ब्रांडिंग और प्रोफेशनल मैनेजमेंट पर NDDB का फोकस
बिहार में चारा और शहद उत्पादक संगठनों की मजबूती पर जोर, एनडीडीबी की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न
समस्तीपुर – बिहार में दुग्ध उत्पादन और सहायक कृषि गतिविधियों को नई दिशा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा प्रोत्साहित ‘फॉडर प्लस’ और ‘हनी’ एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक समस्तीपुर स्थित मिथिला मिल्क यूनियन में आयोजित की गई। बैठक में सात फॉडर प्लस और तीन हनी एफपीओ ने भाग लिया, जो पांच क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठनों—वैशाली पटलिपुत्र मिल्क यूनियन, शाहाबाद मिल्क यूनियन, तिरहुत मिल्क यूनियन, देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिल्क यूनियन तथा मिथिला मिल्क यूनियन (Comfed Sudha)—के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।
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पूंजी, सदस्यता और कारोबार पर गहन समीक्षा
बैठक में शेयर पूंजी संग्रहण, सदस्यता विस्तार, वार्षिक टर्नओवर, कार्यशील पूंजी प्रबंधन, बैंकिंग लिंकज, ऑडिट अनुपालन और व्यवसाय विविधीकरण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। यह आकलन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रत्येक एफपीओ की वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि एफपीओ की मजबूती का मूल आधार पारदर्शी लेखा प्रणाली, समय पर ऑडिट और सुदृढ़ बैंकिंग संबंध हैं। यदि ये तत्व सशक्त होंगे, तो छोटे और सीमांत किसानों की सामूहिक सौदेबाजी क्षमता भी बढ़ेगी।
उत्पाद विविधीकरण से बढ़ेगी आय
समीक्षा बैठक में साइलेंज उत्पादन, गेहूं भूसा (ड्राई फॉडर), पशु आहार, मिनरल मिक्सचर, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक उर्वरक (PROM, MRL, रूटगार्ड), कच्चा व प्रसंस्कृत शहद, चावल की किस्में (सोनाम, कतरनी), मखाना और बीज उपज व विपणन पर विस्तृत चर्चा हुई।
विशेष रूप से यह रेखांकित किया गया कि चारा उत्पादन और विपणन को संगठित रूप देने से दूध उत्पादकों की लागत में कमी आएगी और पशुओं की उत्पादकता में वृद्धि होगी। वहीं शहद एवं मखाना जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों का ब्रांडिंग के साथ बाजार विस्तार किसानों की आय को कई गुना बढ़ा सकता है।
पेशेवर प्रबंधन और ब्रांडिंग पर जोर
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि एफपीओ केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रोफेशनल मैनेजमेंट, ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर भी ध्यान दें। स्थानीय उत्पादों को क्षेत्रीय पहचान के साथ राष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ‘फॉडर प्लस’ मॉडल सफल होता है तो यह दुग्ध सहकारी ढांचे को और मजबूत करेगा। बिहार जैसे राज्य में, जहां दुग्ध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, वहां संगठित चारा प्रबंधन से दूध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार संभव है।
केंद्र सरकार की योजना से जुड़ा प्रयास
फॉडर प्लस एफपीओ का गठन भारत सरकार की ‘10,000 एफपीओ गठन एवं संवर्धन’ केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत किया गया है। इस योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को संगठित कर उनकी बाजार पहुंच, संस्थागत क्षमता और आय में वृद्धि करना है।
जानकारों का कहना है कि, बिहार में एनडीडीबी की यह पहल कृषि और डेयरी क्षेत्र के एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि बैंकिंग सहयोग, बाजार संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन सतत बना रहता है, तो ये एफपीओ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती प्रदान कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह समीक्षा बैठक केवल प्रगति रिपोर्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि भविष्य की रणनीति तय करने का मंच बनी—जहां चारा, शहद और दुग्ध उत्पादन को एकीकृत कर किसानों की आय बढ़ाने की ठोस रूपरेखा पर सहमति बनी।
चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया NDDB