बाजरा खेती पर फोकस, टिकाऊ कृषि की ओर कदम
📍 पोकरण (राजस्थान)। मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) पोकरण ने मोडरडी गांव में संतुलित उर्वरक उपयोग पर एक जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस अभियान में बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान और महिला कृषकों ने भाग लेकर वैज्ञानिक खेती की जानकारी प्राप्त की।
👉 कार्यक्रम का उद्देश्य: टिकाऊ कृषि की दिशा में पहल
मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) पोकरण द्वारा मोडरडी गांव में संतुलित उर्वरक उपयोग पर जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों और महिला कृषकों ने भाग लेकर वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की।
👉 बाजरा आधारित खेती पर विशेष फोकस

यह अभियान विज्ञान-आधारित इनपुट प्रबंधन को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहा, जिसमें विशेष रूप से बाजरा आधारित खेती प्रणालियों पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि बाजरा शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त और जलवायु सहनशील फसल है, जिससे बदलते मौसम में भी स्थिर पैदावार संभव है।
👉 मृदा परीक्षण से बढ़ेगी उर्वरता और स्थिरता
केवीके के प्रसार वैज्ञानिक सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने से मिट्टी की उर्वरता में सुधार, संरचना बेहतर होने और सूक्ष्मजीव गतिविधियों में वृद्धि होती है। इससे दीर्घकालिक कृषि स्थिरता को मजबूती मिलती है।
👉 संतुलित उर्वरीकरण के फायदे
उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरीकरण से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की सही मात्रा उपलब्ध होती है, जिससे जड़ों का विकास बेहतर होता है, सूखा सहनशीलता बढ़ती है और दाने की गुणवत्ता में सुधार होता है। इससे बाजरा सहित अन्य फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
👉 जैविक विकल्पों पर जोर
कार्यक्रम में पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. राम निवास ने जैव उर्वरकों, हरी खाद और जैविक आदानों के उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि इससे मृदा कार्बनिक कार्बन में वृद्धि, नमी संरक्षण में सुधार और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी आती है, जिससे खेती अधिक किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनती है।
👉 लागत में कमी, आय में बढ़ोतरी
विशेषज्ञों ने कहा कि सटीक पोषक तत्व प्रबंधन से किसानों की लागत घटेगी, पोषक तत्वों की हानि कम होगी और बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन संभव होगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
👉 राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा
यह कार्यक्रम देशभर के 100 गहन जिलों में चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत किसानों को सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।


























