September 21, 2026 1:30 PM

Krishi Times

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दुबई के बाद अब सिंगापुर तक पहुंचा कश्मीर का स्वाद!

सिंगापुर पहुंची कश्मीर की प्रीमियम चेरी और प्लम की पहली खेप, बागवानी निर्यात को मिला नया ग्लोबल बाजार!

नई दिल्ली/श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और बड़ी सफलता मिली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) की पहल पर शोपियां और पुलवामा से प्रीमियम अरेको चेरी (यूरोपीय मीठी चेरी) तथा सेंटरोज़ प्लम की पहली खेप सिंगापुर के लिए रवाना की गई है। इस उपलब्धि से कश्मीर के उच्च गुणवत्ता वाले शीतोष्ण फलों को वैश्विक बाजारों में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

यूएई के बाद सिंगापुर तक पहुंचा कश्मीर का स्वाद

इससे पहले जम्मू-कश्मीर से ताजी चेरी और प्लम का सफल निर्यात संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी और दुबई तक किया जा चुका है। अब सिंगापुर जैसे प्रीमियम बाजार में प्रवेश से क्षेत्र के फल उत्पादकों के लिए नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे और कश्मीरी फलों की अंतरराष्ट्रीय मांग को मजबूती मिलेगी।

एपीईडीए ने किया पहली खेप का फ्लैग-ऑफ

एपीईडीए ने 16 जुलाई 2026 को पुलवामा स्थित मेसर्स ओसुम फूड सॉल्यूशंस एलएलपी और मेसर्स फ्रूट मास्टर एग्रो फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से सिंगापुर जाने वाली पहली निर्यात खेप का फ्लैग-ऑफ समारोह आयोजित किया। इस पहल का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के किसानों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ना और उच्च मूल्य वाले बाजारों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है।

वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई निर्यात खेप

जम्मू-कश्मीर की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियां यहां उत्पादित चेरी, प्लम और अन्य शीतोष्ण फलों को विशिष्ट स्वाद, बेहतर बनावट और लंबी शेल्फ लाइफ प्रदान करती हैं। निर्यात के लिए चयनित फलों की कटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और परिवहन वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पौध स्वच्छता मानकों का पालन करते हुए अत्याधुनिक कोल्ड चेन प्रणाली के माध्यम से फलों को सिंगापुर भेजा गया, जिससे उनकी गुणवत्ता और ताजगी बरकरार रहे।

किसानों को मिलेगा 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त प्रतिफल

विशेषज्ञों के अनुसार इस निर्यात पहल से उत्पादकों को पारंपरिक मंडी व्यवस्था की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। इससे किसानों को निर्यात-उन्मुख उत्पादन, आधुनिक बागवानी तकनीकों और बेहतर फसलोत्तर प्रबंधन अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

फसल नुकसान घटेगा, बढ़ेगी आय

निर्यात आधारित आपूर्ति श्रृंखला के विस्तार से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और फल उत्पादक समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विकास को भी गति मिलने की संभावना है।

भारत के बागवानी निर्यात को मिलेगी मजबूती

यह पहल बाजार विविधीकरण, निर्यात सुगमता और बेहतर लॉजिस्टिक्स के माध्यम से भारत के बागवानी निर्यात को मजबूत बनाने की दिशा में एपीईडीए के प्रयासों का हिस्सा है। प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच से जम्मू-कश्मीर को उच्च गुणवत्ता वाले ताजे शीतोष्ण फलों के विश्वसनीय वैश्विक स्रोत के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी, वहीं किसानों की आय बढ़ाने और कृषि निर्यात को गति देने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी बल मिलेगा।