पांच राज्यों के किसानों ने पूसा में देखे हाई-टेक आम
पूसा में आम फील्ड डे का भव्य आयोजन: किसानों को दी गई उन्नत किस्मों की विस्तृत जानकारी, नवाचार और निर्यात पर रहा खास जोर
नई दिल्ली—आईसीएआर–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा, नई दिल्ली ने आज अपने फल एवं बागवानी प्रौद्योगिकी प्रभाग के एमबी7 फील्ड में “पूसा आम फील्ड डे 2025” का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों—पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से आए किसानों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और छात्रों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
➤ किसानों के लिए उन्नत किस्मों की झलक और प्रशिक्षण
यह आयोजन आईएआरआई के आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य संस्थान द्वारा विकसित आम की उन्नत और व्यावसायिक किस्मों को जन-जन तक पहुँचाना है। कार्यक्रम के दौरान न केवल किस्मों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन हुआ, बल्कि किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, पौध प्रबंधन, रोग नियंत्रण, बाजार से जुड़ाव और निर्यात की संभावनाओं पर भी विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया।
➤ निदेशक डॉ. सी.एस. राव का प्रेरणादायक संबोधन
संस्थान के निदेशक एवं कुलपति डॉ. चिन्नाबाबू श्रीनिवास राव ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आम की खेती को वैज्ञानिक विधियों, उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों और बेहतर वितरण प्रणाली से जोड़ा जाए तो यह किसानों के लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है। उन्होंने कहा कि पूसा आम किस्में न केवल उपज में श्रेष्ठ हैं, बल्कि इनका स्वाद, रंग, आकार और भंडारण क्षमता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की है।
डॉ. राव ने किसानों से संवाद करते हुए सुझाव दिया कि संस्थान एक “डेडिकेटेड कोरियर नेटवर्क” के माध्यम से उपभोक्ताओं तक सीधे आम पहुँचाने की व्यवस्था की संभावना तलाशेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को अधिक लाभ मिलेगा।
➤ समन्वय से टिकाऊ उत्पादन की दिशा में कदम
संस्थान के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. विश्वनाथन चिनुसामी ने बताया कि यह कार्यक्रम सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित कर आम की पौध सामग्री की गुणवत्ता और उपलब्धता को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ खेती और प्रतिस्पर्धात्मक उत्पादन के लिए गुणवत्ता सबसे अहम है।
➤ प्रभाग की उपलब्धियाँ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
फल एवं बागवानी प्रौद्योगिकी प्रभाग के प्रमुख डॉ. ओ.पी. अवस्थी ने किसानों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए प्रभाग द्वारा अब तक किए गए शोध कार्यों, किस्मों के विकास और उनके प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूसा संस्थान ने उच्च घनत्व वाली बागवानी के लिए उपयुक्त कई आम किस्में विकसित की हैं, जो कम समय में अधिक उत्पादन देती हैं और जलवायु बदलाव का भी सामना कर सकती हैं।
➤ आम की उन्नत किस्मों से किसानों का परिचय
कार्यक्रम के प्रमुख वैज्ञानिक एवं आउटरीच प्रोजेक्ट प्रभारी डॉ. जय प्रकाश ने किसानों को संस्थान द्वारा विकसित प्रमुख आम किस्मों जैसे—
अमरपाली, मल्लिका, पूसा अरुणिमा, पूसा प्रतिभा, पूसा सूर्य, पूसा पीतांबर और पूसा लालिमा—की विशेषताओं से अवगत कराया।
—की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये किस्में कम समय में फल देने, रोग प्रतिरोधक क्षमता, बेहतर भंडारण और अधिक स्वाद जैसी विशेषताएं रखती हैं, जिससे बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
➤ किसानों की रुचि, सुझाव और भविष्य की योजनाएं
आम उत्पादक किसानों ने पूसा किस्मों में गहरी रुचि दिखाई और इन किस्मों को अपने खेतों में अपनाने की इच्छा जताई। कई किसानों ने पौध उत्पादन की प्रक्रिया, ब्रांडिंग, सीधे बिक्री और वितरण मॉडल पर सुझाव भी दिए।
डॉ. राव ने बताया कि किसानों के इन सुझावों को संज्ञान में लेते हुए संस्थान नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड और एपीडा (APEDA) के सहयोग से निर्यात की संभावनाएं तलाशेगा, ताकि पूसा आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान दी जा सके।
➤ डिजिटल पहल और तकनीकी बुलेटिन की घोषणा
कार्यक्रम के अंत में डॉ. राव ने यह भी घोषणा की कि आईएआरआई शीघ्र ही “तकनीकी बुलेटिन” जारी करेगा, जिसमें आम की खेती, नवाचार, प्रबंधन और विपणन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारियाँ शामिल होंगी। साथ ही, किसानों की सफलता की कहानियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया जाएगा, ताकि अन्य किसान भी उनसे प्रेरणा ले सकें।
➤ अगले आयोजन की घोषणा
इस आयोजन की सफलता को देखते हुए डॉ. राव ने यह भी बताया कि “राष्ट्रीय आम दिवस” का अगला भव्य आयोजन जून 2026 में किया जाएगा, जिसमें विशेष रूप से विपणन, मूल्य संवर्धन और निर्यात केंद्रित गतिविधियों पर जोर दिया जाएगा।