October 30, 2026 4:38 PM

Krishi Times

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यूपी में रबी सीजन की तैयारी तेज, खाद-बीज पर सरकार का फोकस!

रबी सीजन से पहले खाद और बीज की उपलब्धता पर यूपी सरकार सतर्क, कृषि मंत्री ने दिए सख्त निर्देश

लखनऊ दो समीक्षा बैठकों में उर्वरक भंडारण, सहकारी समितियों के जरिए वितरण, गुणवत्तापूर्ण बीजों की आपूर्ति और कृषि यंत्रों पर अनुदान की प्रगति पर हुई चर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों को खाद और बीज की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कृषि निदेशालय, लखनऊ में कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की। इसी दिन मंडल एवं जिला स्तर के कृषि अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर बीज वितरण, कृषि यंत्रों के सत्यापन और विभागीय योजनाओं की वित्तीय प्रगति का भी जायजा लिया गया।

दोनों बैठकों में किसानों को रबी फसलों की बुवाई के समय आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध कराने, वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने पर जोर दिया गया।

खाद की किल्लत रोकने और कालाबाजारी पर कार्रवाई के निर्देश

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने उर्वरक समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए उपलब्ध स्टॉक, भंडारण क्षमता और वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करने को कहा गया।

बैठक में पीसीएफ (प्रादेशिक कोऑपरेटिव फेडरेशन) और पीसीयू (प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन) के बफर स्टॉक की स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक उर्वरक पहुंचाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।

मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि खाद खरीदने के लिए किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतों पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।

रबी सीजन में उर्वरक व्यवस्था के प्रमुख बिंदु

  • सभी जिलों में डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

  • पीसीएफ और पीसीयू के बफर स्टॉक की नियमित निगरानी।

  • सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध कराना।

  • कालाबाजारी, जमाखोरी और ओवररेटिंग पर कार्रवाई।

  • उर्वरक वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना।

रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना, मटर और अन्य फसलों की बुवाई के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में समय पर खाद उपलब्ध होना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। आपूर्ति और वितरण में किसी भी तरह की बाधा से बुवाई और फसल प्रबंधन प्रभावित हो सकता है।

बीज वितरण और कृषि यंत्रों के सत्यापन की भी समीक्षा

दूसरी समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने मंडल एवं जिला स्तर के अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से आगामी रबी सीजन की तैयारियों की समीक्षा की। इसमें बीज वितरण की प्रगति, कृषि यंत्रों के सत्यापन और विभागीय योजनाओं की वित्तीय स्थिति पर बिंदुवार चर्चा हुई।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जाएं, ताकि बुवाई के लिए उन्हें अंतिम समय में परेशानी न हो। बीजों की उपलब्धता के साथ उनकी गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा गया।

कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान के संबंध में मंत्री ने सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और लंबित कार्यवाही को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराना और अनुदान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को कम करना है।

बैठक में विभागीय योजनाओं की वित्तीय प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन, उपलब्ध बजट के उपयोग और निर्धारित कार्यों को समयसीमा के भीतर पूरा करने पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

दोनों बैठकों में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बीज वितरण, कृषि यंत्रों के सत्यापन और विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि एम. के. शनमुगा सुंदरम, कृषि निदेशक त्र्यंबक मणि त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण की निदेशक कनीज फातिमा, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के निदेशक आशुतोष मिश्र, उपकार के सचिव एवं अपर निदेशक (दलहन-तिलहन) राजेश दुबे, अपर निदेशक योगेश प्रताप सिंह तथा संयुक्त निदेशक (अभियंत्रण) बलराम वर्मा शामिल रहे।

उर्वरक उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा बैठक में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, कृषि विभाग के प्रमुख सचिव एम. के. शनमुगा सुंदरम, सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव अजय शुक्ला, रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव कुमार प्रशांत, पीसीएफ के प्रबंध निदेशक नीरज शुक्ला, कृषि निदेशक त्र्यंबक मणि त्रिपाठी, सहकारिता के अपर निबंधक विनोद पटेल और संयुक्त निदेशक (उर्वरक) हरेंद्र मिश्र उपस्थित रहे।

किसानों के लिए क्या है इन फैसलों का महत्व?

रबी सीजन में खाद और बीज की उपलब्धता सीधे तौर पर बुवाई की समयबद्धता और खेती की लागत से जुड़ी होती है। यदि किसानों को जरूरत के समय उचित दर पर उर्वरक और गुणवत्तापूर्ण बीज मिलते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त खर्च, बाजार में भटकने और बुवाई में देरी जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।

इसी तरह कृषि यंत्रों पर अनुदान की प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता से किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण अपनाने में मदद मिल सकती है।

अब इन निर्देशों का वास्तविक असर जिला स्तर पर उपलब्ध स्टॉक, सहकारी समितियों के जरिए वितरण, शिकायतों पर कार्रवाई और किसानों को योजनाओं का लाभ मिलने की स्थिति से आंका जाएगा। रबी सीजन के दौरान इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।