लखपति दीदी मिशन को नई रफ्तार: 4 राज्यों में खुलेंगे नए ग्रामीण बिजनेस इनक्यूबेटर, 600 से अधिक महिला उद्यमों को मिलेगा सहयोग
महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के विस्तार पर केंद्रित बैठक, IIT और IIM जैसे संस्थानों की साझेदारी से मिलेगा मार्गदर्शन
नई दिल्ली। ग्रामीण भारत में महिला उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। सचिव (ग्रामीण विकास) रोहित कंसल की अध्यक्षता में आयोजित अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के गैर-कृषि आजीविका (NFL) घटक के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया गया। इन प्रस्तावों का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) आधारित छोटे उद्यमों को उच्च विकास क्षमता वाले व्यवसायों में बदलना और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
बैठक में संयुक्त सचिव (ग्रामीण आजीविका) अमित शुक्ला और स्वाति शर्मा सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा का प्रमुख केंद्र सरकार के 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य को गति देना और ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता आधारित आय के नए अवसर तैयार करना रहा।
बिहार, यूपी, जम्मू-कश्मीर और गुजरात में शुरू होंगे नए इनक्यूबेटर
समिति ने बिहार, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और गुजरात से प्राप्त चार नए इनक्यूबेटर प्रस्तावों पर विचार किया। इन परियोजनाओं में क्रमशः आईआईटी पटना, आईआईएम जम्मू, आईआईएम लखनऊ और आईआईटी गांधीनगर को साझेदार संस्थान के रूप में शामिल किया गया है।
इन कार्यक्रमों के तहत 600 से अधिक संभावनाशील ग्रामीण उद्यमों को व्यवसायिक रणनीति, वित्तीय योजना, बाजार से जुड़ाव, तकनीकी उन्नयन, औपचारिक पंजीकरण और ऋण सुविधा जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग प्रदान किया जाएगा। इससे ग्रामीण महिला उद्यमियों को स्थानीय स्तर के कारोबार से आगे बढ़कर संगठित और प्रतिस्पर्धी व्यवसाय विकसित करने में मदद मिलेगी।
13 राज्यों में पहले से चल रहे हैं 14 इनक्यूबेशन कार्यक्रम
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, यह पहल असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में सफलतापूर्वक संचालित चार पूर्व इनक्यूबेटर कार्यक्रमों के अनुभवों पर आधारित है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से 600 से अधिक स्वयं सहायता समूह उद्यमों को लाभ मिला था।
वर्तमान में देश के 13 राज्यों में 14 इनक्यूबेशन कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जिनमें आईआईएम, आईआईटी और अन्य प्रमुख शैक्षणिक एवं व्यवसायिक संस्थानों की भागीदारी है। इन कार्यक्रमों से लगभग 2,100 ग्रामीण उद्यमों को सहयोग मिल रहा है। मंत्रालय के अनुसार, इन पहलों से उद्यमों की आय में वृद्धि, व्यवसायों का औपचारिककरण और नए रोजगार सृजन जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
कृषि प्रसंस्करण से लेकर डिजिटल कारोबार तक मिलेगा बढ़ावा
नए इनक्यूबेटर कार्यक्रमों का फोकस खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण, वस्त्र एवं हस्तशिल्प, विनिर्माण, खुदरा व्यापार, सेवा क्षेत्र, ग्रामीण पर्यटन, डिजिटल उद्यमिता और स्थानीय संसाधनों पर आधारित व्यवसायों पर रहेगा।
इसके साथ ही, उच्च विकास क्षमता वाले उद्यमों के चयन के लिए एक पारदर्शी ‘चैलेंज फंड’ मॉडल अपनाया गया है। राज्यों में समर्पित स्टेट इनक्यूबेशन सेल भी स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे उद्यम सहायता प्रणाली को संस्थागत स्वरूप मिल सके।
पश्चिम बंगाल और गोवा में SVEP विस्तार पर भी विचार
बैठक में स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) के तहत पश्चिम बंगाल और गोवा में विस्तार प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण गैर-कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देना और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को टिकाऊ व्यवसाय स्थापित करने में सहायता देना है।
महिला उद्यमिता बनेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत
ग्रामीण विकास मंत्रालय का मानना है कि महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को प्रोत्साहन देने से न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इन पहलों से महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता, बाजार तक बेहतर पहुंच और बड़े पैमाने पर व्यवसाय विस्तार का अवसर मिलेगा।
समिति ने नवाचार, डिजिटल तकनीक, संस्थागत साझेदारी, बाजार संपर्क और परिणाम आधारित निगरानी पर विशेष जोर देते हुए महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

