गन्ना पर्ची डिग्रेड पर रोक, किसान की सहमति अनिवार्य!

लखनऊ: गन्ना पर्ची डिग्रेड पर सख्ती, किसान की लिखित सहमति के बिना नहीं होगी गन्ना तौल!

लखनऊ –प्रदेश में गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। उत्तर प्रदेश गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी किसान की लिखित सहमति के बिना गन्ना आपूर्ति पर्ची में दर्ज प्रजाति को डिग्रेड कर गन्ना तौल नहीं किया जाएगा

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क्या है मामला?

विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ चीनी मिलें किसानों को जारी गन्ना आपूर्ति पर्ची पर अंकित प्रजाति को डिग्रेड (निम्न श्रेणी में परिवर्तित) कर गन्ना खरीद रही थीं। इस संबंध में किसानों द्वारा विभागीय टोल फ्री हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कड़ी कार्रवाई

गन्ना आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि:

  • किसान की बिना लिखित सहमति पर्ची डिग्रेड कर तौल करना अनुचित और नियम विरुद्ध है।

  • ऐसी स्थिति में संबंधित चीनी मिलों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • जिला एवं परिक्षेत्रीय अधिकारियों को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

मिलें गन्ना वापस नहीं करेंगी

विभाग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि:

  • किसान द्वारा आपूर्ति हेतु लाया गया डिग्रेड वैरायटी का गन्ना मिलें वापस न करें।

  • किसान को पूर्ण जानकारी देकर, लिखित सहमति प्राप्त करने के बाद ही तौल की प्रक्रिया पूरी की जाए।

किसानों के हित में जागरूकता अभियान

भविष्य में ऐसी समस्या न उत्पन्न हो, इसके लिए गन्ना कृषकों को उन्नत एवं उपयुक्त प्रजातियों के चयन और प्रजाति परिवर्तन के प्रति जागरूक एवं प्रेरित किया जाएगा। इससे उत्पादन गुणवत्ता में सुधार और भुगतान विवादों में कमी आएगी।

शिकायत कैसे दर्ज करें?

यदि गन्ना आपूर्ति के दौरान प्रजाति डिग्रेड से संबंधित कोई समस्या आती है, तो किसान विभाग की टोल फ्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
📞 1800 121 3203

विभाग ने आश्वस्त किया है कि प्रत्येक शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच की जाएगी।

📌 प्रमुख बिंदु

  • किसान की लिखित सहमति के बिना पर्ची डिग्रेड नहीं

  • नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

  • मिलें गन्ना वापस नहीं करेंगी

  • हेल्पलाइन पर शिकायत की सुविधा

  • प्रजाति परिवर्तन के लिए जागरूकता अभियान

यह निर्णय गन्ना किसानों के अधिकारों की सुरक्षा और पारदर्शी खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।