पीएम-किसान की 24वीं किस्त से बिहार के 73 लाख से अधिक किसान परिवारों को मिले ₹1,476 करोड़, कृषि अवसंरचना की 521 इकाइयां राष्ट्र को समर्पित
पटना: पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी होने के अवसर पर बिहार के 73 लाख से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में ₹1,476 करोड़ से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर पटना के ज्ञान भवन में आयोजित राज्यस्तरीय पीएम-किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान कृषि अवसंरचना कोष के तहत विकसित 521 इकाइयों को राष्ट्र को समर्पित किया गया, जबकि बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर्स का भी शुभारंभ किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत देशभर के 9.34 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में ₹18,680 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित की गई।
बिहार के किसानों को मिली इस सहायता से राज्य के कृषि क्षेत्र में नकदी प्रवाह बढ़ने और खेती से जुड़ी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। किसान इस राशि का उपयोग बीज, खाद, कृषि उपकरण और अन्य जरूरी कृषि गतिविधियों में कर सकते हैं।
पटना में आयोजित कार्यक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी सहित राज्य सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कृषि अवसंरचना और बागवानी को मिला प्रोत्साहन
कार्यक्रम में केवल आर्थिक सहायता तक ही पहल सीमित नहीं रही, बल्कि कृषि क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं और उत्पादन के विविधीकरण पर भी जोर दिया गया। कृषि अवसंरचना कोष के अंतर्गत विकसित 521 इकाइयों का राष्ट्र को समर्पण कृषि उत्पादों के भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वहीं, 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर्स की शुरुआत से फल, सब्जी एवं अन्य बागवानी फसलों के उत्पादन को संगठित रूप देने, किसानों को बेहतर बाजार से जोड़ने और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
पीएम-किसान से अब तक 24 किस्तों में ₹4.64 लाख करोड़ से अधिक का हस्तांतरण
पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को सालाना ₹6,000 की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है। प्रत्येक किस्त में ₹2,000 सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे जाते हैं। योजना की डिजिटल भुगतान व्यवस्था में आधार प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से लाभार्थियों की पहचान और भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। 24वीं किस्त के बाद इस योजना के तहत कुल हस्तांतरण ₹4.64 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।

पीएम-किसान उत्सव दिवस के अवसर पर पटना के ज्ञान भवन में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत कृषि जन कल्याण संवाद का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य, खेतों की उर्वरता और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना तथा कृषि से जुड़ी समस्याओं पर सीधा संवाद स्थापित करना रहा।
इस दौरान बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं, अनुभव और सुझाव सुने। उन्होंने विभागीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को किसानों की समस्याओं के समाधान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कार्यक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और लघु जल संसाधन विभाग के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन भी उपस्थित रहे। कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
कृषि मंत्री ने कहा कि मिट्टी की उर्वरता और उसके प्राकृतिक स्वास्थ्य का संरक्षण टिकाऊ खेती की बुनियादी आवश्यकता है। लगातार असंतुलित उर्वरक उपयोग और रासायनिक इनपुट पर अत्यधिक निर्भरता से मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
उन्होंने अभियान के माध्यम से किसानों को खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने और खेती की लागत कम करने के उपायों से जोड़ने पर जोर दिया।
मिट्टी का स्वास्थ्य और किसान की समृद्धि एक-दूसरे से जुड़े
‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य संदेश है कि खेती की उत्पादकता केवल अधिक उर्वरक और रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल से नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके लिए मिट्टी में जैविक पदार्थों की उपलब्धता, पोषक तत्वों का संतुलन, जल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
प्राकृतिक खेती और संतुलित कृषि पद्धतियां अपनाने से खेती की लागत को नियंत्रित करने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और कृषि को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।
कृषि विकास के लिए आर्थिक सहायता के साथ टिकाऊ खेती भी जरूरी
पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त और कृषि अवसंरचना से जुड़ी पहलों ने कृषि विकास के दो महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा है। एक ओर किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता देकर उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भंडारण, प्रसंस्करण और बागवानी क्लस्टर्स के माध्यम से कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
इसके साथ ही ‘खेत बचाओ अभियान’ ने मिट्टी के स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खेती की दीर्घकालिक उत्पादकता को कृषि विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने का संदेश दिया।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों की वास्तविक समृद्धि के लिए आर्थिक सहायता के साथ उत्पादन लागत में कमी, बेहतर बाजार व्यवस्था, आधुनिक तकनीक, जल प्रबंधन और मिट्टी की उर्वरता का संरक्षण भी जरूरी है।
खेत बचेंगे, मिट्टी स्वस्थ रहेगी, तभी खेती टिकाऊ बनेगी और किसानों की समृद्धि का रास्ता मजबूत होगा।
स्वस्थ धरा, समृद्ध किसान और खुशहाल गांव—यही टिकाऊ कृषि विकास की बुनियाद है।





























