बिहार में कृषि विकास को गति देने की अहम पहल
पटना..-बिहार के कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों और शोध आधारित नवाचारों से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं विभिन्न केन्द्रों द्वारा किसानों के हित में किए गए अनुसंधान कार्यों पर आधारित एक व्यापक प्रस्तुतीकरण एवं परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कृषिविकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा हुई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की सक्रिय भागीदारी!
कार्यक्रम में बिहार के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं तकनीकी केन्द्रों द्वारा किए गए अनुसंधानों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। इनमें उन्नत बीज प्रौद्योगिकी, फसल विविधीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जल संरक्षण, प्राकृतिक एवं जैविक खेती जैसे विषय प्रमुख रहे। इन शोधों का उद्देश्य किसानों को नवीन तकनीकों से जोड़कर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।
वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति!
इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, निदेशक कृषि सौरभ सुमन यादव सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कृषि अनुसंधान को किसानों के जीवन स्तर में सुधार का सशक्त माध्यम बताया और शोध संस्थानों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
नवीन कृषि तकनीकों पर गहन विमर्श !!
परिचर्चा सत्र के दौरान आधुनिक कृषि तकनीकों, अनुसंधान निष्कर्षों और नवाचारों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने वाली तकनीकें, कम लागत में अधिक उत्पादन, स्मार्ट एग्रीकल्चर तथा डिजिटल कृषि सेवाओं को किसानों तक पहुँचाने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया।
किसानों तक प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर !!
कार्यक्रम में यह भी चर्चा की गई कि अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों का लाभ सीधे किसानों तक कैसे पहुँचाया जाए। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, फील्ड डेमोंस्ट्रेशन, किसान जागरूकता अभियान और विस्तार सेवाओं को और मजबूत करने पर सहमति बनी, ताकि शोध और खेत के बीच की दूरी कम हो सके।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास !!
अधिकारियों ने कहा कि शोध आधारित कृषि तकनीकों के सफल क्रियान्वयन से न केवल उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय में भी स्थायी बढ़ोतरी संभव होगी। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित कर बिहार के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए।
अनुसंधान और कृषि विकास के बीच सेतु बनने का प्रयास !!
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ किया गया कि कृषि अनुसंधान, नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इससे बिहार में कृषि विकास को नई गति मिलेगी और राज्य के किसान आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी खेती की ओर अग्रसर होंगे।