मौसम की मार के बावजूद इस बार गेहूं पैदावार स्थिर रही!

जलवायु चुनौतियों के बीच किसानों के अनुकूलन उपाय बने सहारा, बढ़े रकबे और बेहतर किस्मों से उत्पादन रहेगा स्थिर

नई दिल्ली।  -देश में वर्ष 2025-26 के लिए गेहूं पैदावार को लेकर सामने आ रही मिश्रित रिपोर्टों के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस बार का गेहूं सीजन “मिश्रित लेकिन सुदृढ़” रहा है। जहां एक ओर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने फसल को प्रभावित किया, वहीं दूसरी ओर किसानों द्वारा अपनाई गई उन्नत तकनीकों और समय पर बुवाई ने उत्पादन को मजबूत बनाए रखा है।

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कृषि क्षेत्र के आधिकारिक आकलनों के अनुसार, इस वर्ष लगभग 33.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। सबसे अहम बात यह रही कि पूरे सीजन में फसल पर कीट और बीमारियों का कोई बड़ा प्रकोप नहीं देखा गया, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

🌡️ फरवरी की गर्मी बनी चुनौती

हालांकि, फसल कटाई से ठीक पहले फरवरी महीने में अचानक बढ़े तापमान ने गेहूं की फसल को झटका दिया। इस असामान्य गर्मी के कारण दाने भरने की अवधि कम हो गई, जिससे कुछ इलाकों में उपज प्रभावित हुई।
इसके अलावा, कुछ राज्यों में असमय बारिश और ओलावृष्टि ने भी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को स्थानीय स्तर पर नुकसान पहुंचाया।

🌾 किसानों की रणनीति ने संभाली स्थिति

विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों द्वारा अपनाए गए कई सुधारात्मक कदमों ने इन नुकसान की भरपाई में अहम भूमिका निभाई:

  • समय से पहले और सही समय पर बुवाई में वृद्धि
  • उच्च उपज और जलवायु-लचीली किस्मों का तेजी से अपनाव
  • खरपतवार और रोगों का न्यूनतम प्रभाव
  • अतिरिक्त 0.6 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई

इन सभी कारकों ने मिलकर उत्पादन को संतुलित बनाए रखा है।

📊 राज्यों से मिल रहे सकारात्मक संकेत

खरीद और मंडी आवक के आंकड़े भी बेहतर उत्पादन की ओर इशारा कर रहे हैं:

  • हरियाणा में गेहूं की आवक ने 75 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को पार किया, जिसमें से 56.13 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है — जो पिछले साल से करीब 9 लाख टन अधिक है।
  • मध्य प्रदेश ने बढ़ते उत्पादन अनुमान के चलते अपना खरीद लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है।
  • महाराष्ट्र में उत्पादन 22.90 लाख टन रहने का अनुमान है, जहां मराठवाड़ा और विदर्भ से स्थिर आवक देखी जा रही है।

📌 उत्पादन रहेगा स्थिर

सरकारी आकलन के मुताबिक, भले ही कुछ क्षेत्रों में मौसम की मार पड़ी हो, लेकिन बढ़ा हुआ रकबा, बेहतर तकनीक और उन्नत किस्मों के चलते कुल गेहूं उत्पादन 2024-25 के स्तर के आसपास स्थिर रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश की खाद्य सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है और किसानों की अनुकूलन क्षमता का मजबूत उदाहरण भी।

वीडियों