शिलांग में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में महिलाओं की अगुवाई वाले जैविक डेयरी मॉडल की सराहना, सुंदरबन सहकारी समिति बनी वैश्विक उदाहरण
महिला किसानों को सशक्त बनाने और टिकाऊ जैविक कृषि को बढ़ावा देने में महिलाओं की भूमिका पर विशेष जोर
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शिलांग। मेघालय सरकार, मेग्नोलिया (MEGNOLIA) तथा आईएफओएएम ऑर्गेनिक्स एशिया (IFOAM Organics Asia) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला किसान एवं सतत जैविक कृषि सम्मेलन में सुंदरबन की महिला डेयरी किसानों की सफलता की कहानी वैश्विक मंच पर प्रस्तुत की गई। सम्मेलन के तकनीकी सत्र “महिला किसान, न्यायसंगत मूल्य श्रृंखलाएं और जैविक बाजारों तक पहुंच” के दौरान राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख डॉ. सब्यसाची रॉय ने इस मॉडल को साझा किया।
🌱 A women-led dairy revolution from the Sundarbans is earning global recognition.
At the International Conference on Women Farmers & Sustainable Organic Agriculture in Shillong, NDDB showcased the remarkable journey of the Sundarban Organic Women Dairy Cooperative—South Asia’s first organic women dairy cooperative.
From organic dairying and renewable energy to biodiversity conservation and zero-plastic milk marketing, this model demonstrates how women farmers are building climate-resilient and sustainable food systems while improving rural livelihoods.
The cooperative’s achievements have also been recognized globally with the International Dairy Federation (IDF) Dairy Innovation Award 2024 for Innovation in Sustainable Farming Practices.
A powerful example of women-led development, sustainable agriculture, and inclusive growth.
2015 में महिला डेयरी सहकारी के रूप में हुआ पुनर्गठन
डॉ. रॉय ने बताया कि एनडीडीबी के तकनीकी और संस्थागत सहयोग से वर्ष 2015 में सुंदरबन सहकारी दुग्ध एवं पशुधन उत्पादक संघ का पुनर्गठन पूर्णतः महिला संचालित डेयरी सहकारी संस्था के रूप में किया गया था। इस पहल ने क्षेत्र की लघु एवं सीमांत महिला किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
आज यह संस्था दक्षिण एशिया की पहली जैविक महिला डेयरी सहकारी समिति के रूप में पहचान बना चुकी है और ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व में सतत कृषि विकास का सफल उदाहरण बन गई है।
जैविक कृषि और डेयरी के समन्वय से बना सर्कुलर वैल्यू चेन मॉडल
प्रस्तुति में बताया गया कि सहकारी समिति ने डेयरी व्यवसाय को जैविक खेती, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के साथ जोड़कर एक सर्कुलर वैल्यू चेन विकसित की है। इससे उत्पादकों को सीधे प्रीमियम जैविक बाजारों तक पहुंच मिली है और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्लास्टिक मुक्त दूध विपणन से लेकर जैविक उत्पादों तक कई नवाचार
सम्मेलन में सहकारी समिति की कई अभिनव पहलों को भी रेखांकित किया गया। इनमें—
- शून्य-प्लास्टिक (Zero Plastic) दूध विपणन व्यवस्था
- महिलाओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष भुगतान
- महिला ‘जाइबो मॉनिटर’ प्रणाली
- जैविक पशु आहार एवं चारा उत्पादन
- बायोगैस इकाइयों की स्थापना
- स्लरी आधारित जैव उर्वरकों का उपयोग
- जैविक धान, दलहन, सरसों तेल और वन्य शहद उत्पादन में विविधीकरण
जैसी पहलें शामिल हैं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका दोनों को मजबूती प्रदान की है।
अंतरराष्ट्रीय डेयरी नवाचार पुरस्कार से मिला वैश्विक सम्मान
डॉ. रॉय ने बताया कि सहकारी समिति को वर्ष 2024 में इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (IDF) डेयरी इनोवेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उसे “सतत कृषि पद्धतियों में नवाचार – सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव” श्रेणी में प्रदान किया गया।
इस उपलब्धि ने सुंदरबन मॉडल को महिलाओं के नेतृत्व वाले, जलवायु-अनुकूल और समावेशी सहकारी विकास के एक वैश्विक उदाहरण के रूप में स्थापित किया है।
महिलाओं की भागीदारी से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
कृषि और डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ा रही है, बल्कि खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को भी मजबूत कर रही है। सुंदरबन का यह मॉडल दर्शाता है कि यदि महिलाओं को संस्थागत सहयोग, बाजार तक पहुंच और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती हैं।

