किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का फैसला।!
नई दिल्ली। किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के विस्तार को गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पांच राज्यों के लिए 1,183.11 करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय स्वीकृति जारी की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और त्रिपुरा के कृषि मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह मंजूरी प्रदान की।
यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के तहत द्वितीय मदर सैंक्शन के रूप में जारी की गई है। सरकार का मानना है कि इस निवेश से खेतों तक आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई सुविधाएं, कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
किसानों की समृद्धि के लिए केंद्र और राज्यों की साझा रणनीति
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि केवल देश की खाद्य सुरक्षा का आधार नहीं है, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत भी है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें “टीम इंडिया” की भावना के साथ काम कर रही हैं ताकि प्रत्येक किसान तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।
बैठक में योजनाओं की प्रगति, फंड उपयोगिता और कृषि क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की गई। राज्यों द्वारा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
आंध्र प्रदेश को सबसे अधिक 409.40 करोड़ रुपये
आंध्र प्रदेश को कुल 409.40 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त स्वीकृत की गई है। इसमें PM-RKVY के तहत 296.09 करोड़ रुपये तथा कृषोन्नति योजना के तहत 113.31 करोड़ रुपये शामिल हैं।
राज्य में “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” कार्यक्रम और कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की विशेष सराहना की गई। माना जा रहा है कि यह राशि सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं और किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तमिलनाडु को 355.88 करोड़ रुपये, तिलहन और माइक्रो इरिगेशन पर जोर
तमिलनाडु को कुल 355.88 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है, जिसमें 251.79 करोड़ रुपये PM-RKVY और 104.09 करोड़ रुपये कृषोन्नति योजना के तहत दिए गए हैं।
राज्य में सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO-Oilseeds) के तहत तिलहन उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को बैठक में विशेष रूप से रेखांकित किया गया। यह राशि जल संरक्षण और तेल आयात पर निर्भरता कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती देगी।
ओडिशा को 219.65 करोड़ रुपये, कृषि यंत्रीकरण को मिलेगा बढ़ावा
ओडिशा के लिए 219.65 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें 117.94 करोड़ रुपये PM-RKVY और 101.71 करोड़ रुपये कृषोन्नति योजना के अंतर्गत शामिल हैं।
राज्य द्वारा कृषि यंत्रीकरण, कृषि विस्तार सेवाओं और किसानों तक योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खेती की उत्पादकता बढ़ाने और श्रम लागत कम करने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड को 106.67 करोड़ रुपये, प्राकृतिक खेती और बागवानी को प्रोत्साहन
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को 106.67 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसमें 65.78 करोड़ रुपये PM-RKVY तथा 40.89 करोड़ रुपये कृषोन्नति योजना के तहत शामिल हैं।
राज्य में प्राकृतिक खेती, कृषि अवसंरचना और बागवानी विकास कार्यक्रमों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। सरकार का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि मॉडल को मजबूत करना और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित करना है।
त्रिपुरा को 91.51 करोड़ रुपये, पूर्वोत्तर कृषि विकास को मिलेगी गति
पूर्वोत्तर क्षेत्र में कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए त्रिपुरा को 91.51 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें 36.51 करोड़ रुपये PM-RKVY और 55 करोड़ रुपये कृषोन्नति योजना के तहत दिए जाएंगे।
यह राशि राज्य में बांस मिशन, ऑयल पाम खेती, कृषि यंत्रीकरण और अन्य कृषि विकास गतिविधियों को मजबूती देने में उपयोग की जाएगी। इससे किसानों के लिए नए आय स्रोत विकसित होने की संभावना है।
किसानों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?
सरकार द्वारा जारी इस वित्तीय पैकेज का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत:
सूक्ष्म सिंचाई का विस्तार
“पर ड्रॉप मोर क्रॉप” कार्यक्रम के माध्यम से पानी की बचत होगी और कम पानी में अधिक पैदावार संभव हो सकेगा।
कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा
छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों पर सब्सिडी मिलेगी, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और कार्यक्षमता बढ़ेगी।
डिजिटल कृषि सेवाएं
मिट्टी की जांच, डिजिटल रिकॉर्ड, कृषि सलाह और पारदर्शी सेवा वितरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों को समय पर जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
दलहन, तिलहन और बागवानी पर फोकस
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर बाजार मूल्य और अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।
आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों के अनुसार PM-RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत जारी यह वित्तीय सहायता केवल राज्यों को धन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, तकनीक आधारित और टिकाऊ बनाना है। यदि राज्यों द्वारा इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण, कृषि लागत कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से अपील की कि स्वीकृत धनराशि को शीघ्रता से जमीनी स्तर पर उतारा जाए ताकि प्रत्येक पात्र किसान तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंच सके और “आत्मनिर्भर एवं समृद्ध किसान” का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सके।

























