मिट्टी की सेहत ही खेती की असली ताकत है !!

मिट्टी की सेहत से कृषि में नई क्रांति: हैदराबाद में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम !!

हैदराबाद, -कृषि उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों की आय सुरक्षित करने के लिए मिट्टी की सेहत को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है। इसी दिशा में ICRISAT ने तेलंगाना सरकार के सहयोग से हैदराबाद के पाटनचेरु स्थित मुख्यालय में दो दिवसीय “मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम” की शुरुआत की।

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120 से अधिक किसानों को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण !!

यह कार्यक्रम “तेलंगाना राइजिंग” विजन के तहत आयोजित किया गया है, जिसमें कोडंगल क्षेत्र के 120 से अधिक किसानों और कृषि से जुड़े फ्रंटलाइन कर्मचारियों को शामिल किया गया है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, उर्वरकों के सही उपयोग और फसल विविधीकरण के लिए व्यावहारिक ज्ञान देना है।

वैज्ञानिक तकनीकों से खेती को मिलेगा नया आयाम !!

कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी परीक्षण, उसकी व्याख्या, माइक्रोबायोलॉजी, जियो-रेफरेंस सैंपलिंग और मोबाइल टेस्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही जैविक खाद, बायोचार, कंपोस्टिंग और रीजेनेरेटिव खेती के फील्ड डेमो भी कराए जा रहे हैं।

इस तरह की तकनीकों से किसान !!

उर्वरकों की लागत 20–30% तक कम कर सकते हैं, मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं, उत्पादन में स्थिरता और गुणवत्ता सुधार सकते हैं 

विशेषज्ञों और मंत्रियों ने किया उद्घाटन !!

कार्यक्रम का उद्घाटन तेलंगाना के कृषि मंत्री थुम्माला नागेश्वर राव  ने किया। इस मौके पर डॉ. हिमांशु पाठक सहित कई कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि अब समय आ गया है कि “मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन केवल सलाह नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर अपनाई जाने वाली प्रैक्टिस बने।” उन्होंने इसे “वन हेल्थ” अप्रोच का अहम हिस्सा बताया, जो पर्यावरण, पशु और मानव स्वास्थ्य को जोड़ता है।

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने पर जोर !!

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ICRISAT के साथ मिलकर किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस प्रशिक्षण से मिले ज्ञान को अपनाएं और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें।

कम रासायनिक उपयोग से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता बढ़ती है, जल प्रदूषण कम होता है
खेती अधिक टिकाऊ बनती है, धान से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण पर फोकस

कार्यक्रम में अधिकारियों ने किसानों को पारंपरिक धान आधारित खेती से हटकर दालें, मोटे अनाज (मिलेट्स) और तिलहन अपनाने की सलाह दी। इससे न केवल मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार मूल्य भी मिलेगा।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से मिलेगा सटीक मार्गदर्शन !!

इस प्रशिक्षण में “Soil Health Card” आधारित पोषक तत्व प्रबंधन और फसल सलाह पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे किसान अपने खेत की जरूरत के अनुसार उर्वरक उपयोग कर सकेंगे।

राज्यभर में विस्तार की योजना !!

यह कार्यक्रम एक बड़े अभियान का पहला चरण है, जिसे आगे पूरे तेलंगाना में लागू किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।

टिकाऊ खेती की ओर बड़ा कदम !!

यह पहल तेलंगाना में वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि किसानों की आय और कृषि की स्थिरता भी बढ़ेगी।