वैल्यू एडेड मसालों के दम पर ग्लोबल बाजार में मजबूत हो रही भारत की पकड़!
नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े मसाला उत्पादक देशों में शामिल भारत अब केवल कच्चे मसालों के उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) और वैल्यू एडेड मसाला उत्पादों के निर्यात में भी तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। खेती से लेकर प्रसंस्करण और वैश्विक विपणन तक, भारतीय मसाला क्षेत्र का विस्तार लगातार बढ़ रहा है, जिससे कृषि निर्यात को नई गति मिल रही है।
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ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारतीय छोटी इलायची (स्मॉल कार्डमम) के निर्यात ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। निर्यात मूल्य 74 प्रतिशत बढ़कर 251.67 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 144.81 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय छोटी इलायची की बढ़ती मांग को दर्शाती है और वैश्विक मसाला व्यापार में भारत की मजबूत होती स्थिति को रेखांकित करती है।
वैल्यू एडेड उत्पाद बने निर्यात वृद्धि के प्रमुख आधार
भारतीय मसाला निर्यात में वैल्यू एडेड उत्पादों का योगदान लगातार बढ़ रहा है। अप्रैल 2026 के दौरान:
- मिंट उत्पादों का निर्यात 29 प्रतिशत बढ़कर 304.11 करोड़ रुपये पहुंच गया।
- स्पाइस ऑयल्स एवं ओलियोरेजिन्स का निर्यात 15 प्रतिशत बढ़कर 347.93 करोड़ रुपये रहा।
- करी पाउडर एवं करी पेस्ट का निर्यात 12 प्रतिशत बढ़कर 184.05 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक उपभोक्ता अब केवल कच्चे मसालों के बजाय सुविधाजनक, उच्च गुणवत्ता वाले और प्रसंस्कृत मसाला उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि भारतीय वैल्यू एडेड मसालों की मांग विकसित और उभरते दोनों बाजारों में बढ़ रही है।
हल्दी की मांग भी बनी हुई है मजबूत
भारत की प्रमुख मसाला फसल हल्दी का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है। अप्रैल 2026 में हल्दी निर्यात का मूल्य 13 प्रतिशत बढ़कर 256.79 करोड़ रुपये हो गया, जो अप्रैल 2025 में 227.42 करोड़ रुपये था।
हल्दी की बढ़ती मांग के पीछे इसके औषधीय गुण, प्राकृतिक रंग और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों में बढ़ता उपयोग प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और एशियाई देशों में भारतीय हल्दी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
किसानों और कृषि निर्यात के लिए सकारात्मक संकेत
मसाला निर्यात में यह वृद्धि किसानों के लिए बेहतर आय के अवसर पैदा कर सकती है। विशेष रूप से इलायची, हल्दी, पुदीना और अन्य उच्च मूल्य वाली मसाला फसलों से जुड़े उत्पादकों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। इसके साथ ही प्रसंस्करण उद्योग, खाद्य निर्यातक कंपनियां और कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारकों को भी नए बाजार अवसर मिल रहे हैं।
भारत का बढ़ता ग्लोबल प्रभाव
भारतीय मसाला क्षेत्र पारंपरिक मसालों और आधुनिक वैल्यू एडेड उत्पादों दोनों की मजबूत मांग के बल पर वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। कृषि निर्यात में मसाला क्षेत्र की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र भारत के कृषि निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में अहम योगदान दे सकता है।
मसालों की गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी, प्रसंस्करण क्षमता और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन पर बढ़ता ध्यान भारत को विश्व मसाला व्यापार का और अधिक प्रभावशाली केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहा है।
स्रोत: वाणिज्य विभाग, भारत सरकार
