खेत बचाओ अभियान: AI ऐप और मृदा परीक्षण से स्मार्ट होगी खेती!

किसानों को मिला AI तकनीक का साथ, RAISE ऐप से धान फसल प्रबंधन की जानकारी, 150 किसानों ने लिया प्रशिक्षण!

An awareness programme on Kheti Bachao Abhiyan and the RAISE–IIRR Mobile App was organized on 17 June 2026 at Pudur Village in Vikarabad District by ICAR–Indian Institute of Rice Research (IIRR), Hyderabad, in collaboration with the Department of Agriculture. The programme focused on promoting sustainable agriculture, soil health management, balanced fertilizer use, and digital farming technologies.

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MLA Dr. T. Ram Mohan Reddy highlighted the importance of soil-test-based fertilizer application and the use of agricultural mobile applications. Scientists demonstrated the AI-powered RAISE App for diagnosing rice crop stresses, explained major rice crop management practices, showcased soil testing technologies, and created awareness about biofortified rice varieties. Farmers were also informed about government agricultural schemes and digital fertilizer management tools.

The event witnessed active participation from agricultural officials, local representatives, and stakeholders. A total of 150 farmers, including 15 women farmers, attended the programme and gained valuable insights into modern, technology-driven, and sustainable farming practices.

विकाराबाद (तेलंगाना), – किसानों को टिकाऊ खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और डिजिटल कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से विकाराबाद जिले के पुडूर गांव में “खेत बचाओ अभियान” एवं RAISE–IIRR मोबाइल ऐप जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आईसीएआर-भारतीय धान अनुसंधान संस्थान (IIRR), हैदराबाद द्वारा कृषि विभाग के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम में परगी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. टी. राम मोहन रेड्डी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत और घटती मिट्टी की उर्वरता की चुनौतियों से निपटने के लिए मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि संबंधी मोबाइल एप्लिकेशन के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऐप से मिलेगी फसल प्रबंधन सलाह

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक डॉ. बी. सैलजा ने किसानों को एआई आधारित RAISE ऐप का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि यह ऐप धान की फसलों में रोग, कीट और पोषण संबंधी समस्याओं की पहचान कर किसानों को त्वरित प्रबंधन सलाह प्रदान करता है।

वहीं, डॉ. डी. कृष्णावेणी ने धान की फसल में आने वाली प्रमुख समस्याओं और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन उपायों की विस्तृत जानकारी दी।

मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर विशेष जोर

Photo:Courtesy iirr

वैज्ञानिक डॉ. ब्रजेंद्र ने स्वस्थ मिट्टी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को सॉयल टेस्टिंग किट तथा NAPSRI ऐप के उपयोग का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि नियमित मृदा परीक्षण से उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव होता है, जिससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है।

जैव-संपोषित धान किस्मों और सरकारी योजनाओं की जानकारी

वैज्ञानिक डॉ. पापाराव ने किसानों को पोषण सुरक्षा बढ़ाने वाली जैव-संपोषित (बायोफोर्टिफाइड) धान किस्मों के बारे में जागरूक किया। जिला कृषि अधिकारी टी. राजारत्नम ने किसानों को विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं तथा उर्वरक प्रबंधन से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म और फर्टिलाइजर ऐप की जानकारी दी।

किसानों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

कार्यक्रम में मंडल कृषि अधिकारी लावण्या, एटीएमए अध्यक्ष श्रीनिवास रेड्डी, एमपीडीओ पांडु, तहसीलदार विजय कुमार, सरपंच खिजर पाशा तथा उप-सरपंच रामदास सहित कई जनप्रतिनिधि एवं कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर कुल 150 किसानों ने सक्रिय भागीदारी की, जिनमें 135 पुरुष और 15 महिला किसान शामिल थीं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में पी. रघुनाथ रेड्डी और मुरलीधर रेड्डी का विशेष सहयोग रहा।

कृषि विशेषज्ञों का संदेश

विशेषज्ञों ने कहा कि मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैव-संपोषित किस्मों का चयन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि ऐप्स का प्रयोग किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि विकास को भी मजबूती प्रदान करेगा। “खेत बचाओ अभियान” जैसे कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

Photo:Courtesy iirr