November 2, 2026 2:33 AM

Krishi Times

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मध्यप्रदेश में बालाघाट का जलवा, धान खरीदी में बना नंबर वन जिला!

बालाघाट के किसानों ने खेती-किसानी में कायम की नई पहचान, 60 लाख क्विंटल धान उपार्जन के साथ प्रदेश में अव्वल!

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बलराम कृषि महोत्सव में किसानों से किया संवाद, प्राकृतिक खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन अपनाने का किया आह्वान

बालाघाट में दुग्ध संग्रहण 3,500 लीटर से बढ़कर 10 हजार लीटर प्रतिदिन पहुंचा, 50 हजार लीटर तक ले जाने का लक्ष्य

भोपाल, 1 नवंबर 2026। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले ने धान उत्पादन और कृषि गतिविधियों के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस वर्ष जिले में 60 लाख क्विंटल धान का उपार्जन किया गया, जिसके साथ बालाघाट पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। धान की पारंपरिक खेती के साथ कोदो सहित अन्य श्रीअन्न, मत्स्य पालन, पशुपालन और उद्यानिकी में किसानों की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नए अवसर दे रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से बालाघाट की कृषि उपज मंडी, गोंगलई में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने जिले के प्रगतिशील किसानों से संवाद कर उनके कृषि नवाचारों, उत्पादन और आय के स्रोतों की जानकारी ली। साथ ही कृषि योजनाओं के विजेताओं को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट को मध्यप्रदेश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां का प्रसिद्ध चिन्नौर चावल अपनी खुशबू और गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। जिले के किसानों ने धान के साथ कोदो और अन्य मोटे अनाज के उत्पादन में भी उल्लेखनीय कार्य किया है।

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद विकास को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट जिले को नक्सलवाद से मुक्ति मिलने के बाद विकास की गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ कृषि, पशुपालन और ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने जिले की खनिज संपदा का उल्लेख करते हुए बताया कि देश के कुल मैंगनीज उत्पादन में बालाघाट का महत्वपूर्ण योगदान है। मलाजखंड क्षेत्र में तांबे के विशाल भंडार भी मौजूद हैं। कृषि और खनिज संसाधनों के साथ स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना जिले की आर्थिक संभावनाओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

किसान कल्याण वर्ष में प्राकृतिक खेती पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इसके तहत किसानों को प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीक और कृषि आधारित अन्य व्यवसायों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने किसानों से रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान देने की अपील की। मुख्यमंत्री के अनुसार खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए उत्पादन के साथ लागत प्रबंधन भी जरूरी है।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने बताया कि बालाघाट के कुछ किसानों का पंजीयन छूट जाने के कारण पोर्टल 4 नवंबर तक फिर से खोल दिया गया है। ऐसे किसान निर्धारित समयसीमा में अपना पंजीयन करा सकते हैं।

दुग्ध संग्रहण बढ़ाने के लिए 36 समितियां होंगी पुनः शुरू

बालाघाट में कृषि के साथ डेयरी क्षेत्र को भी विस्तार देने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में बंद हो चुकी 36 दुग्ध समितियों को दोबारा शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही नए मिल्क रूट विकसित किए जा रहे हैं, ताकि दूरस्थ और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के पशुपालकों को भी दूध संग्रहण व्यवस्था से जोड़ा जा सके।

जिले में प्रतिदिन दुग्ध संग्रहण 3,500 लीटर से बढ़कर 10,000 लीटर तक पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन करना है।

यह पहल पशुपालकों को नियमित बाजार उपलब्ध कराने, दूध की बिक्री व्यवस्था मजबूत करने और ग्रामीण परिवारों की आय में विविधता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। मुख्यमंत्री ने पशुपालकों के बीच दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए आयोजित प्रतियोगिताओं का भी उल्लेख किया।

मत्स्य पालन से हजारों परिवारों को मिल रहे नए अवसर

बालाघाट को मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले के लगभग 15 हजार मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं और उन्हें 9 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया गया है।

धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत खराड़ी जलाशय में 94 केज कल्चर स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से 282 मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया गया है। इससे जलाशय आधारित मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी विकसित हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के 1 लाख 29 हजार से अधिक किसानों को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों के लिए 876 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया गया है। वहीं, 3 लाख 76 हजार से अधिक किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय पशुपालन, मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन और उद्यानिकी को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बनाएं। इससे मौसम और बाजार के जोखिम को कम करने तथा सालभर आय के अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।

निजी भूमि पर वृक्षारोपण से भी बढ़ सकती है किसानों की आमदनी

मुख्यमंत्री ने किसानों को कृषि वानिकी की संभावनाओं से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि किसान अपनी निजी भूमि पर बांस, सागौन और अन्य इमारती प्रजातियों के पौधे लगाकर भविष्य में अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

कृषि के साथ वृक्षारोपण अपनाने से खेतों का बेहतर उपयोग, हरित क्षेत्र में वृद्धि और लंबे समय में अतिरिक्त आर्थिक लाभ की संभावनाएं बन सकती हैं। इसके लिए किसानों को पौधों के चयन, बाजार और उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहन की जानकारी लेकर योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की जरूरत है।

ग्रामीणों को आबादी भूमि का मिलेगा वैध मालिकाना हक

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर लोगों को स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके लिए प्रदेश सरकार 10 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

उन्होंने कहा कि भूमि के वैध दस्तावेज उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवारों को बैंक से ऋण लेने और संपत्ति संबंधी अन्य कार्यों में सुविधा मिलेगी। साथ ही भूमि को कानूनी रूप से उत्तराधिकारियों के नाम हस्तांतरित करने में भी मदद मिलेगी।

प्रगतिशील किसानों ने साझा किए खेती और स्वरोजगार के अनुभव

बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने बालाघाट के अलग-अलग गांवों के किसानों से सीधे संवाद किया। इस दौरान किसानों ने कृषि के साथ अपनाए जा रहे नए व्यवसायों और नवाचारों की जानकारी दी।

ग्राम पांडेवाड़ा के किसान वेदराम राहंगडाले ने बताया कि वे मत्स्य पालन के माध्यम से करीब 30 लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। लांजी तहसील के ग्राम अमेड़ा के किसान मुकेश नेवारे धान की खेती के साथ सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी कर रहे हैं। उन्होंने मशरूम उत्पादन भी शुरू किया है।

ग्राम कोहकाडीबर की मंजू नगपुरे ने बताया कि वे आत्मा परियोजना और आजीविका मिशन से जुड़कर ड्रोन दीदी के रूप में काम कर रही हैं। इस गतिविधि से उन्हें लगभग 1.25 लाख रुपये की आय हो रही है।

ग्राम बगड़मारा के किसान जियालाल राहंगडाले ने प्राकृतिक खेती के अपने अनुभव साझा किए। वहीं, ग्राम गुदमा के किसान गुलाब चौधरी ने बताया कि वे 30 एकड़ भूमि में गेहूं की खेती करते हैं और इससे 425 क्विंटल उत्पादन प्राप्त करते हैं।

किसानों के ये अनुभव बताते हैं कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीक, विविधीकरण और सामूहिक प्रयासों के जरिए ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अतिरिक्त अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

कृषि योजनाओं की क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार

कार्यक्रम के दौरान कृषि योजनाओं पर आधारित क्विज प्रतियोगिता में लॉटरी के माध्यम से चयनित विजेताओं से भी मुख्यमंत्री ने संवाद किया।

प्रतियोगिता में ग्राम कुम्हारी, तहसील लामता की दिवला पटले को ट्रैक्टर, ग्राम एकोड़ी, तहसील वारासिवनी के मनोज हरिनखेड़े को बुलेट बाइक और ग्राम सिकंदरा की कविता शिव को ई-स्कूटी पुरस्कार के रूप में दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम में बालाघाट-सिवनी की सांसद भारती पारधी, विधायक गौरव सिंह पारधी, अपेक्स बैंक अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य मौसम बिसेन, नगर पालिका अध्यक्ष भारती सुरजीत सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

कृषि क्षेत्र के लिए व्यापक संदेश

बलराम कृषि महोत्सव में सामने आए बालाघाट के अनुभव इस बात को रेखांकित करते हैं कि किसानों की आर्थिक मजबूती केवल फसल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। डेयरी, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, मशरूम उत्पादन, कृषि वानिकी और आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को बहुआयामी ग्रामीण उद्यम में बदला जा सकता है। इसके लिए उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, संग्रहण, बाजार संपर्क और बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत करना भी जरूरी होगा।