रायपुर से बनेगा तिलापिया निर्यात का नया हब, छत्तीसगढ़ में क्लस्टर मॉडल को मिलेगा बड़ा विस्तार!
1,300 से अधिक मछली पालकों के साथ संवाद; 34 मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्लस्टरों के जरिए निर्यात बढ़ाने पर जोर!
रायपुर, –केंद्र सरकार देश के मत्स्य क्षेत्र को ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए क्लस्टर-आधारित विकास मॉडल पर तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत अधिसूचित तिलापिया क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा की और मछली पालकों, उद्यमियों, निर्यातकों तथा अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत संवाद किया।
हाइब्रिड मोड में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में 1,300 से अधिक तिलापिया मछली पालकों और मूल्य श्रृंखला से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में आईसीएआर, एनएफडीबी, एमपीईडीए, नाबार्ड, मत्स्य सहकारी समितियों और समुद्री खाद्य निर्यातकों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
रिकॉर्ड उत्पादन और निर्यात के बीच तिलापिया पर बढ़ा फोकस
डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने 198 लाख टन के रिकॉर्ड मत्स्य उत्पादन और 73,890 करोड़ रुपये से अधिक के समुद्री खाद्य निर्यात का आंकड़ा हासिल किया है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित चारा और आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों के विकास के लिए पीएमएमएसवाई के तहत लगभग 900 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य का मत्स्य उत्पादन लगभग दोगुना होकर 10 लाख टन तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अधिसूचित मत्स्य क्लस्टरों को उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, कोल्ड चेन और बाजार संपर्क जैसी सुविधाओं के माध्यम से समग्र सहायता दी जा रही है, ताकि निर्यात क्षमता बढ़ाई जा सके और मछली पालकों की आय में वृद्धि हो।
छत्तीसगढ़ बना अंतर्देशीय तिलापिया निर्यात का अग्रणी राज्य
बैठक में यह जानकारी दी गई कि छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा अंतर्देशीय राज्य बन गया है जिसने मूल्यवर्धित तिलापिया उत्पादों का निर्यात शुरू किया है। अब तक राज्य से 382 टन तिलापिया मछली अमेरिका को निर्यात की जा चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तिलापिया की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है और इसके फ्रोजन फिलेट्स तथा वैल्यू एडेड उत्पादों की अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका और एशियाई बाजारों में अच्छी मांग है। ऐसे में छत्तीसगढ़ का यह मॉडल भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में विविधीकरण का नया मार्ग खोल सकता है।
34 क्लस्टरों के जरिए बढ़ेगी प्रतिस्पर्धात्मकता
मत्स्य विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. सुरभि राय ने बताया कि देशभर में 34 मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्लस्टरों को निर्यात-केंद्रित विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत आईओटी आधारित निगरानी, बायोफ्लॉक तकनीक, रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बेहतर अवसंरचना और वित्तीय पहुंच को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मत्स्य क्षेत्र में उपलब्ध ऋण योजनाओं का उपयोग बढ़ाने तथा किसानों को आसान वित्त उपलब्ध कराने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
आईसीएआर ने गुणवत्तापूर्ण बीज और जैव सुरक्षा पर दिया जोर
आईसीएआर के उप महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) डॉ. जे.के. जेना ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में तिलापिया उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज आपूर्ति का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने रोगमुक्त उत्पादन, जैव सुरक्षा उपायों और उन्नत मत्स्य बीजों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि मछली सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले पशु प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है तथा तिलापिया पालन खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
एमएम हैचरी मॉडल बना आकर्षण का केंद्र
बैठक के बाद डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रायपुर के माना स्थित एमएम हैचरी का दौरा किया। यह हैचरी आनुवंशिक रूप से उन्नत काली स्ट्रेन तिलापिया के विकास और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन में सक्रिय है।
हैचरी को पीएमएमएसवाई के उद्यमिता मॉडल के तहत 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता तथा पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत 35 लाख रुपये का प्रदर्शन अनुदान मिला है। वर्तमान में यह हैचरी देशभर में गुणवत्तापूर्ण तिलापिया बीज की आपूर्ति कर रही है और छत्तीसगढ़ में लगभग 25,000 टन तिलापिया उत्पादन को समर्थन दे रही है।
किसानों ने उठाए लागत और वित्त से जुड़े मुद्दे
संवाद के दौरान मछली पालकों ने गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता, बढ़ती बिजली दरों, जल किराया शुल्क और उत्पादन लागत में वृद्धि जैसी चुनौतियों को सामने रखा। किसानों ने लक्षित सब्सिडी, आसान ऋण, कार्यशील पूंजी, निर्यात प्रमाणन प्रशिक्षण और बाजार संपर्क मजबूत करने की मांग की।
हितधारकों ने छोटे एवं जनजातीय मछली पालकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय अनुभव यात्राएं, तकनीकी प्रशिक्षण और साझा सुविधा केंद्र (CFC) स्थापित करने की भी सिफारिश की।
तिलापिया निर्यात में भारत के लिए बड़ा अवसर
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 22,601 मीट्रिक टन तिलापिया का निर्यात किया, जिसका मूल्य 189.73 करोड़ रुपये रहा। हालांकि यह देश की सबसे अधिक निर्यात होने वाली मीठे पानी की मछली प्रजातियों में शामिल है, लेकिन वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्लस्टर आधारित उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात अवसंरचना को मजबूत किया जाए तो भारत तिलापिया निर्यात में वैश्विक स्तर पर बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर सकता है।
महत्वपूर्ण बिंदु
- रायपुर में तिलापिया क्लस्टर की समीक्षा बैठक आयोजित।
- 1,300 से अधिक मछली पालकों और हितधारकों ने भाग लिया।
- देशभर में 34 मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
- छत्तीसगढ़ मूल्यवर्धित तिलापिया निर्यात शुरू करने वाला पहला अंतर्देशीय राज्य बना।
- राज्य से 382 टन तिलापिया का अमेरिका को निर्यात।
- पीएमएमएसवाई के तहत छत्तीसगढ़ में लगभग 900 करोड़ रुपये का निवेश।
- एमएम हैचरी को 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता और 35 लाख रुपये का अनुदान।
- तिलापिया को भारत के समुद्री खाद्य निर्यात विविधीकरण का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है।






























