डिजिटल कृषि मिशन: 10.41 करोड़ Farmer ID, दलहन उत्पादन 274 लाख टन के पार!

डिजिटल कृषि मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई गति, 10.41 करोड़ फार्मर आईडी बनीं

नई दिल्ली/पूसा। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि सेवाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने तथा देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी) में ‘राष्ट्रीय सम्मेलन – डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत एग्रीस्टैक और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति निर्माताओं ने मिशन की प्रगति की समीक्षा की और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे डिजिटल कृषि मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका असर किसानों के खेतों और उनकी आय में दिखाई देना है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि योजनाओं की सफलता केवल रिपोर्टों तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव के रूप में नजर आए।

फार्मर आईडी से पारदर्शी और तेज होगी सेवा वितरण प्रणाली

सम्मेलन में चौहान ने फार्मर आईडी को डिजिटल कृषि मिशन की आधारशिला बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता और भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रहे हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान प्रक्रिया तेज हुई है। उन्होंने राज्यों से शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि तकनीकी दृष्टि से एक महीने के भीतर फार्मर आईडी का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, बशर्ते राज्यों में गंभीरता और ईमानदारी से कार्य किया जाए। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि समयबद्ध भुगतान और डिजिटल सत्यापन से किसानों को उल्लेखनीय लाभ मिला है।

एग्रीस्टैक बना कृषि क्षेत्र की डिजिटल रीढ़

डिजिटल कृषि मिशन के तहत विकसित एग्रीस्टैक को कृषि सेवाओं की डिलीवरी का नया आधार माना जा रहा है। सम्मेलन में साझा आंकड़ों के अनुसार अब तक देश में 10.41 करोड़ फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। यह पीएम-किसान लाभार्थियों का लगभग 84.68 प्रतिशत और कुल कृषि जोतों का करीब 77 प्रतिशत कवरेज है। इस अभियान में 26 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।

गांवों के नक्शों की जियो-रेफरेंसिंग में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तक 5.9 लाख गांवों को कवर किया जा चुका है, जो चिन्हित गांवों का 93.05 प्रतिशत है। इससे भूमि आधारित सेवाओं और सटीक फसल सर्वेक्षण को मजबूती मिलेगी।

डिजिटल क्रॉप सर्वे में रिकॉर्ड विस्तार

डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में जहां यह 290 जिलों तक सीमित था, वहीं रबी 2025-26 में इसका विस्तार 650 जिलों तक हो गया। खरीफ 2026-27 में इसे 692 जिलों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

फसल क्षेत्र कवरेज भी 3.87 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 9.18 करोड़ हेक्टेयर हो गया है, जबकि खरीफ 2026-27 के लिए 13.4 करोड़ हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फसल आकलन, बीमा भुगतान और कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक सटीकता आएगी।

भूमि सर्वे और डेटा सत्यापन पर विशेष जोर

चौहान ने कहा कि डिजिटल कृषि मिशन की सफलता के लिए भूमि रिकॉर्ड, नक्शों और फसल डेटा का सटीक होना आवश्यक है। कई क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से डेटा संग्रह में चुनौतियां सामने आ रही हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक समाधान से दूर करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक जमीन की स्थिति में पूर्ण सामंजस्य सुनिश्चित किया जाए।

दलहन उत्पादन में बढ़ोतरी, आयात पर निर्भरता घटी

सम्मेलन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। वर्ष 2024-25 में 256.83 लाख मीट्रिक टन रहे दलहन उत्पादन में बढ़ोतरी होकर वर्ष 2025-26 में 274.09 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई है।

इसके साथ ही दलहन आयात में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में जहां आयात 72.56 लाख मीट्रिक टन था, वहीं 2025-26 में यह घटकर 59.64 लाख मीट्रिक टन रह गया। इसे देश की खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

बढ़ा क्षेत्रफल और उत्पादकता

दलहन फसलों के प्रति किसानों की बढ़ती रुचि का असर खेती के रकबे पर भी दिखाई दिया है। दलहन क्षेत्रफल 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं उत्पादकता 926 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बीज, उन्नत तकनीक और सरकारी हस्तक्षेपों के कारण उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकता तीनों में एक साथ वृद्धि दर्ज की गई है।

बीज से बाजार तक मजबूत होगी वैल्यू चेन

चौहान ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। किसानों को बेहतर लाभ दिलाने के लिए प्रोसेसिंग, भंडारण और मार्केटिंग को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि सरकारी और निजी भागीदारी के माध्यम से प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज और मार्केट लिंकिंग को प्राथमिकता दी जाए।

दलहन मिशन के तहत वर्ष 2026-27 में 528 प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की संभावना बढ़ेगी।

तकनीक आधारित कृषि बनेगी विकसित भारत की आधारशिला

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल डेटा का उपयोग एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। उन्होंने दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाने तथा विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में तकनीक की भूमिका पर बल दिया।

सम्मेलन में हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, असम के मंत्री पीयूष हजारिका, अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गैब्रियल डेनवांग वांगसु, नागालैंड के कृषि मंत्री म्हाथुंग यंथन सहित विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कृषि सचिव अतीश चंद्रा ने स्वागत भाषण देते हुए मिशन की प्रगति, तीन स्तरीय समीक्षा व्यवस्था और प्रगति पोर्टल की जानकारी साझा की।

किसानों तक पहुंचाना है मिशन का वास्तविक लाभ

सम्मेलन के समापन पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से डिजिटल कृषि मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यशैली अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इन मिशनों की सफलता से किसानों की आय बढ़ेगी, कृषि सेवाएं अधिक पारदर्शी होंगी और भारत खाद्य आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत बनेगा।