दलहन की खेती बढ़ाने पर सरकार मिशन मोड में!

तुअर पैदावार में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम, 500 से अधिक हितधारकों ने वेबिनार में लिया हिस्सा

नई दिल्ली। देश में दलहन की खेती को बढ़ावा देने और तुअर (अरहर) पैदावार में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) के संयुक्त सचिव एवं राष्ट्रीय मिशन निदेशक (पल्सेस मिशन) Sanjay Kumar Agarwal की अध्यक्षता में “Achieving Self-Reliance in Tur Production” विषय पर एक महत्वपूर्ण वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में देशभर से 500 से अधिक हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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वेबिनार का मुख्य उद्देश्य देश में तुअर खेती को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा दलहन क्षेत्र को अधिक मजबूत बनाना था। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) तथा प्रगतिशील किसानों ने भाग लेकर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव

कार्यक्रम में ICAR-Indian Institute of Pulses Research, ICRISAT तथा विभिन्न कृषि अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिकों ने तुअर उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत तकनीकों, उच्च उत्पादक किस्मों और जलवायु अनुकूल खेती पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उपभोक्ता देश होने के बावजूद कई बार उत्पादन में कमी के कारण आयात पर निर्भर हो जाता है। ऐसे में तुअर उत्पादन में आत्मनिर्भरता केवल खाद्य सुरक्षा ही नहीं बल्कि किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए भी बेहद आवश्यक है।

आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीज पर जोर

वेबिनार में यह भी चर्चा हुई कि यदि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक सलाह, सिंचाई सुविधाएं और बेहतर बाजार उपलब्ध कराए जाएं तो तुअर की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। विशेषज्ञों ने ड्रोन आधारित निगरानी, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक उर्वरकों और एकीकृत कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।

कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए सूखा सहनशील और कम अवधि वाली तुअर किस्मों के विकास पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन और कम जोखिम मिल सके।

किसानों और एफपीओ की भागीदारी रही अहम

वेबिनार में शामिल प्रगतिशील किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों ने जमीनी स्तर की चुनौतियों और सफलताओं को साझा किया। किसानों ने बताया कि उचित तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिलने पर तुअर खेती लाभकारी साबित हो सकती है।

एफपीओ प्रतिनिधियों ने प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

अपने संबोधन में Sanjay Kumar Agarwal ने कहा कि केंद्र सरकार दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि देश को तुअर उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, राज्य सरकारों, कृषि संगठनों और किसानों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी सहायता और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रही है, जिससे दलहन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि तुअर उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल होने से न केवल आयात बिल में कमी आएगी बल्कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा भी मजबूत होगी। इसके साथ ही दलहन क्षेत्र में रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

वेबिनार के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि अनुसंधान, तकनीक हस्तांतरण और किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने से भारत आने वाले वर्षों में तुअर उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है।