चित्रकूट में पोल्ट्री फार्म खोलने वालों को सरकार का बड़ा तोहफा!

चित्रकूट में पोल्ट्री कारोबार को बढ़ावा, आवेदन शुरू!

पशुपालन विभाग ने जनपद चित्रकूट में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए “कुक्कुट विकास नीति-2022” के तहत कमर्शियल लेयर और ब्रायलर पैरेंट फार्म स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। लंबे समय से रोजगार और खेती में कम आमदनी की चुनौती झेल रहे बुंदेलखंड क्षेत्र के युवाओं और किसानों के लिए यह योजना नई उम्मीद लेकर आई है। विभाग का कहना है कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक पोल्ट्री फार्म स्थापित होते हैं तो इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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गांवों में बढ़ रही पोल्ट्री कारोबार की दिलचस्पी

पिछले कुछ वर्षों में चित्रकूट और आसपास के जिलों में पोल्ट्री व्यवसाय के प्रति युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ा है। खेती से सीमित आमदनी और रोजगार के कम अवसरों के बीच अब कई युवा पशुपालन और पोल्ट्री फार्मिंग को स्थायी आय के साधन के रूप में देखने लगे हैं। खासकर अंडों और चिकन की लगातार बढ़ती मांग ने इस क्षेत्र को लाभकारी व्यवसाय बना दिया है।

पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की यह योजना केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य गांवों में छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों को तैयार करना है। विभाग को उम्मीद है कि इससे जिले में आधुनिक तकनीक आधारित पोल्ट्री फार्म स्थापित होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

तीन अलग-अलग क्षमता वाले फार्म स्थापित करने की योजना

कुक्कुट विकास नीति-2022 के तहत जिले में तीन प्रकार की कमर्शियल लेयर इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित की गई है। इसमें 10 हजार, 30 हजार और 60 हजार पक्षी क्षमता वाले फार्म शामिल हैं। परियोजना की लागत भी उसी आधार पर तय की गई है।

10 हजार पक्षी क्षमता वाली इकाई की अनुमानित लागत करीब 99.53 लाख रुपये रखी गई है। वहीं 30 हजार पक्षी क्षमता वाली इकाई के लिए लगभग 256.69 लाख रुपये और 60 हजार पक्षी क्षमता वाले बड़े फार्म के लिए करीब 491.90 लाख रुपये की परियोजना लागत निर्धारित की गई है।

ग्रामीण क्षेत्र के कई युवाओं के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना आसान नहीं होता। इसे देखते हुए सरकार ने बैंक ऋण पर ब्याज में राहत देने का फैसला किया है। योजना के तहत लाभार्थियों को बैंक से लिए गए ऋण पर 5 वर्षों यानी 60 महीनों तक 7 प्रतिशत ब्याज की प्रतिपूर्ति मिलेगी। इससे फार्म स्थापित करने वाले उद्यमियों को शुरुआती वर्षों में आर्थिक राहत मिलेगी।

पहली बार व्यवसाय शुरू करने वालों को प्राथमिकता

योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें पहली बार आवेदन करने वाले युवाओं और किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे नए लोगों को व्यवसाय में उतरने का मौका मिलेगा।

18 वर्ष से अधिक आयु के जनपद निवासी सभी वर्गों के इच्छुक लोग आवेदन कर सकते हैं। हालांकि ऐसे लोग जिन्होंने पहले उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति-2013 के तहत लाभ लिया था, उन्हें भी इस योजना में शामिल होने का अवसर दिया गया है। लेकिन इसके लिए शर्त रखी गई है कि उन्होंने पहले 30 हजार पक्षी क्षमता की लेयर इकाई या 10 हजार पक्षी क्षमता की ब्रायलर इकाई से अधिक लाभ प्राप्त न किया हो।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान नीति के तहत एक लाभार्थी या उद्यमी को केवल एक ही परियोजना में लाभ मिलेगा ताकि अधिक से अधिक लोगों तक योजना का फायदा पहुंच सके।

जमीन की शर्तें भी तय

कमर्शियल पोल्ट्री फार्म स्थापित करने के लिए पर्याप्त भूमि होना जरूरी माना गया है। इसी वजह से अलग-अलग क्षमता वाली इकाइयों के लिए न्यूनतम भूमि का मानक तय किया गया है।

10 हजार पक्षी क्षमता वाले फार्म के लिए कम से कम 1 एकड़ भूमि आवश्यक होगी। 30 हजार पक्षी क्षमता वाली इकाई के लिए 2.5 एकड़ और 60 हजार पक्षी क्षमता वाले बड़े फार्म के लिए 4 एकड़ भूमि जरूरी होगी।

यह भूमि लाभार्थी के नाम होनी चाहिए या फिर वैध लीज पर ली गई हो। अधिकारियों का कहना है कि इससे भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की संभावना कम होगी।

बिजली बिल और स्टाम्प शुल्क में बड़ी छूट

सरकार ने योजना को आकर्षक बनाने के लिए बिजली और जमीन से जुड़े खर्चों में भी राहत देने की व्यवस्था की है। योजना के तहत स्थापित होने वाली पोल्ट्री इकाइयों के बिजली बिल में 10 वर्षों तक इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी। यानी उद्यमियों को लंबे समय तक बिजली खर्च में राहत मिलेगी।

इसके अलावा इकाई की स्थापना के लिए खरीदी गई या लीज पर ली गई भूमि पर 100 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क छूट का प्रावधान किया गया है। हालांकि इसके लिए बैंक गारंटी और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

योजना में आवेदन करने के लिए लाभार्थियों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक अभिलेख शामिल हैं।

पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को पोल्ट्री फार्म संचालन में तकनीकी जानकारी होने के कारण अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।

बुंदेलखंड में रोजगार का नया रास्ता

चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में जहां लंबे समय से रोजगार और पलायन की समस्या बनी हुई है, वहां पोल्ट्री व्यवसाय को संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोग मानते हैं कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से जरूरतमंद युवाओं तक पहुंचे तो गांवों में ही रोजगार के अवसर तैयार हो सकते हैं।

कई किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ पोल्ट्री व्यवसाय को अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अंडे और चिकन की मांग और बढ़ेगी, ऐसे में यह व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कहां करें संपर्क

इच्छुक लाभार्थी वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान आवेदन कर सकते हैं। योजना से संबंधित अधिक जानकारी और आवेदन प्रक्रिया के लिए संबंधित पशु चिकित्सालय या मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय, चित्रकूट से संपर्क किया जा सकता है।