GPDP की गुणवत्ता सुधार पर राष्ट्रीय कार्यशाला, पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए ₹4.35 लाख करोड़ का रोडमैप तैयार !!
नई दिल्ली। ग्रामीण विकास को नई गति देने और पंचायतों को अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की गुणवत्ता सुधार पर व्यापक मंथन किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर पंचायत स्तर पर योजना निर्माण को अधिक प्रभावी और परिणाम-उन्मुख बनाने पर जोर दिया।
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गुणवत्ता सुधार के लिए 15 संकेतकों पर जोर !!
कार्यक्रम में GPDP की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए गठित समिति द्वारा विकसित 15 गुणवत्ता संकेतकों (Quality Indicators) को केंद्र में रखा गया। इन संकेतकों के माध्यम से पंचायत योजनाओं की समग्रता, पारदर्शिता, समावेशिता और स्थायित्व सुनिश्चित करने की दिशा में राज्यों को मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि पंचायतें इन मानकों के आधार पर योजनाएं तैयार करती हैं, तो स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।
16वें वित्त आयोग से पंचायतों को मिलेगा बड़ा आर्थिक संबल !! 
कार्यशाला के दौरान पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर ने 16वें वित्त आयोग (2026–31) के अनुदान ढांचे पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) के लिए ₹4.35 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पंचायतों के लिए अब तक का एक बड़ा वित्तीय समर्थन है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फंड सीधे GPDP से लिंक रहेगा, जिससे पंचायतें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार योजनाएं बनाकर धन का उपयोग कर सकेंगी। यह व्यवस्था नीचे से ऊपर (Bottom-Up Planning) की अवधारणा को मजबूत करेगी।
सुधार-उन्मुख ढांचे से बढ़ेगी जवाबदेही !!
संयुक्त सचिव ने बताया कि 16वें वित्त आयोग का ढांचा पूरी तरह सुधार-उन्मुख (Reform-Oriented) है। इसके तहत पंचायतों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने राज्यों को कुछ महत्वपूर्ण कार्य बिंदुओं पर तेजी से काम करने का आह्वान किया—
eGramSwaraj और AuditOnline प्लेटफॉर्म पर सभी पंचायतों का पंजीकरण
राज्य वित्त आयोग (SFC) को सक्रिय और मजबूत बनाना
SAMARTH प्लेटफॉर्म का एकीकरण
पंचायतों के स्वयं के स्रोत राजस्व (OSR) की सटीक रिपोर्टिंग
डिजिटल माध्यमों से निगरानी और ऑडिट प्रणाली को मजबूत करना
तकनीकी सत्रों में मिली व्यवहारिक जानकारी
कार्यशाला के पहले दिन कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इन सत्रों में—
उच्च गुणवत्ता वाली थीम आधारित पंचायत विकास योजनाएं (PDPs) तैयार करने की रणनीतियाँ
अनटाइड ग्रांट्स के उपयोग और उनकी शर्तों की जानकारी
Village Poverty Reduction Plan (VPRP) को GPDP से जोड़ने में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका
PESA क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं के अनुरूप योजना निर्माण
eGramSwaraj पोर्टल और Gram Manchitra का उपयोग कर डिजिटल योजना निर्माण
इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर डेटा-आधारित, सहभागी और पारदर्शी योजना प्रणाली विकसित करना था।
दूसरे दिन साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण पर फोकस !!
कार्यशाला के दूसरे दिन Panchayat Advancement Index (PAI) को योजना निर्माण में शामिल करने पर विशेष चर्चा होगी। यह सूचकांक पंचायतों के प्रदर्शन को मापने में मदद करेगा और उसी आधार पर योजनाएं तैयार की जाएंगी।
इसके अलावा, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि अपने-अपने अनुभव साझा करेंगे कि उन्होंने नए eGramSwaraj पोर्टल पर GPDP तैयार करते समय किन चुनौतियों का सामना किया और उन्हें कैसे दूर किया।
ग्रामीण विकास को मिलेगा नया आयाम !!
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यशाला के माध्यम से पंचायतों में साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, डिजिटल पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल योजनाओं की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का प्रभाव भी तेजी से दिखाई देगा।
अंततः, यह पहल देश में ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करते हुए पंचायतों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

