खरीफ सीजन 2026: 19 जून तक बुवाई में बढ़त, दलहन और मोटे अनाजों का रकबा बढ़ा, कपास और तिलहनों में गिरावट!
नई दिल्ली। खरीफ फसलों की बुवाई प्रगति के ताजा आंकड़ों के अनुसार 19 जून 2026 तक देश में कुल 119.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 117.95 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.95 लाख हेक्टेयर अधिक है। शुरुआती मानसून की गतिविधियों के बीच किसानों ने दलहन, श्री अन्न (मिलेट्स) और गन्ने की खेती में रुचि दिखाई है, जबकि तिलहन और कपास के क्षेत्रफल में कमी दर्ज की गई है।
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कुल बुवाई क्षेत्र में 1.95 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ 2026 में अब तक कुल 119.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 117.95 लाख हेक्टेयर से अधिक है, जो खरीफ सीजन की सकारात्मक शुरुआत का संकेत देता है।
धान की बुवाई में तेजी
देश की प्रमुख खरीफ फसल धान का रकबा 19 जून 2026 तक 12.36 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 8.09 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार धान के क्षेत्रफल में 4.26 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मानसून की बेहतर प्रगति और पर्याप्त नमी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
दलहनों का रकबा बढ़ा, मूंग में सबसे अधिक वृद्धि
दलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 7.21 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष के 6.39 लाख हेक्टेयर से 0.83 लाख हेक्टेयर अधिक है।
प्रमुख दलहनों की स्थिति
- अरहर : 1.61 लाख हेक्टेयर (0.02 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
- उड़द : 0.62 लाख हेक्टेयर (0.36 लाख हेक्टेयर कमी)
- मूंग : 4.08 लाख हेक्टेयर (1.21 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
- कुलथी : 0.09 लाख हेक्टेयर
- मोठ : 0.10 लाख हेक्टेयर
- अन्य दलहन : 0.71 लाख हेक्टेयर
मूंग की बुवाई में सर्वाधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
श्री अन्न और मोटे अनाजों की लोकप्रियता बढ़ी
सरकार द्वारा मिलेट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर बुवाई आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। श्री अन्न एवं मोटे अनाजों का कुल क्षेत्रफल 12.43 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 9.82 लाख हेक्टेयर से 2.61 लाख हेक्टेयर अधिक है।
प्रमुख फसलों का प्रदर्शन
- ज्वार : 1.74 लाख हेक्टेयर
- बाजरा : 4.05 लाख हेक्टेयर (1.91 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
- रागी : 0.31 लाख हेक्टेयर
- छोटे बाजरा : 0.64 लाख हेक्टेयर
- मक्का : 5.69 लाख हेक्टेयर
बाजरा और मक्का की बुवाई में विशेष रूप से अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
तिलहन क्षेत्र में गिरावट चिंता का विषय
तिलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 7.24 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 8.11 लाख हेक्टेयर की तुलना में 0.87 लाख हेक्टेयर कम है।
तिलहन फसलों की स्थिति
- मूंगफली : 5.25 लाख हेक्टेयर (0.16 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
- सोयाबीन : 1.30 लाख हेक्टेयर (1.20 लाख हेक्टेयर कमी)
- सूरजमुखी : 0.49 लाख हेक्टेयर (0.21 लाख हेक्टेयर वृद्धि)
- तिल : 0.15 लाख हेक्टेयर
- रेंड़ी : 0.02 लाख हेक्टेयर
विशेषज्ञों का मानना है कि कई राज्यों में मानसून की प्रतीक्षा और बाजार परिस्थितियों के कारण सोयाबीन की बुवाई अपेक्षाकृत धीमी रही है।
गन्ना और जूट में मामूली बढ़ोतरी
गन्ने का क्षेत्रफल 57.31 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष के 56.64 लाख हेक्टेयर से 0.67 लाख हेक्टेयर अधिक है। वहीं जूट एवं मेस्ता का रकबा 6.22 लाख हेक्टेयर रहा, जिसमें 0.14 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई।
कपास की बुवाई में बड़ी गिरावट
कपास का क्षेत्रफल 17.13 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 22.82 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार कपास की बुवाई में 5.69 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय कमी आई है। मौसम संबंधी अनिश्चितता, फसल लागत और वैकल्पिक फसलों की ओर किसानों का रुझान इसके संभावित कारण बताए जा रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत उत्साहजनक रही है। धान, दलहन और मिलेट्स के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि तिलहन और कपास के क्षेत्र में आई गिरावट पर नजर रखने की आवश्यकता होगी। आगामी सप्ताहों में मानसून की प्रगति के आधार पर बुवाई क्षेत्र में और तेजी आने की संभावना है।
प्रमुख बिंदु
- कुल खरीफ बुवाई क्षेत्र 119.90 लाख हेक्टेयर
- पिछले वर्ष की तुलना में 1.95 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी
- धान में 4.26 लाख हेक्टेयर की वृद्धि
- दलहन क्षेत्र 0.83 लाख हेक्टेयर बढ़ा
- मोटे अनाजों में 2.61 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी
- तिलहन क्षेत्र 0.87 लाख हेक्टेयर घटा
- कपास में 5.69 लाख हेक्टेयर की सबसे बड़ी गिरावट
- गन्ना और जूट में मामूली वृद्धि दर्ज हुई।
