September 22, 2026 8:09 PM

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खेती के साथ डेयरी अपनाएं, आय बढ़ाएं: मोहन यादव!

किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन और डेयरी पर जोर : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मऊगंज कृषि महोत्सव में वर्चुअल संबोधन, सिंचाई, बिजली और कृषि आधारित उद्योगों को लेकर किए कई अहम ऐलान

मऊगंज। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि राज्य सरकार का प्रमुख संकल्प है और कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाने के लिए खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि में नवाचार और कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है तथा किसानों की आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने मऊगंज में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को मंत्रालय से वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए किसानों, कृषि उद्यमियों और आम नागरिकों को डोल ग्यारस पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देवतालाब स्थित भोलेनाथ और अष्टभुजा महारानी को भी वर्चुअल नमन किया।

किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली देने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को कम करने और किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में आने वाले समय में किसानों को दिन के समय 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिंचाई, ऊर्जा और कृषि अवसंरचना में निवेश बढ़ाकर खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जाएगा।

प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीक से घट रही लागत

डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसान नीम कोटेड यूरिया, नैनो यूरिया, उन्नत बीजों और प्राकृतिक खेती जैसी तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इससे रासायनिक लागत घट रही है और मिट्टी की सेहत भी बेहतर हो रही है।

उन्होंने बताया कि उद्यानिकी क्षेत्र में भी किसान नए प्रयोग कर रहे हैं। स्ट्रॉबेरी, काला आलू, विशेष किस्म के तरबूज, मखाना और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती किसानों को बेहतर आय दिलाने का माध्यम बन रही है। मऊगंज क्षेत्र के टमाटर और प्याज की गुणवत्ता और स्वाद की भी उन्होंने सराहना की।

कृषि के साथ मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण से बढ़ेगी आय

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को बहुआयामी कृषि मॉडल अपनाने की जरूरत है। मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा कर रही हैं। कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।

1.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा सिंचाई लाभ

डॉ. यादव ने बताया कि सीतापुर-हनुमना सूक्ष्म दबाव सिंचाई योजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर लगभग 1 लाख 20 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि मऊगंज जिले के गौरमा, नैना और गाड़ा बांध क्षेत्र में कृषि विकास की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके अलावा नई गढ़ी सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसान वर्ष भर उत्पादन कर सकेंगे।

डेयरी क्षेत्र में किसानों के लिए नए अवसर

मुख्यमंत्री ने किसानों से दुग्ध उत्पादन को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से सांची ब्रांड को और मजबूत बनाया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार और आय के अवसर मिलेंगे। उन्होंने किसानों से डेयरी गतिविधियों को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित करने का आह्वान किया।

उन्नत किसानों के अनुभवों को बताया प्रेरणादायक

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मऊगंज जिले के प्रगतिशील किसानों जसमन पटेल, तुलसीराम पांडे, अनीता मिश्रा और उमाशंकर त्रिपाठी से वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने किसानों द्वारा अपनाई जा रही नई तकनीकों, फसल विविधीकरण और कृषि नवाचारों की जानकारी ली तथा उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना और ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर विकसित करना है। इससे कृषि क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था का और मजबूत आधार बन सकेगा।