केन्या में ICRISAT को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान संस्थान’ का सम्मान, जलवायु-स्मार्ट कृषि मॉडल को मिली ग्लोबल पहचान!
नैरोबी/माकुएनी (केन्या)। अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) को वर्ष 2026 के माकुएनी काउंटी कृषि एवं व्यापार मेले में ‘बेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूशन’ का प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह सम्मान अफ्रीका के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा जलवायु-लचीली खेती को बढ़ावा देने में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि करता है।
15 से 18 जुलाई तक केन्या के मकिंदु शो ग्राउंड में आयोजित चार दिवसीय मेले में ICRISAT ने 2,000 से अधिक प्रदर्शकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। इस आयोजन में शोध संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, निजी कृषि कंपनियों, किसान संगठनों और विकास साझेदारों के साथ-साथ 20,000 से अधिक किसानों, विद्यार्थियों, नीति निर्माताओं और कृषि नवाचारों से जुड़े हितधारकों ने भाग लिया।
जलवायु-सहिष्णु फसलों ने आकर्षित किया किसानों का ध्यान
ICRISAT के प्रदर्शनी मंडप में किसानों और आगंतुकों की भारी भीड़ देखने को मिली। संस्थान ने मूंगफली, अरहर, तिल, ज्वार, बाजरा, रागी (फिंगर मिलेट) सहित फॉक्सटेल मिलेट, प्रोसो मिलेट, बार्नयार्ड मिलेट और टेफ जैसी जलवायु-सहिष्णु फसलों की उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया।
वैज्ञानिकों ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, बेहतर कृषि पद्धतियों (GAPs) और जलवायु-स्मार्ट तकनीकों के बारे में जानकारी दी, जिससे बदलते मौसम और सूखे की परिस्थितियों में भी उत्पादन बढ़ाया जा सके।
किसानों की जरूरतों से जुड़ा शोध बना सफलता की कुंजी
ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि यह सम्मान किसानों, वैज्ञानिकों और सहयोगी संस्थाओं को समर्पित है।
उन्होंने कहा कि अफ्रीका के शुष्क क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन खाद्य उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। ऐसे समय में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, व्यावहारिक, किफायती और बड़े पैमाने पर अपनाई जा सकने वाली तकनीकों का विकास अत्यंत आवश्यक है। संस्थान का लक्ष्य ऐसी नवाचारों को बढ़ावा देना है जो खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की आय में सुधार ला सकें।
माकुएनी सरकार के साथ मजबूत साझेदारी
ICRISAT पिछले कई वर्षों से माकुएनी काउंटी सरकार, कृषि विस्तार अधिकारियों, किसान समूहों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर सूखा-सहिष्णु एवं पोषणयुक्त फसलों को बढ़ावा देने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने और खाद्य प्रणालियों में विविधता लाने पर कार्य कर रहा है।
माकुएनी के गवर्नर मुतुला किलोन्जो ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि ICRISAT ने बेहतर किस्मों, किसान प्रशिक्षण और जलवायु-स्मार्ट तकनीकों के माध्यम से किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी अधिक उत्पादन करने में सक्षम बनाया है। इससे खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है और किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा हुए हैं।
सूखे से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए उम्मीद की किरण
अफ्रीका के कई हिस्सों में बार-बार पड़ने वाले सूखे और घटती कृषि उत्पादकता के बीच ICRISAT की उन्नत ज्वार, बाजरा, रागी, मूंगफली और अरहर की किस्में किसानों को स्थिर उत्पादन देने में मदद कर रही हैं। साथ ही ये फसलें घरेलू पोषण सुधारने और नए बाजार अवसर उपलब्ध कराने में भी योगदान दे रही हैं।
ICRISAT के प्रजनक वैज्ञानिक डॉ. हेनरी ओजुलोंग ने कहा कि कृषि अनुसंधान की वास्तविक सफलता शोध पत्रों से नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में आए बदलाव से मापी जानी चाहिए। जब किसान अधिक उत्पादन करें, बेहतर आय अर्जित करें और अपने परिवारों को बेहतर पोषण उपलब्ध करा सकें, तभी शोध का वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है।
युवाओं और विद्यार्थियों में बढ़ी कृषि विज्ञान के प्रति रुचि
प्रदर्शनी के दौरान आगंतुकों ने उन्नत फसल किस्मों, मृदा स्वास्थ्य, एकीकृत फसल प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, विपणन और जलवायु अनुकूलन जैसे विषयों पर वैज्ञानिकों से संवाद किया। विद्यार्थियों और युवाओं को कृषि अनुसंधान में करियर के अवसरों और खाद्य असुरक्षा से निपटने में विज्ञान की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।
भारत के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि अफ्रीका के शुष्क क्षेत्रों में विकसित हो रही जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकें भारत के सूखा-प्रभावित राज्यों जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक के किसानों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती हैं। ज्वार, बाजरा, अरहर और तिल जैसी फसलों की उन्नत किस्में बदलते जलवायु परिदृश्य में कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में मदद कर सकती हैं।
माकुएनी कृषि एवं व्यापार मेले में मिला यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि जब विज्ञान, नवाचार और साझेदारी किसानों तक पहुंचते हैं तो वे कृषि और ग्रामीण जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकते हैं। ICRISAT का यह मॉडल भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए विश्वभर के कृषि तंत्रों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहा है।
Source: ICRISAT


























