्कृत उत्पाद, समुद्री उत्पाद, मसाले, फल-सब्जियां और अन्य मूल्य संवर्धित कृषि उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है।

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने भी कहा कि समझौते के बाद खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री सेवाओं और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निवेश एवं व्यापार बढ़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि 95 प्रतिशत से अधिक भारतीय और यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम किए जा सकते हैं।

एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह बनेगा कृषि निर्यात का प्रमुख प्रवेश द्वार

गोयल ने कहा कि बेल्जियम का एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह भारत और यूरोप के बीच व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह होने के कारण यह भारतीय कृषि एवं खाद्य निर्यातकों को यूरोपीय उपभोक्ता बाजारों तक तेज और कुशल पहुंच उपलब्ध करा सकता है।

उन्होंने बताया कि बंदरगाह का मजबूत रेल, सड़क और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क भारतीय निर्यातकों के लिए लॉजिस्टिक लागत कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

किसानों और ग्रामीण उद्यमों को होगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता संतुलित तरीके से लागू होता है तो भारतीय किसानों को उच्च मूल्य वाले यूरोपीय बाजारों तक पहुंच मिल सकती है। इससे कृषि प्रसंस्करण उद्योग, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), कृषि निर्यातक कंपनियां और ग्रामीण उद्यमों को नए व्यावसायिक अवसर प्राप्त होंगे।

कोल्ड चेन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि लॉजिस्टिक्स में विदेशी निवेश बढ़ने से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में भी मदद मिल सकती है।

भारत-ईयू व्यापार पहुंचा 140 अरब डॉलर

पीयूष गोयल ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार दोगुना होकर लगभग 140 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत और यूरोप भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, युवा जनसंख्या, तकनीकी क्षमता और नवाचार आधारित विकास मॉडल यूरोपीय निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।

कृषि क्षेत्र के लिए प्रमुख संभावित लाभ

  • भारतीय कृषि एवं खाद्य उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच।
  • आलू प्रसंस्करण और खाद्य उद्योग में तकनीकी सहयोग।
  • कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन अवसंरचना में निवेश की संभावना।
  • मत्स्य एवं समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा।
  • कृषि मूल्य संवर्धन और ग्रामीण रोजगार में वृद्धि।
  • एफपीओ, एग्री-स्टार्टअप और कृषि एमएसएमई के लिए नए अवसर।
  • टिकाऊ कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत-यूरोप सहयोग मजबूत होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत-ईयू एफटीए का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह भारतीय कृषि निर्यात, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण समझौता साबित हो सकता है।