पूसा संस्थान का 122वां स्थापना दिवस: कृषि नवाचार और ग्रीन दिल्ली पर फोकस

 पूसा संस्थान का 122वाँ स्थापना दिवस: कृषि नवाचार और “विकसित भारत 2047” का संकल्प दोहराया !!

नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा संस्थान) ने अपना 122वाँ स्थापना दिवस गरिमामय समारोह के साथ मनाया। डॉ. बी.पी. पाल सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान, नवाचार और किसान-केंद्रित विकास को नई दिशा देने का संकल्प दोहराया गया।

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🌾 एक सदी से अधिक का योगदान: खाद्य सुरक्षा की मजबूत नींव!!

पूसा संस्थान ने पिछले 100 वर्षों में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार के माध्यम से भारत की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह समारोह संस्थान की इसी गौरवशाली विरासत का प्रतीक बना।

📊 उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड: ग्लोबल स्तर पर बढ़ी साख !!

संस्थान के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव ने बीते वर्ष की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि: NIRF 2025 में लगातार तीसरी बार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में प्रथम स्थान,SDG रैंकिंग में दूसरा स्थान,QS विश्व रैंकिंग 2026 (151–200) में प्रवेश, NAEAB से A+ ग्रेड (3.64/4.00),उन्होंने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के तहत जलवायु-सहिष्णु खेती, डिजिटल तकनीक और किसान-केंद्रित नवाचार पर विशेष जोर दिया।

🌱 ग्रीन दिल्ली और जल सुरक्षा पर जोर!!

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रेखा गुप्ता ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि पूसा संस्थान “ग्रीन दिल्ली” और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य सुधार और वैज्ञानिक जागरूकता को किसानों के भविष्य के लिए जरूरी बताया।

🤝 कृषि में सहयोग और नवाचार की नई दिशा!!

विशिष्ट अतिथि डॉ. एम. एल. जाट ने शहरी एवं अर्ध-शहरी कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए ICAR और दिल्ली सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने “कचरे से खाद” जैसे नवाचारों को सतत कृषि का भविष्य बताया।

👉 किसानों के लिए उनकी अहम सलाह!!

गेहूं में DAP के उपयोग के बाद धान में अनावश्यक प्रयोग से बचें इससे लागत घटेगी और पोषक तत्वों की दक्षता बढ़ेगी

📚 नई पुस्तकों का विमोचन और तकनीकी प्रदर्शनी !!

मुख्यमंत्री ने संस्थान की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया: खाद्यान्न, पोषण एवं आजीविका सुरक्षा हेतु उन्नत फसल किस्में प्रिसिशन फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केप डिजाइन

🏆 उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान !!

समारोह में वर्ष 2025–26 के दौरान उत्कृष्ट योगदान देने वाले: वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मी ,मीडिया प्रतिनिधि,FPO को सम्मानित किया गया।

🔍 सारांश!!

यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की कृषि दिशा का संकेत है। जलवायु परिवर्तन के दौर में क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर पर फोकस , डिजिटल और इमर्सिव तकनीकों से खेती का आधुनिकीकरण
लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक सलाह।
👉 यह साफ है कि आने वाले वर्षों में पूसा संस्थान किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।