September 21, 2026 10:12 PM

Krishi Times

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AI और फसल विविधीकरण से बढ़ेगी किसानों की आय!

विकसित कृषि–आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ता कदम: पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 के दूसरे दिन तकनीक और नवाचार पर मंथन

नई दिल्ली,- राजधानी में 25–27 फरवरी तक आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेला (PKVM)–2026 के दूसरे दिन किसानों, कृषि उद्यमियों, वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, एफपीओ प्रतिनिधियों और एग्री-स्टार्टअप्स की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। “विकसित कृषि – आत्मनिर्भर भारत” थीम पर आधारित यह मेला भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) परिसर में आयोजित हो रहा है।

द्वितीय दिवस पर फसल विविधीकरण, डिजिटल कृषि, एफपीओ–स्टार्टअप समन्वय, कृषि विपणन एवं निर्यात जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें किसानों की आय वृद्धि और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर गहन चर्चा हुई।

किसान–वैज्ञानिक संवाद का सशक्त मंच

संस्थान के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव ने कहा कि यह मेला किसान–वैज्ञानिक संवाद तथा उन्नत प्रौद्योगिकी प्रसार के लिए एक प्रभावी मंच साबित हो रहा है, जिसमें एक लाख से अधिक हितधारकों की सहभागिता अनुमानित है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्रदर्शित तकनीकों का अधिकतम लाभ उठाएं।

संयुक्त निदेशक (विस्तार) डॉ. आर. एन. पडारिया ने बताया कि यह आयोजन अनुसंधान–विस्तार–किसान संबंधों को मजबूत कर जमीनी स्तर पर नवाचारों के तीव्र प्रसार में अहम भूमिका निभा रहा है।

फसल विविधीकरण: टिकाऊ और पोषक कृषि की ओर

फसल विविधीकरण एवं संरक्षण सत्र की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव ने की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक फसल प्रणालियों में विविधीकरण कर टिकाऊ, पोषक एवं जलवायु-सहिष्णु फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों ने जलवायु-लचीली किस्मों, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार, जैव-संपोषित (बायोफोर्टिफाइड) किस्मों तथा समेकित कृषि प्रणाली (IFS) मॉडल को अपनाने पर जोर दिया। बदलती जलवायु परिस्थितियों में उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए न्यूनतम एवं विवेकपूर्ण कीटनाशक उपयोग तथा मूल्य संवर्धन को प्रमुख उपाय बताया गया।

डिजिटल कृषि: AI और GIS से सशक्त होगा किसान

डिजिटल कृषि सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), रिमोट सेंसिंग और प्रिसिजन फार्मिंग पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने डिजिटल परामर्श प्रणालियों, आईसीटी-सक्षम जलवायु-स्मार्ट कृषि तथा कार्बन बाजारों और डिजिटल मार्केटप्लेस की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

अध्यक्ष मंडल ने डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करने, डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली को बढ़ावा देने तथा किसानों और विस्तार कर्मियों के डिजिटल क्षमता निर्माण पर बल दिया। अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स और निजी प्लेटफॉर्म्स के बीच समन्वय को तेज करने की आवश्यकता बताई गई।

एफपीओ–स्टार्टअप समन्वय: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति

एफपीओ–स्टार्टअप सत्र में सफल सहयोग मॉडल प्रस्तुत किए गए। चर्चा का केंद्र मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, बाजार एवं ऋण तक पहुंच, प्रबंधकीय क्षमता विकास और ग्रामीण व्यवसाय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना रहा।

विशेषज्ञों ने कहा कि एफपीओ और स्टार्टअप्स के बीच रणनीतिक अभिसरण से नवाचारों का विस्तार, बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि, किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में प्रगति तथा ग्रामीण रोजगार सृजन संभव है।

प्रदर्शनी में दिखी आधुनिक तकनीक की झलक

मेले के प्रदर्शनी क्षेत्र में उन्नत कृषि मशीनरी, जलवायु-सहिष्णु फसल किस्में, संरक्षित खेती की तकनीकें, डिजिटल नवाचार, एग्री-ड्रोन, स्मार्ट सिंचाई समाधान और मूल्य संवर्धित उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। किसानों ने लाइव प्रदर्शनों में भाग लेकर खेत-स्तरीय समस्याओं के समाधान प्राप्त किए।

कृषि विपणन और निर्यात: ग्लोबल बाजार में प्रतिस्पर्धा की तैयारी

कृषि विपणन एवं निर्यात सत्र में बाजार सूचना तंत्र को सुदृढ़ करने, निर्यातोन्मुख उत्पादन, गुणवत्ता मानकों के अनुपालन, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन और प्रभावी निर्यात सुगमता तंत्र विकसित करने को किसानों की आय वृद्धि का प्रमुख आधार माना गया।

पूसा कृषि विज्ञान मेला–2026 आधुनिक कृषि पद्धतियों, नीति संवाद और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से “विकसित कृषि – आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।