प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने के लिए नीति आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला

नीति आयोग की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में प्राकृतिक खेती पर मंथन राज्य सहायता मिशन के तहत प्रशिक्षण नियमावली का विमोचन, 770 प्रतिभागियों ने लिया भाग !!

नई दिल्ली। नीति आयोग ने अपने राज्य सहायता मिशन (SSM) के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में देशभर से किसान, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, स्टार्टअप प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और नागरिक समाज के सदस्यों ने भाग लेकर प्राकृतिक कृषि के भविष्य पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

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हिंदी-अंग्रेजी प्रशिक्षण नियमावली का शुभारंभ !!

कार्यशाला के दौरान प्राकृतिक खेती पर हिंदी और अंग्रेजी में प्रशिक्षण नियमावली का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इसका उद्देश्य किसानों, कृषि विस्तार अधिकारियों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को क्षेत्र-विशिष्ट एवं व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराना है, ताकि प्राकृतिक खेती पद्धतियों को प्रभावी ढंग से अपनाया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार यह नियमावली प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, लागत में कमी और टिकाऊ उत्पादन प्रणाली विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत का संबोधन !!

आचार्य देवव्रत, जो गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं, ने वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती टिकाऊ और किसान-केंद्रित कृषि प्रणाली का आधार है। उन्होंने मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, रासायनिक इनपुट लागत में कमी और किसानों की आय वृद्धि में प्राकृतिक खेती की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए राज्यों से इस दिशा में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया।

प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों की सहभागिता !!

कार्यक्रम में देश के अग्रणी कृषि एवं शोध संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें प्रमुख रूप से—
जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय
डॉ. वाईएस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय
गुजरात प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय
इन संस्थानों के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों, अनुसंधान परिणामों और क्षेत्रीय अनुभवों को साझा किया।

विभिन्न राज्यों के किसानों और केवीके वैज्ञानिकों की भागीदारी !!

पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और ओडिशा के किसानों, कृषि अधिकारियों तथा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के विस्तार, चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

केंद्रीय मंत्रालयों और संस्थानों की सहभागिता !!

कार्यशाला में कई केंद्रीय संस्थानों और मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया, जिनमें—
एपीडा
• नाबार्ड
• सहकारिता मंत्रालय
• पशुपालन और डेयरी विभाग
• पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
• कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान
इन प्रतिनिधियों ने अभिसरण (Convergence), प्रमाणीकरण, बाजार संपर्क और संस्थागत समर्थन को सुदृढ़ करने पर अपने विचार साझा किए।

स्टार्टअप और एफपीओ की भूमिका पर जोर !!

कार्यशाला में कृषि क्षेत्र के स्टार्टअप, अग्रणी किसान और किसान उत्पादक समूहों ने देश में प्राकृतिक खेती को समर्थन देने वाले उभरते इको-सिस्टम पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक, प्रसंस्करण और बाजार जोड़ने की रणनीतियों के माध्यम से प्राकृतिक उत्पादों की मांग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया जा सकता है।

पहले दिन खुली चर्चा में 770 प्रतिभागी !!

कार्यशाला के पहले दिन आयोजित खुली चर्चा सत्र में कुल 770 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों और विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती को अपनाने, प्रमाणीकरण प्रक्रिया, बाजार पहुंच और संस्थागत समर्थन से जुड़ी जमीनी चुनौतियों एवं आशंकाओं पर खुलकर चर्चा की। चर्चा में किसान-नेतृत्व वाले मॉडल को बढ़ावा देने पर व्यापक सहमति बनी।

दूसरे दिन खेत स्तर पर प्रदर्शन !!

दूसरे दिन प्रतिभागियों को जमीनी स्तर पर प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विभिन्न फसलों के लिए प्राकृतिक खेती तकनीकों, जैव-उपकरणों की तैयारी तथा स्वचालित प्रणालियों के उपयोग का प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के व्यावहारिक प्रदर्शन से किसानों का विश्वास बढ़ेगा और प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद मिलेगी।

साऱांश !!

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला प्राकृतिक खेती को नीति, शोध और जमीनी क्रियान्वयन के स्तर पर एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। राज्य और केंद्र सरकारों, कृषि विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और किसानों के साझा प्रयास से देश में टिकाऊ कृषि मॉडल को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

चित्र: प्रतीकात्मक