आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों ने आईसीएआर–आईएआरआई का किया अध्ययन दौरा, कृषि अनुसंधान और तकनीकों को करीब से जाना !!
नई दिल्ली, 9 मार्च 2026। देश के भावी प्रशासनिक अधिकारियों को कृषि अनुसंधान और ग्रामीण विकास की वास्तविकताओं से परिचित कराने के उद्देश्य से लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) के आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों के एक दल ने *आईसीएआर – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर–आईएआरआई)*, नई दिल्ली का अध्ययन दौरा किया। यह दौरा प्रशिक्षु अधिकारियों के विंटर स्टडी टूर कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसके तहत उन्हें कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रमुख संस्थानों की कार्यप्रणाली, अनुसंधान गतिविधियों और किसानों के लिए विकसित तकनीकों की जानकारी दी गई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
संस्थान की ऐतिहासिक भूमिका और स्वागत संबोधन !!
कार्यक्रम की शुरुआत आईसीएआर–आईएआरआई के संयुक्त निदेशक (प्रसार) डॉ. आर. एन. पदारिया के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को संस्थान के इतिहास और उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि आईसीएआर–आईएआरआई, जिसे ‘पूसा संस्थान’ के नाम से भी जाना जाता है, भारत की कृषि अनुसंधान प्रणाली का प्रमुख केंद्र है और इसने दशकों से अनुसंधान, नवाचार और प्रसार गतिविधियों के माध्यम से देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सतत कृषि-खाद्य प्रणाली पर संस्थान का फोकस !!
इसके बाद संस्थान के निदेशक डॉ. सी. श्रीनिवास राव. ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से संस्थान की गतिविधियों, उपलब्धियों और भविष्य की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान सतत कृषि-खाद्य प्रणाली ( सतत कृषि-खाद्य प्रणाली ) के निर्माण के लिए अनेक अनुसंधान कार्यक्रम चला रहा है। विभिन्न विभाग और अनुसंधान इकाइयाँ मिलकर ऐसी तकनीकों का विकास कर रही हैं जो किसानों के लिए उपयोगी, टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी हों।
किसानों के लिए विकसित हो रही आधुनिक कृषि तकनीकें !!
डॉ. राव ने बताया कि संस्थान में विकसित अनुसंधान परिणामों का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाता है। इसमें उन्नत फसल किस्मों का विकास, जल एवं पोषक तत्व प्रबंधन तकनीक, जलवायु अनुकूल खेती पद्धतियां और आधुनिक कृषि उपकरण शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से किसानों की पैदावार बढ़ाने, लागत कम करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पूसा कृषि विज्ञान मेला: किसानों के लिए बड़ा मंच !!
संस्थान की प्रमुख आउटरीच गतिविधियों में पूसा कृषि विज्ञान मेला का विशेष महत्व है। डॉ. राव ने बताया कि यह देश के प्रमुख कृषि मेलों में से एक है, जिसमें हर वर्ष एक लाख से अधिक किसान, छात्र, वैज्ञानिक और कृषि उद्यमी भाग लेते हैं। इस मेले के माध्यम से किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों, नई फसल किस्मों और आधुनिक खेती पद्धतियों की जानकारी दी जाती है।
आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का किया अवलोकन !!
अध्ययन दौरे के दौरान आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों को संस्थान की कई प्रमुख अनुसंधान सुविधाओं और फील्ड इकाइयों का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) मॉडल, सेंटर फॉर प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन टेक्नोलॉजी सरसों और गेहूं के प्रायोगिक खेतों, पूसा अमृत सरोवर तथा अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र **नानाजी देशमुख प्लांट फिनोमिक्स सेंटर का दौरा किया। यहां वैज्ञानिकों ने उन्हें आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के माध्यम से फसल अनुसंधान की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। 
वैज्ञानिकों के साथ संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र !!
दौरे के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने वैज्ञानिकों के साथ विभिन्न विषयों पर संवाद किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों, तकनीक हस्तांतरण, किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे। कार्यक्रम के अंत में आयोजित इंटरएक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में वैज्ञानिकों और प्रशिक्षु अधिकारियों के बीच कृषि नीति और अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं पर सार्थक चर्चा हुई।
भविष्य के नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण अनुभव !!
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के अध्ययन दौरे प्रशासनिक सेवाओं में आने वाले अधिकारियों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं। इससे उन्हें कृषि अनुसंधान संस्थानों की भूमिका, किसानों की जरूरतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं को समझने का अवसर मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब ये प्रशिक्षु अधिकारी भविष्य में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे, तब इस तरह का अनुभव उन्हें किसान-केंद्रित नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करेगा और देश के कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने में योगदान देगा।