October 31, 2026 2:06 PM

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खेती से डेयरी तक, किसानों की आय बढ़ाने का नया रोडमैप!

बनासकांठा से किसानों को पीएम मोदी की बड़ी सौगात: करीब 10 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचे 18 हजार करोड़ रुपये, कृषि और पशुपालन को आधुनिक बनाने पर जोर!

गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान सम्मेलन को किया संबोधित; पीएम किसान सम्मान निधि की नई किस्त जारी, देशी पशु नस्लों के संरक्षण, डेयरी विकास, सिंचाई, सौर ऊर्जा और कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की घोषणाएं

बनासकांठा (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि, पशुपालन, डेयरी, सहकारिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकसित भारत की आधारशिला बताया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की नई किस्त जारी की, जिसके तहत देश के करीब 10 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई। कार्यक्रम में गुजरात के 50 लाख से अधिक किसानों को एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा और बनासकांठा के किसान परिवारों को लगभग 50 करोड़ रुपये मिलने की जानकारी दी गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की आर्थिक मजबूती के बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार की प्राथमिकता छोटे किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत घटाने, आधुनिक तकनीक को खेतों तक पहुंचाने और कृषि से जुड़े अन्य व्यवसायों को प्रोत्साहित करने की है।

इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री और जिलों के किसान भी तकनीक के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।

25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक सफर के 25 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए बनासकांठा से अपने पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम डीसा में लोक कल्याण मेले के रूप में आयोजित हुआ था, जिसमें करीब तीन लाख लोग शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र से उनकी सार्वजनिक सेवा यात्रा की शुरुआत हुई थी, वहां 25 वर्ष बाद आकर लोगों के बीच अपने अनुभव साझा करना उनके लिए विशेष अवसर है।

मां अंबा की पावन भूमि को नमन करते हुए प्रधानमंत्री ने मातृशक्ति, बच्चों, किसानों और पशुपालकों से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास का भी उल्लेख किया।

कृषि बजट में पांच गुना से अधिक वृद्धि का दावा

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट पांच गुना से अधिक बढ़ा है। सरकार ने किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ खाद, बीज, सिंचाई, फसल बीमा और कृषि तकनीक के क्षेत्र में भी कई कदम उठाए हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतिगत फैसलों के माध्यम से किसानों को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक लाभ या बचत हुई है।

इसके लिए उन्होंने पांच प्रमुख योजनाओं और व्यवस्थाओं का उल्लेख किया।

  • पीएम किसान सम्मान निधि: करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपये सीधे छोटे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाए गए।

  • उर्वरक सब्सिडी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतों में वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने देने के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): पिछले 12 वर्षों में गेहूं और धान किसानों को एमएसपी के रूप में लगभग 24 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: किसानों को फसल नुकसान के मुआवजे के रूप में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली।

  • पीएम-कुसुम योजना: लगभग 12 लाख सोलर पंप किसानों को उपलब्ध कराए गए, जिससे बिजली और डीजल पर निर्भरता तथा सिंचाई की लागत घटाने में मदद मिली।

प्रधानमंत्री के अनुसार, इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाना है।

छोटे किसानों को केंद्र में रखकर बनाई जा रही योजनाएं

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की कृषि व्यवस्था में छोटे किसानों की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक है। लंबे समय तक उनकी जरूरतों और चुनौतियों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला, लेकिन पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें सीधे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के लिए समय पर आर्थिक मदद, सस्ती खाद, बेहतर बीज और सिंचाई की सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। इन सुविधाओं से किसान खेती में निवेश करने और उत्पादन बढ़ाने की स्थिति में आते हैं।

26 करोड़ से अधिक किसानों को मिले सॉयल हेल्थ कार्ड

खेती में विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने सॉयल हेल्थ कार्ड योजना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश में अब तक 26 करोड़ से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों तक पहुंचाए जा चुके हैं।

इस कार्ड के माध्यम से किसान अपने खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति समझ सकते हैं और जरूरत के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इससे अनावश्यक खाद के उपयोग में कमी, खेती की लागत पर नियंत्रण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को नई किस्मों के बीज उपलब्ध कराना भी जरूरी है। पिछले वर्षों में करीब 3,000 नई फसल किस्में किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं।

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीक को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि पशुओं की नस्ल सुधार, समय पर टीकाकरण, बेहतर उपचार और वैज्ञानिक प्रबंधन से दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत देशी पशु नस्लों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देने की बात कही।

बनासकांठा में स्थापित नए रिसर्च सेंटर को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां गिर, साहीवाल और कांकरेज जैसी देशी गायों तथा मेहसाणा, मुर्रा और जाफराबादी जैसी भैंसों की नस्लों के संरक्षण और गुणवत्ता सुधार पर काम किया जाएगा।

कांकरेज नस्ल के लिए इस केंद्र की विशेष उपयोगिता बताई गई। इसके माध्यम से आधुनिक प्रजनन तकनीक, विशेषकर इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), का इस्तेमाल कर बेहतर नस्ल के गुण अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि पशु की नस्ल बेहतर होगी और उसे समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी तो दूध उत्पादन के साथ पशुपालकों की आमदनी भी बढ़ेगी।

पशुओं के टीकाकरण पर विशेष जोर

पशुधन को खुरपका-मुंहपका जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए चलाए जा रहे मुफ्त टीकाकरण अभियान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि अब तक करीब 150 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं।

इस अभियान के तहत आठ करोड़ से अधिक किसानों के पशुओं को मुफ्त टीकाकरण का लाभ मिलने की जानकारी दी गई।

उन्होंने कहा कि पशुओं को बीमारियों से बचाना केवल उनके स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि दूध उत्पादन और पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

भारत दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दूध उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया में पहले स्थान पर है। वर्ष 2013-14 में गाय और भैंस से प्रतिदिन औसत दूध उत्पादन पांच लीटर से भी कम था, जो अब बढ़कर करीब आठ लीटर हो गया है।

उन्होंने बताया कि दूध उत्पादन की उत्पादकता बढ़ाने में भारत की प्रगति वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय रही है।

डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के लिए दूध उत्पादन आज नियमित आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रहा है।

गोबर से बायो-CNG और जैविक खाद बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि पशुपालन से किसानों की कमाई केवल दूध तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। गोबर और कृषि अवशेषों का इस्तेमाल बायोगैस, बायो-CNG और जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है।

इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलने के साथ स्वच्छ ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में दो बायो-CNG संयंत्रों का शिलान्यास किया गया। प्रधानमंत्री ने बनास डेयरी जैसी सहकारी संस्थाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि डेयरी सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

मछली पालन और मधुमक्खी पालन से किसानों की आय बढ़ाने की पहल

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि के साथ अन्य ग्रामीण व्यवसायों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत का समुद्री खाद्य निर्यात दोगुने से अधिक हुआ है। इससे मछुआरों और मत्स्य पालन से जुड़े परिवारों के लिए नए बाजार और आय के अवसर बढ़े हैं।

मधुमक्खी पालन को भी किसानों की अतिरिक्त आमदनी का महत्वपूर्ण साधन बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में शहद उत्पादन दोगुना हुआ है।

उन्होंने बनासकांठा में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के पुराने प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि क्षेत्र में शहद उत्पादन से महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत प्राकृतिक शहद के प्रमुख निर्यातक देशों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

नर्मदा के पानी और ड्रिप सिंचाई से बदली बनासकांठा की तस्वीर

बनासकांठा के कृषि विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नर्मदा के पानी और टपक सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों ने क्षेत्र की खेती में बड़ा बदलाव किया है।

उन्होंने किसानों से पानी और बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की। उनके अनुसार, सीमित जल संसाधनों के बीच ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी तकनीकें खेती की लागत कम करने और पानी की बचत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

प्रधानमंत्री ने बनासकांठा के आलू उत्पादन की पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां का आलू देश और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना चुका है।

उन्होंने फ्रेंच फ्राइज बनाने वाले आलू प्रसंस्करण संयंत्र की क्षमता बढ़ाने का भी जिक्र किया। इससे किसानों से अधिक मात्रा में आलू की खरीद और कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

12 फल एवं सब्जी क्लस्टर को मिली मंजूरी

प्रधानमंत्री ने फल और सब्जी उत्पादन को संगठित बाजार से जोड़ने के लिए क्लस्टर डेवलपमेंट कार्यक्रम की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि देश में 12 क्लस्टरों को मंजूरी दी गई है। इनमें टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोको जैसी फसलों को शामिल किया गया है।

इन क्लस्टरों के माध्यम से नए बाग लगाने, पुराने बागों का कायाकल्प करने और किसानों को आवश्यक सहायता एवं सब्सिडी उपलब्ध कराने पर काम होगा।

उत्तर गुजरात के दो क्लस्टरों से बनासकांठा और साबरकांठा के आलू उत्पादक किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

गुजरात को रेल, मेट्रो और सड़क कनेक्टिविटी की सौगात

कार्यक्रम में कृषि और ग्रामीण विकास के साथ गुजरात की परिवहन सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि राज्य को दो नई रेल सेवाएं मिली हैं।

  • अहमदाबाद-वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस।

  • मेहसाणा-बेचराजी-साबरमती मेमू ट्रेन।

इसके अलावा अहमदाबाद मेट्रो के विस्तार के तहत गिफ्ट सिटी और एयरपोर्ट को जोड़ने वाली परियोजना का शिलान्यास किया गया।

अहमदाबाद-मेहसाणा हाईवे को चार लेन से आठ लेन में विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया गया।

चार हजार से अधिक आधुनिक आंगनबाड़ियों का शुभारंभ

प्रधानमंत्री ने महिला एवं बाल विकास से जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि गुजरात में चार हजार से अधिक आधुनिक आंगनबाड़ियों का शुभारंभ किया जा रहा है।

इनसे लगभग चार लाख बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के पोषण, मातृ स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास भी विकसित भारत के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच किसानों को खाद उपलब्ध कराने की बात

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण वैश्विक उर्वरक बाजार में पैदा हुई अनिश्चितता का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद और उसके कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद सरकार ने किसानों पर इसका अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया।

प्रधानमंत्री ने यूरिया और डीएपी की कीमतों का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत करीब 3,000 रुपये तक पहुंचने के बावजूद भारत में किसानों को यह 300 रुपये से कम में उपलब्ध कराई जा रही है। इसी तरह डीएपी की अंतरराष्ट्रीय कीमत पांच हजार रुपये से अधिक होने के बावजूद भारतीय किसानों को यह लगभग 1,350 रुपये में मिल रही है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खाद की उपलब्धता को लेकर अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें।

31 अक्टूबर को रन फॉर यूनिटी में भाग लेने की अपील

प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देशवासियों से रन फॉर यूनिटी में भाग लेने का आग्रह किया।

उन्होंने बताया कि इस बार एकता नगर में एकता पर्व का मुख्य आयोजन सुबह के बजाय शाम को किया जाएगा। शाम 5:30 बजे आयोजित कार्यक्रम में पुलिस और सुरक्षा बलों की परेड तथा विभिन्न झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

प्रधानमंत्री ने युवाओं सहित सभी देशवासियों से राष्ट्रीय एकता के संदेश को मजबूत करने और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देने की अपील की।

कृषि, डेयरी और ग्रामीण उद्योगों को जोड़ने पर जोर

प्रधानमंत्री के संबोधन का एक महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल फसल उत्पादन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। खेती के साथ डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण और जैव ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को जोड़ना होगा।

बनासकांठा में कृषि और डेयरी क्षेत्र के विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक, सहकारिता और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।