मत्स्य विभाग की पहल से रोजगार और उत्पादन को बढ़ावा!

मत्स्य पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम से 22,921 हितधारक लाभान्वित, मत्स्य पालन और जलीय कृषि में क्षमता निर्माण को गति!

मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण को सशक्त बनाने की दिशा में भारत सरकार का मत्स्य विभाग निरंतर प्रभावी कदम उठा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत सुनियोजित एवं संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में मछुआरों, मछली पालकों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। बीते छह महीनों में आयोजित 499 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कुल 22,921 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है।

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पीएमएमएसवाई के तहत कौशल विकास पर विशेष जोर

पीएमएमएसवाई का उद्देश्य मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला का आधुनिकीकरण, उत्पादकता में वृद्धि, कटाई उपरांत होने वाले नुकसान को कम करना तथा मानव संसाधन और संस्थागत क्षमता का विकास करना है। इसी क्रम में कौशल विकास और क्षमता निर्माण को योजना का प्रमुख स्तंभ बनाया गया है, ताकि विपणन संबंधों को मजबूत किया जा सके और मछली उत्पादन को लाभकारी बनाया जा सके।

प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कैलेंडर जारी

मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि क्षेत्र में पीएमएमएसवाई के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप कार्य करने के लिए केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस (10 जुलाई 2025) के अवसर पर ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित आईसीएआर–केंद्रीय मीठा जल जीवपालन अनुसंधान संस्थान (सीआईएफए) में आईसीएआर के मत्स्य संस्थानों एवं उनके क्षेत्रीय केंद्रों का प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम कैलेंडर (2025–2027) जारी किया।
यह कैलेंडर प्रशिक्षण सत्रों, अनुभवात्मक भ्रमण और ज्ञान-साझाकरण पहलों के साथ एक व्यवस्थित कार्ययोजना प्रस्तुत करता है।

व्यापक पाठ्यक्रम, आधुनिक तकनीकों पर फोकस

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य मछुआरों और मछली पालकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना, वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार संचालन सुनिश्चित करना है। प्रशिक्षण में पूर्व-उत्पादन, उत्पादन और पश्चात-उत्पादन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।

प्रमुख विषयों में—

  • मछली बीज उत्पादन एवं प्रबंधन

  • उन्नत मत्स्य पालन तकनीकें

  • एकीकृत एवं मिश्रित मछली पालन

  • मछली स्वास्थ्य प्रबंधन एवं चारा निर्माण

  • समुद्री शैवाल की खेती

  • मूल्यवर्धित मछली प्रसंस्करण

इसके साथ ही रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक, पिंजरा संस्कृति और सजावटी मछली प्रजनन जैसी आधुनिक प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे मछली पालक अपने व्यवसाय में विविधता और विस्तार कर सकें।

आजीविका एवं रोजगार केंद्रित प्रशिक्षण

कार्यक्रम में महिलाओं को लक्षित मूल्यवर्धित मत्स्य उत्पाद, सजावटी मत्स्य पालन, मछली विपणन, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, ट्रेसबिलिटी और प्रमाणन जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण शामिल है। अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित अनुभवात्मक भ्रमणों से किसानों को उन्नत तकनीकों को प्रत्यक्ष देखने और व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। इसके अलावा मछली उत्सवों और मेलों के माध्यम से घरेलू स्तर पर मछली एवं झींगा उपभोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अल्पकालिक से दीर्घकालिक प्रशिक्षण तक की व्यवस्था

इन पहलों के अंतर्गत अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, कार्यशालाएं, सम्मेलन, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (टीओटी) और अनुभवात्मक भ्रमण आयोजित किए गए, ताकि हितधारकों को उनकी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान एवं कौशल प्रदान किया जा सके।

बजट प्रावधान और कार्यान्वयन

भारत सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), हैदराबाद के माध्यम से 2.93 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। पीएमएमएसवाई और पीएम-एमकेएसवाई के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए एनएफडीबी को नोडल कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया है। मछुआरों और मछली पालकों के प्रशिक्षण से संबंधित सभी व्यय मत्स्य विभाग द्वारा वहन किए जा रहे हैं।

देशभर के संस्थानों की सक्रिय भागीदारी

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्य विभागों, आईसीएआर के मत्स्य अनुसंधान संस्थानों और उनके क्षेत्रीय केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), भारतीय कृषि कौशल परिषद (एएससीआई), सीआईएफनेट तथा एनआईएफपीएचएटी द्वारा किया गया।

प्रमुख संस्थानों द्वारा आयोजित प्रशिक्षणों से हजारों प्रतिभागियों को लाभ मिला, जिनमें आईसीएआर–सीआईएफई (मुंबई), सीआईएफए (भुवनेश्वर), सीआईबीए (चेन्नई), सीआईएफटी (कोच्चि), सीआईएफआरआई (कोलकाता), सीएमएफआरआई (कोच्चि), एनबीएफजीआर (लखनऊ) सहित कई संस्थान शामिल हैं।

भविष्य की संभावनाएं

मत्स्य विभाग के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल न केवल मछुआरों और मछली पालकों को सशक्त बना रही है, बल्कि मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार कर रही है। यह प्रयास रोजगार सृजन, खाद्य सुरक्षा, पोषण संवर्धन और देश के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है।