“मत्स्यिकी में उड़ान भरता ड्रोन!”
🚁 मत्स्यिकी में ड्रोन तकनीक का विस्तार: ICAR ने शुरू किया अनुसंधान, PMMSY के तहत प्रोटोटाइप ड्रोन विकसित
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्यरत मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थानों ने देश में ड्रोन तकनीक
नई दिल्ली, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्यरत मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थानों ने देश में ड्रोन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इन संस्थानों ने ड्रोन आधारित अनुसंधान कार्यक्रमों की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों की निगरानी, स्वास्थ्य आकलन, बायोमास मूल्यांकन, और संवर्धन प्रणालियों में दवाओं व फ़ीड के वितरण जैसे क्षेत्रों में इसका प्रयोग करना है।
खुले जल निकायों व दुर्गम क्षेत्रों से जल के नमूने एकत्र करने, मछलियों की निगरानी और सटीक मत्स्यन जैसी जलीय कृषि से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने हेतु यह पहल की गई है।
70 किलोग्राम पेलोड क्षमता वाला ड्रोन प्रोटोटाइप
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत, ICAR-केंद्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (CIFRI) द्वारा ऐसा प्रोटोटाइप ड्रोन विकसित किया जा रहा है जो 70 किलोग्राम तक वज़न ढोने में सक्षम होगा। इसका उपयोग उत्पादन केंद्रों से बाज़ार तक मछली और झींगा के परिवहन में किया जाएगा।
तकनीकी समिति का गठन
मत्स्यपालन विभाग ने मात्स्यिकी और जलीय कृषि में ड्रोन तकनीक के मानकीकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने हेतु एक तकनीकी समिति का गठन किया है।
स्टार्टअप्स व नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा
PMMSY की केंद्रीय क्षेत्र योजना घटक के अंतर्गत नवाचार, स्टार्टअप, इनक्यूबेशन और पायलट परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें जलीय कृषि में ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन और उसे अपनाने हेतु वित्तीय सहायता दी जा रही है।
ड्रोन आधारित निगरानी, पर्यावरणीय मूल्यांकन, रोग अनुसंधान, श्रिम्प फार्म में ऑटोमेटेड फीडिंग, और सटीक मत्स्यन जैसी गतिविधियाँ इस क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलाव का संकेत देती हैं।
यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने 23 जुलाई 2025 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।